रेलवे स्टेशन पर तड़प रही महिला के लिए आए ‘मेजर’, जान बचाकर ये बोले!..

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पता नहीं किस रूप में आकर नारायण मिल जाएगा। जी हां, भगवान हमारी मदद किसी ना किसी रूप में आकर करते हैं। इसका प्रमाण मिला है उत्तर प्रदेश के झांसी में जहां ऐसा चमत्कार हुआ है जिसे देखने के बाद आपकी आंखें फटी की फटी रह जाएगी। मौत खड़ी थी। दर्द से औरत कहरा रही थी। लेकिन उस वक्त देवूपी दूत बनकर एक मेजर ने उस महिला की जान ना केवल बचाई बल्कि उस बच्चे को भी जिंदा कर दिया जो पैदा होते ही कुछ भी नहीं बोल रहा था। आखिर ऐसा क्या हुआ? पूरे रेलवे स्टेशन पर सनसनी मच गई। चीख पुकार के बीच आखिर एक मेजर ने कैसे एक महिला की,

जान बचाई? कैसे एक बच्चे की जान बचाई और क्या कुछ हुआ जब आप सुनेंगे तो आपके रोंगटे खड़े हो जाएंगे। चलिए आपको पूरा मामला विस्तार से बताते हैं। उत्तर प्रदेश के वीरांगना लक्ष्मीबाई झांसी रेलवे स्टेशन के ओवरबिज पर बड़ा चमत्कार हुआ है। जहां पर एक महिला अपने पति के साथ ट्रेन में यात्रा कर रही थी। महिला प्रेग्नेंट थी और कानपुर जा रही थी। कानपुर में उसका डेली रूटीन चेकअप होता था। डिलीवरी का समय नजदीक आ रहा था। लेकिन महिला को इतना नहीं पता कि इतना नजदीक है कि आज बच्चा ट्रेन में ही बाहर आने की जिद करने लगेगा।

हां, अचानक से महिला के पेट में खूब दर्द होने लगा। महिला तेज-तेज़ से चिल्लाने लगी। अगल-बगल के लोग चौंकने लगे और पति परेशान हो गया। आनन-फानन में लोगों की मदद के जरिए ट्रेन को रुकवाया गया। इसके बाद व्हीलचेयर की मदद से उसे ओवरबिज के उस पार ले जाने लगे। लिफ्ट का सहारा लिया। लिफ्ट जैसे नीचे खुली, महिला खड़ी हुई और गिर गई और उसका माथा एक पैर पर जाकर टकरा गया। यह पैर भगवान रूपी दूध का था। जी हां, यह पैर मेजर रोहित का था। मेजर रोहित ने जैसे ही प्रेग्नेंट महिला को देखा, वो समझ गए थे कि आखिर माजरा क्या है? उन्होंने तुरंत,

महिला को पकड़ा और कहा कि आप बिल्कुल भी चिंता ना करिए। मैं आपके सामने यहां खड़ा हूं। जब तक मैं हूं आपको कुछ भी नहीं हो सकता। लोग सन्न हो गए कि आखिर यह पुरुष है कौन? महिला का दर्द देखकर मेजर रोहित समझ चुके थे कि अस्पताल जाने भर का अब समय नहीं है। उन्होंने तुरंत अपने पट के जेब को तलाशा जिसमें पॉकेट चाकू रखा हुआ था। फिर बगल से कहीं धोती का इंतजाम किया। साथ में एक महिला से हेयर क्लिप लिया और फिर क्या रेलवे महिला कर्मचारियों को बुलाया और ओवरबिज पर ही महिला का ऑपरेशन शुरू कर दिया। महिला घबराने लगी। उसे संदेह था कि,

कहीं कुछ गड़बड़ ना हो जाए। लेकिन उनके पास उस वक्त कोई ऑप्शन नहीं था और महिला को मेजर रोहित की बात ऐसी लग रही थी जैसे भगवान खुद आकर संयम रखने के लिए कह रहे हैं। फिर क्या पॉकेट चाकू के जरिए चीरा लगाया और फिर बच्चे को बाहर निकालने की कोशिश की। नाड़े को हेयर क्लिप के जरिए बांध दिया। फिर बच्चा जब बाहर निकलता है तो सन रहता है। एक आवाज नहीं आती है। अगल के बगल के लोग एकदम से डर जाते हैं कि क्या बच्चे को कहीं कुछ हो तो नहीं गया। उस वक्त भी मेजर रोहित डरे नहीं बल्कि अपने सारे मेडिकल स्किल्स उन्होंने दिखाए,

और फिर बच्चा अचानक से रोने लगा। मां की भी हालत ठीक हुई। मां का भी दिल 1 सेकंड के लिए धड़कना बंद कर दिया था और जब बच्चा रोया तो सबके चेहरों पर मुस्कान आ गई। इसके बाद मेजर रोहित ने ऑपरेशन की सारी प्रक्रिया खत्म की और फिर महिला को अस्पताल भर्ती कराया गया। आप खुद ही सुनिए मेजर रोहित ने क्या कुछ कहा। फिर आपको बताते हैं कि आखिर मेजर रोहित उस वक्त कर क्या रहे थे। वहां पर अचानक वो लिफ्ट के बाहर कैसे पहुंचे। सब बताएंगे। पहले मेजर रोहित को सुनिए। यह देखने की कोशिश की कि उसका दर्द क्यों हो रहा है। फिर मुझे पता,

