हवा में लटका ट्रक, नदी में 10 ला-शें, रोंगटे खड़े कर देगा वीडियो..
हवा में लटका यह ट्रक, नीचे उफनती नदी और बीच में मौत बनकर टूटा हुआ एक पुल। यह कोई एक्शन फिल्म का सीन नहीं बल्कि सिस्टम की लापरवाही का जीता जागता सबूत है। तस्वीरें गुजरात की है। यह तस्वीर उस भयानक पुल हादसे की गवाही दे रहा है जिसमें 10 जिंदगियां नदी में समा गई। गुजरात के आनंद और वडोदरा को जोड़ने वाला महिषासागर नदी पर बना गंभीरा पुल आज सुबह ताश के पत्तों की तरह ढह गया। पुल के टूटते ही एक ट्रक, एक इको कार और कई मोटरसाइकिलें सीधे नदी की तेज धार में समा गई। इस हादसे में अब तक 10 लोगों ने अपनी जान गवा दी है जो इस,
पुल पर भरोसा करके अपनी मंजिल की तरफ निकले थे और यह कोई अचानक हुआ हादसा नहीं बल्कि एक ऐसी त्रासदी है जिसकी चेतावनी लंबे समय से दी जा रही थी। स्थानीय लोगों का आरोप है कि यह पुल सालों से जजर हालत में था। इसकी बदहाली और दरारें साफ दिख रही थी। लेकिन प्रशासन की नींद नहीं टूटी। यह पुल एक टाइम बंपर था जो आज आखिरकार फट गया और कई जिंदगियों को लील गया। प्रशासन अब हरकत में आया है। एनडीआरएफ और स्थानीय टीमें मौके पर हैं। लेकिन सवाल यह कि जब यह पुल मौत का जाल बुन रहा था तब यह हरकत क्यों नहीं दिखी? हादसे के बाद सामने आई,
तस्वीरों में पुल का एक बड़ा हिस्सा पूरी तरह गायब है और इस तबाही के बीच हवा में लटका यह ट्रक उस खौफनाक मंजर का सबसे बड़ा प्रतीक बन गया है जिसे देखकर लोगों की सासे अटक गई। अभी हम लोग जहां पे खड़े हैं 7:30 बजे के आसपास ये मूजपुर और गंभीरा के बीच का जो पुल है वो टूटने की खबर आई। स्थानीय तंत्र के सभी लोग यहां पे पहुंच गए थे। यह जानने को मिला कि ब्रिज के बीच में से 10 से 15 मीटर का एक 10 से 15 मीटर का जो एक स्लैब है वो टूट के गिर गया था। ब्रिज पे उस समय दो वाहन थे। वह भी वहां पर फंसे रहे और जो ब्रिज के ऊपर दो ट्रक, दो पिकअप और एक,
रिक्शा वह नीचे गिर के नदी में आ गए थे। स्थानिक लोगों ने और जो रेस्क्यू टीम्स हैं उन लोगों ने रेस्क्यू करना शुरू किया और अभी तक हमारे हाथ में जो डिटेल्स आई है लगभग नौ लोगों की मृत्यु हुई है और उनकी आगे की प्रोसेस पादरा सीएससी हॉस्पिटल में चालू है। नौ जितने लोगों को रेस्क्यू किया गया है। उसमें से पांच को सी एसएससी हॉस्पिटल रेफर किया गया है। जो रेस्क्यू किए गए लोग हैं उसमें किसी की भी हालत गंभीर नहीं है और बचाव की जो कामगरी है वो अभी भी चालू है। सर लोग अभी भी फंसे हुए हैं। हमारा अनुमान है आप देख सकते हैं कि दो,
ट्रक अभी भी पानी में डूबे हुए हैं। हमारा अनुमान है कि उसमें भी शायद कुछ लोग हो सकते हैं। वह जब एक बार उनकी डिटेल चेकिंग हो जाएगी तभी अभी मैं आपको परफेक्टली कह पाऊंगा। आनंद में टूटे हुए इस पुल ने गुजरात के उस काले दिन की यादें ताजा कर दी जिसे कोई नहीं भूल सकता। मोरबी का केबल ब्रिज हादसा जहां 100 से ज्यादा लोगों ने जल समाधि ले ली। सवाल वही है। क्या मोरबी की त्रासदी से कोई सबक नहीं लिया गया? क्या पुलों की फिटनेस जांच सिर्फ कागजों पर हो रही है? एक तरफ विकास के बड़े-बड़े दावे हैं और दूसरी तरफ यह टूटे हुए पुल है जो सिस्टम,
के खोखलेपन की कहानी कह रहे हैं। क्या इस बार भी जांच के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति होगी या फिर इस लापरवाही के गुनहगारों को सजा मिलेगी? यह सवाल आज हर कोई पूछ रहा है.



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