सुलक्षण पंडित का मरना बहुत जरुरी था, दुःख कष्ट की ज़िन्दगी से मौत ही अच्छी – विजयेता भी आज़ाद हुई..
हम सब की चहेती अभिनेत्री सुलक्षणा पंडित जी का निधन हो चुका है। सच कहूं तो यह दुख की बात तो बिल्कुल नहीं है। जिसने अपने जीवन में सिर्फ दुख देखा और मरने के इतने नजदीक पहुंचने तक का वह सफर भी कांटों से भरा था। हां, अगर उनकी बहन विजेता पंडित नहीं होती, तो सुलक्षणा पंडित का देहांत कब का हो चुका होता। वह तो बस छोटी बहन विजेता ही थी जिन्होंने धूप बारिश में अपनी बीमार बहन की सेवा की। हमें बहुत दुख होता था उनकी यह हालत देखकर। उनकी कमर की हड्डी इस कदर टूट चुकी थी कि उनका दो पांव पर खड़ा होना नामुमकिन हो चुका था,
और तो और दिल पर इतने घाव थे कि अगर उन्हें याद किया जाए तो बड़े-बड़े सितारों का नाम बदनाम हो जाए। सुलक्षणा जी आप 71 की उम्र में चली गई। अच्छा ही हुआ। यह दुनिया आपके लिए बिल्कुल नहीं थी। आप जैसी खूबसूरत अभिनेत्री की किसने कदर की? पूरी दुनिया जानती है कि आपकी इस हालत के पीछे किस हस्ती का हाथ था और आपकी बहन विजेता पंडित का जीवन भी तपते कोयले के समान था। हमारी नजर में आप दोनों बहनें महान हैं,
आज आप इस दुनिया में नहीं हैं। इसके साथ विजेता के दिल पर से वह भारी बोझ भी हट गया। वह बोझ था संध्या पंडित के नाम का। सुलक्षणा जी आपको आजीवन इस सच से दूर रखा गया था कि आपकी बहन संध्या का कत्ल हो चुका था। विजेता ने और बाकी रिश्तेदारों ने आज तक इस बात को आपसे छुपा रखा। साल 2012 में ही संध्या का कत्ल हो चुका था। उस वक्त आप बहुत बीमार थी। आपकी मानसिक स्थिति बहुत कमजोर थी,
विजेता को लगा कि अगर यह बात सुलक्षणा को पता चली तो वह भी मर जाएगी। इसीलिए आपको आज तक लगता रहा कि आपकी छोटी बहन जिंदा है। आप अक्सर उसके बारे में विजेता से पूछती थी। संध्या कहां है? वो ठीक है ना? वह मुझसे मिलने क्यों नहीं आती? यह सवाल सुनकर विजेता के दिल के ना जाने कितने टुकड़े हो जाते और आंसुओं के धाराएं रोक कर वह आपको समझाती कि संध्या अभी-अभी आकर चली गई,
आप सो रही थी इसीलिए हमने आपको जगाया नहीं। आज हिंदी रेडियो के माध्यम से आपकी कहानी दर्शकों को जरूर पता चलनी चाहिए। कृपया ध्यान रखें कि सुलक्षणा पंडित की कहानी उनके देहांत से पहले लिखी गई है। अभी किसी ने खबर उड़ाई थी कि मेरा मेंटल संतुलन कुछ बिगड़ सा गया है। जी तो उन्होंने बोला कि सुलक्ष जी हम तो आपसे बात करते हैं मिलते हैं। हमको तो कुछ ऐसा लगता नहीं है। ऐसा लोगों ने क्यों उड़ाया? मेरे हर सवाल का आप इतने अच्छे तरीके से जवाब दे रही हैं। कौन ऐसी बातें उड़ा रहा है कि आपका मानसिक संतुलन अच्छा नहीं है,
आप तो ए वन लग रही हैं। देखिए मेरे ही अपने रिश्तेदार हैं। जी इतने ही लोग हैं जिन्होंने ये खबर उड़ाई है। अब हकीकत तो सामने आ ही जाती है। मैं आपके सामने बैठी हूं। आपको कुछ ऐसा महसूस हो रहा है? जी नहीं आप बिल्कुल ए वन लग रही है जैसा कि मैंने आपसे अभी अर्ज किया। थैंक यू। सुलक्षणा पंडित की कहानी की शुरुआत हम उनकी ही बहन संध्या पंडित की कहानी के साथ शुरू करने जा रहे हैं,
सुलक्षणा पंडित का परिवार कितना बदकिस्मत है यह जानना हो तो आपको संध्या पंडित की दर्द भरी दास्तान सुननी पड़ेगी। संध्या अपने विवाहित जीवन में बड़ी खुश थी। लेकिन 2012 के साल में उनके लापता होने की खबर सामने आई तो पंडित परिवार सदमे में चला गया। पहले ही दिन से मछली बहन विजेता पंडित ने संध्या के लापता होने की बात बड़ी बहन सुलक्षणा से छुपा कर रखी। ढेर सारे दिन गुजर जाने के बाद भी विजेता पंडित अपनी छोटी बहन का इंतजार करती रही। वो और उनके दो भाई जतिन ललित प्रतिदिन संध्या की तलाश में घर से बाहर निकलते थे,
आखिरकार विजेता को संध्या की खबर मिल ही गई। लेकिन इस बार संध्या की मौजूदगी के सबूत के तौर पर कंकाल के टुकड़े मिलने लगे। संध्या जिस घर में रहती थी उस घर के अगल-बगल वाली जगह की खुदाई हुई तो बहुत सारे कंकाल बाहर निकलने लगे। बाद में रिपोर्ट आने के बाद पता चला कि वो कंकाल खुद संध्या के हैं। पिछले 30 साल से पंडित परिवार के सर पर दुख और आपदाओं के बादल मंडरा ही रहे थे,
और उनमें इतनी शक्ति नहीं बची थी कि वे इस दुख को भी बचा सके। खासकर खुद सुलक्षणा भी इस हालत में नहीं थी। मछली बहन विजेता पंडित ने इस बार भी दुख और कष्ट का जहर निकल दिया और इस बात को 12 साल होने को आ रहे हैं और आज भी सुलक्षणा को लगता है कि उनकी प्यारी छोटी बहन जिंदा है। मुंबई क्राइम ब्रांच के तहत जांच पड़ताल हुई तो पता चला कि संध्या की हत्या के पीछे संध्या के ही बेटे रघुवीर सिंह का हाथ है,
दरअसल यह मामला पैसा और प्रॉपर्टी से जुड़ा हुआ था। नवी मुंबई वाले इलाके में राक्षस प्रवृत्ति के रघुवीर सिंह और उनके दोस्तों ने मिलकर अपनी ही मां संध्या की हत्या को अंजाम दिया था। शरीर के टुकड़े-टुकड़े करके लाश को अलग-अलग जगह में गाड़कर रघुवीर सिंह ने बड़ी धूर्तिता से खुद को बचाने का प्लान बनाकर रखा था।



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