चला कि वो एक्टिव लेबर में थी। पहले पेशेंट को बताया कि आपको कोई भी चिंता होने की जरूरत नहीं है क्योंकि मैं हूं यहां पर। वह सिचुएशन वहां पर ऐसा था कि मैं वह पेशेंट को वो जगह से इवाकुएट नहीं करा सकता था और क्योंकि पेशेंट ऑलरेडी एक्टिव लेबर में थी। बेबी रिस्पांस नहीं दे रही थी। तो जितना भी मेरे क्लीनिकल स्किल्स थे रिससिडेट करने के लिए उससे फिर बेबी एक्टिव हुआ। बेबी ने क्राई किया तो आई वास वेरी हैप्पी। मैं अपना एनुअल लीव लेके अपने होमटाउन के लिए निकला था। तो जैसे ही मैंने झांसी स्टेशन पहुंचा पहुंचा तो मैंने जब मैंने सेकंड प्लेटफार्म के,

लिए जाने के लिए ओवरबिज लिया था तो वहां से मैंने देखा कि एक लिफ्ट से एक महिला चीखते हुए बाहर आई एक व्हीलचेयर पे और नीचे गिर गई थी। बिना कुछ सोचे समझे बिना एक सेकंड वेस्ट करे मैंने पहले उसके पास गया और यह देखने की कोशिश की कि उसका दर्द क्यों हो रहा है। फिर मुझे पता चला कि वो एक्टिव लेबर में थी। तो मैंने आसपास से कुछ हेल्प मांगने की को ये कोशिश की थी जिसमें मैं कुछ सामान कलेक्ट कर पाया। जैसे एक पॉकेट नाइफ होता है। कुछ क्लिप्स होते हैं और कुछ धोती, कुछ कपड़ा और मैंने उसको जाके पहले पेशेंट को बताया कि आपको,

कोई भी चिंता होने की जरूरत नहीं है क्योंकि मैं हूं यहां पर और मैं आपको 100% यहां से बहुत सेफली लेके जाऊंगा और पर वो सिचुएशन वहां पर ऐसा था कि मैं वो पेशेंट को वो जगह से इवाकुएट नहीं करा सकता था। और क्योंकि पेशेंट ऑलरेडी एक्टिव लेबर में थी और उसी को देखते हुए मैंने ये निर्णय लिया कि मैं उसका डिलीवरी वहीं पर करवाऊंगा और फिर जैसे ही अ मैंने जितना भी अपने क्लीनिकल स्किल्स अप्लाई करके वो बेबी को वहां पर डिलीवर किया। कॉर्ड को क्लैंप करने के लिए हेयर पिंस यूज किए। यह सर्जिकल नाइफ तो था नहीं। तो जो पॉकेट,

नाइफ था उससे कॉर्ड को सेपरेट किया था। उसके बाद बेबी रिस्पांस नहीं दे रही थी। तो जितना भी मेरे क्लीनिकल स्किल्स थे रिसोसिडेट करने के लिए उससे फिर बेबी एक्टिव हुआ। बेबी ने क्राई किया तो आई वाज़ वेरी हैप्पी। मुझे बहुत खुशी हुई उस चीज को देखने। पर मां अभी भी दर्द में थी क्योंकि अभी उसका प्लेसेंटा यह डिलीवर हुआ नहीं था और तो उसी समय के आसपास में मैं उनको एब्डोमिनल मसाज दे रहा था और कोशिश यही कर रहा था 10 से 15 मिनट कि उसका प्लाजेंटा भी डिलीवर हो जाए पर ये ना होने के कारण तब तक मेरे पास आसपास से किसी ने ग्लव्स,

भी लाके दिए तो ग्लव्स के माध्यम से उनका जो प्लाजेंटा था मैनुअल डिलीवरी करवाया था मैंने और उसके बाद मां भी बहुत संतुष्ट थी। मां बच्चे को देख के बहुत संतुष्ट थी और मैं भी बहुत संतुष्ट था। और वहां का जो रेलवे स्टाफ था उन्होंने बहुत मदद की प्राइवेसी मेंटेन करने के लिए जो सामान जरूरत था वो सामान लेके आने के लिए और मां को भी एनश्योर करने के लिए और सब कुछ बस भगवान के हिसाब से बहुत सही और सही वक्त पे सही जगह पे सब कुछ ठीक गया। ऐसी सिचुएशंस यह पहली बार नहीं है। मैंने अपने लाइफ में कभी भी अह जभी भी कोई एक्सीडेंट देखा,

रास्ते में या कहीं पर भी चाहे मैं ऑन ड्यू टू यू, ऑफ ड्यू टू यू मैंने हमेशा कोशिश की है कि वहां जाऊं उसको एटलीस्ट प्राइमरी ट्रीटमेंट दूं और उसको वहां से इवाकुएट कराऊं और यह पहला इंसिडेंस नहीं है। बता दें 31 साल के मेजर रोहित बचवाला झांसी मिलिट्री हॉस्पिटल में तैनात है। वो 5 जुलाई को अपने परिवार से मिलने के लिए हैदराबाद जा रहे थे। इसके लिए रोहित वीरांगना लक्ष्मीबाई झांसी रेलवे स्टेशन पर अपनी ट्रेन का इंतजार कर रहे थे। लेकिन तभी उन्होंने देखा कि एक महिला टीटीई गर्भवती महिला को व्हीलचेयर पर ले जा रही,

थी और फिर उन्होंने यह बड़ा चमत्कार किया। अब इस खबर पर आपकी जो भी राय है हमें कमेंट करके जरूर बताएं.

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