ट्रम्प का टैरिफ का किया विरोध, आनंद महिंद्रा-हर्ष गोयनका का दो टूक जवाब..

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6 अगस्त को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक कार्यकारी आदेश पर दस्तखत किए जिसमें वजह रूस से भारत की तेल खरीद को बताया गया। इस आदेश के तहत भारत पर लगे 25% टेरिफ को दो गुना करते हुए अतिरिक्त 25% का बोझ डाल दिया गया जो 27 अगस्त से लागू होगा। यानी अब मेड इन इंडिया उत्पादों के लिए अमेरिका का बाजार 50% महंगा हो जाएगा। ट्रंप के इस फैसले पर भारत में तीखी प्रतिक्रिया हुई,

उद्योग जगत की तरफ से पहला और सबसे मुखर जवाब आया आरपीजी एंटरप्राइजेज के चेयरमैन हर्ष गोयनका की तरफ से। उन्होंने सोशल मीडिया पर दो टुक शब्दों में लिखा जो हर भारतीय की भावना बन गया। गोयनका ने साफ लिखा कि आप अपने शुल्क बढ़ाओ हम अपना संकल्प बढ़ाएंगे,

भारत किसी के आगे नहीं झुकेगा। यह बयान सिर्फ एक कारोबारी का नहीं बल्कि एक नए आत्मनिर्भर भारत के आत्मविश्वास का प्रतीक है जो दबाव में झुकने को तैयार नहीं। अगर एक आवाज स्वाभिमान की थी तो दूसरी आवाज रणनीति और अवसर की। Mahindra ग्रुप के चेयरमैन आनंद महिंद्रा ने ट्रंप के इस कदम को अनचाहे परिणामों का नियम बताया। यानी एक ऐसा फैसला जो खुद अमेरिका पर उल्टा पड़ सकता है,

लेकिन इससे भी आगे बढ़कर उन्होंने इस चुनौती को साल 1991 के आर्थिक संकट जैसा एक ऐतिहासिक अवसर बताया। जब भारत ने अपनी पूरी अर्थव्यवस्था को बदल दिया था। उन्होंने इस अवसर को भुनाने के लिए दो बड़े मंत्र दिए हैं। आनंद महिंद्रा का पहला सुझाव है व्यापार करने के तरीकों में क्रांतिकारी बदलाव। वह कहते हैं कि अब छोटे-मोटे सुधारों से काम नहीं चलेगा। भारत को एक ऐसा सिंगल विंडो क्लीयरेंस सिस्टम बनाना चाहिए जहां किसी भी निवेशक को सारी मंजूरियां एक ही जगह से मिले,

अगर भारत निवेश के लिए रफ्तार, सरलता और पारदर्शिता दिखा सका तो दुनिया भर का पैसा चीन के बजाय भारत का रुख करेगा। उनका दूसरा सुझाव भारत के एक अनदेखे खजाने को लेकर है जो है पर्यटन। Mahindra के मुताबिक टूरिज्म भारत में विदेशी मुद्रा और रोजगार का वह स्रोत है जिसका हमने आज तक सही इस्तेमाल ही नहीं किया। उन्होंने वीजा प्रक्रिया को बेहद आसान बनाने, पर्यटकों के लिए विश्वस्तरीय सुविधाएं देने और देश में स्पेशल टूरिज्म कॉरिडोर बनाने की सलाह दी,

यह ऐसे सुरक्षित, साफ सुथरे और सुविधा संपन्न इलाके होंगे जो दुनिया भर के सैलानियों को खींच कर लाएंगे और विदेशी मुद्रा का इंजन बन जाएंगे। तो एक तरफ ट्रंप का टायर प्रहार है तो दूसरी तरफ भारतीय उद्योग जगत का स्वाभिमान और एक नया रोड मैप। हर्ष गोयंका और आनंद महिंद्रा की यह प्रतिक्रियाएं बताती हैं कि भारत अब सिर्फ बचाव की मुद्रा में नहीं बल्कि हर चुनौती का जवाब देने और उसे अवसर में बदलने का हौसला रखता है। अब देखना होगा कि क्या सरकार उद्योग जगत की इस आवाज को सुनकर इस संकट को एक नए आर्थिक अध्याय की शुरुआत में बदल पाती है या नहीं।

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