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स्वतंत्रता दिवस से पहले ओवेसी ने स्वतंत्रता सेनानी की तस्वीर, PM दफ्तर में लगाने की कर दी मांग!..

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10 साल मगर छह मर्तबा अंग्रेजों को लव लेटर लिखे कि मेरे को माफ कर दो। और जो साहब लिखे उनकी फोटो प्राइम मिनिस्टर के ऑफिस में है। तो हम वजीर आजम से रिक्वेस्ट करेंगे कि आप जरूर रखिए उनकी फोटो। काला पानी की जेल में थे। 30 इयर्स मामूली बात नहीं है। 30 साल थे। आप उनकी भी फोटो लगा के रखिए। देश की आजादी का जश्न शुरू होने वाला है। 79वें स्वतंत्रता दिवस की धूम देश भर में दिखाई देने लगी है,

अभी से ही घर-घर शान से तिरंगा लहरा रहा है। कल लाल किले की प्राचर से पीएम मोदी 79वें स्वतंत्रता दिवस समारोह में तिरंगा लहराएंगे और लाल किले से देश के नाम अपना संबोधन भी देंगे। लेकिन देश की इस आजादी के रंग में सबकी कुर्बानियों का संग मिला है। देश ने एक साथ मिलकर लड़ा है तो हमें आज यह जश्न का मौका मिला है। आजादी के जश्न के इसी मौके पर हैदराबाद में एक मंच से एआईएमआईएम चीफ असदुद्दीन ओवैसी ने पीएम मोदी से एक खास मांग की है,

ओवैसी ने आजादी के मतवाले मौलवी अलाउद्दीन की तस्वीर पीएम दफ्तर में लगाने की पीएम से गुजारिश की है। मेरा मानना यह है कि जंग प्लासी 1757 में शुरू हुई। पहली जंग आजादी 1857 में फिर नॉन कोऑपरेशन मूवमेंट 1920 में फिर 42 में क्विट इंडिया मूवमेंट शुरू हुआ। और फिर 47 में तो फाइनल और हर जगह पर आप देखेंगे कि इसमें मुसलमान, हिंदू, ईसाई सब लोग आगे थे। इस इस मुल्क को आजाद कराने के लिए और खासतौर से मैं आपको यह बताना चाहूंगा,

के आप उन लोगों को पाएंगे जो काला पानी में थे 10 साल मगर छह मर्तबा अंग्रेजों को लव लेटर लिखे कि मेरे को माफ कर दो। और जो साहब लिखे उनकी फोटो प्राइम मिनिस्टर के ऑफिस में है। तो हम वजीर आजम से रिक्वेस्ट करेंगे कि आप जरूर रखिए उनकी फोटो। मगर हम उनसे भी यह गुजारिश करेंगे कि मौलवी अलाउद्दीन जो 30 साल काला पानी की जेल में थे। 30 इयर्स मामूली बात नहीं है। 30 साल थे,

आप उनकी भी फोटो लगा के रखिए। तो यह इंसाफ का तकाजा भी है और इससे बेहतरीन मैसेज जाएगा अगर प्राइम मिनिस्टर अपने ऑफिस में मौलवी अलाउद्दीन की फोटो को रखेंगे। ऐसे में यह जानना बेहद जरूरी है कि असदुद्दीन ओवैसी ने जिनकी मौलवी अलाउद्दीन की तस्वीर पीएम दफ्तर में लगाने की मांग की है। आखिर देश की आजादी में उनका किरदार क्या है? उनका इतिहास क्या है? ओवैसी ने जिन मौलवी अलाउद्दीन का नाम लिया है,

तस्वीरों में वह ऐसे दिखते हैं। सैयद अलाउद्दीन हैदर इनका नाम था। लोग इन्हें मौलवी अलाउद्दीन के नाम से भी जानते थे। भारत के हैदराबाद स्थित मक्का मस्जिद के एक धर्मगुरु और इमाम थे। उन्हें 17 जुलाई 1857 को हैदराबाद रियासत की ब्रिटिश रेजिडेंसी पर हुए हमले का नेतृत्व करने के लिए जाना जाता है। यह हमला 1857 के भारतीय विद्रोह के दौरान हुआ था। मौलवी अलाउद्दीन को काला पानी की सजा सुनाए जाने और निर्वासित किए जाने वाले पहले कैदी के रूप में माना जाता है,

स्वतंत्रता आंदोलन के इतिहास के पन्नों में दर्ज है कि 17 जुलाई को मौलवी अलाउद्दीन और तुर्रेबाज खान के नेतृत्व में लगभग 500 लोगों ने मक्का मस्जिद से ब्रिटिश रेजिडेंसी तक एक विरोध मार्च निकाला। प्रदर्शनकारी हिंसक हो गए और रेजिडेंसी पर हमला कर दिया। ब्रिटिश सेना ने गोलीबारी शुरू कर दी। प्रदर्शनकारियों ने कुछ घंटों तक जवाबी हमला झेला लेकिन उसके बाद उन्हें पीछे हटना पड़ा,

उस दौरान तुर्रेबाज खान को गिरफ्तार कर लिया गया जबकि मौलवी अलाउद्दीन भागने में सफल रहे। हालांकि बाद में उन्हें पकड़ लिया गया और सेल्यूलर जेल में स्थानांतरित कर दिया गया। 28 जून 1859 को उन्हें हैदराबाद से बाहर भेज दिया गया। 1889 में किसी समय उनकी मृत्यु हो गई। करीब 30 साल उन्होंने काला पानी की सजा काटी। एबीपी गंगा खबर आपकी जुबां आपकी।

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