संजय लीला भंसाली की वेब सीरीज हीरा मंडी में इतनी बचका गलतियां की गई हैं कि देख लेंगे तो अपना सिर पकड़ लेंगे आप कहेंगे कि 200 करोड़ में बनी इस वेब सीरीज के लिए थोड़ी रिसर्च और कर ली जाती तो इसकी इतनी बुरी हालत ना होती फिल्म में इतनी ज्यादा गलतियां हो गई हैं कि पाकिस्तान में इसका विरोध तक होने लगा है हीरा मंडी जो कभी भारत का हिस्सा था अब पाकिस्तान के लाहौर में पड़ता है यह वेब सीरीज भारत और पाकिस्तान के विभाजन और आजादी से पहले के समय पर आधारित है सबसे बड़ी गलती एक सीन में हुई है.
इस सीन में सुनाक्षी अखबार पढ़ रही हैं जो 2022 में शुरू हुआ था और इस पर कोरोना वायरस की खबरें छपी हुई हैं भंसाली को लगा कि शायद उर्दू में छपी इन खबरों को कोई भारतीय नहीं समझ पाएगा सीरीज के चौथे एपिसोड में जब अदिति राव अपनी बहन आलम जेब को ताजदार के नाम लिखा गया खत लेकर नवाज को देने जाती हैं तो वहां उनके पीछे अलमारी में रखी गई किताबों में लेखिका उमैर अहमद का लिखा हुआ नॉवेल पीर ए कामिल भी दिखाई देता है यह नॉवेल 2004 में छपा था पाकिस्तान के लाहौर के लोगों का कहना है कि हीरा मंडी कभी इतना भव्य इतना शानदार नहीं रहा उनका मानना है कि यह मोहल्ला ग्लैमर से भरपूर बिल्कुल नहीं था यहां तो शोषण गुलामी और गरीबी थी.
वहां रहने वालों को कम से कम वैसा ही दिखाया जाना चाहिए था जो वह असली जिंदगी में थे हीरा मंडी में संजय लीला भंसाली ने उस गली में बगियां चलवा दी जहां एक छोटी सी कार भी आ जाए तो पैदल चलने वाले दीवारों से चिपक जाते थे लाहौर के लोगों का कहना है कि अगर किसी काल्पनिक जगह के ऊपर फिल्म बनाई जाए तो उसमें आपके पास लाइसेंस है कि आप जो चाहें वह दिखा दें लेकिन अगर आप यह दावा करते हैं कि यह असली जगह पर आधारित कहानी है तो सच्चाई से इतनी दूरी ठीक नहीं है हीरा मंडी असली हीरा मंडी से कहीं से कहीं तक मेल नहीं खाती भंसाली ने इतना बदल देना बिल्कुल अच्छा नहीं है.