भारत का सबसे महंगा विमान हादसा, इंश्योरेंस कंपनियों को कितना करना पड़ेगा भुगतान..

गुजरात के अहमदाबाद एयरपोर्ट के पास गुरुवार को हुआ एयर इंडिया विमान हादसा देश में अब तक का सबसे महंगा विमान हादसा साबित हो सकता है। माना जा रहा है कि इस हादसे के बाद बीमा कंपनियों को एिएशन इंश्योरेंस क्लेम के रूप में हजारों करोड़ की राशि चुकानी पड़ सकती है। नमस्कार, मैं हूं रिचा और आज मैं बात करने जा रही हूं अहमदाबाद विमान हादसे के इंश्योरेंस कवरेज के ऊपर,

इस खबर में पांच पॉइंट्स में हम जानेंगे कि विमानों के बीमा में क्या-क्या होता है शामिल? कैसे तय की जाती है बीमा क्लेम की राशि? वॉर और आतंकी हमले कैसे होते हैं कवर। परिवारों के मुआवजे की गणना कैसे होती है? अहमदाबाद विमान हादसे में विमान में सवार 242 लोगों में 241 लोगों के मौत की खबर है। विमान पूरी तरह तबाह हो गया है। हादसे की चपेट में आकर कई आम लोग भी अपनी जान गवा बैठे हैं,

दुर्घटना बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है। इसके बाद यह सवाल उठने लगा है कि बीमा कंपनियों को कितने अमाउंट का भुगतान करना होगा। एिएशन इंडस्ट्री के एक्सपर्ट्स का मानना है कि हादसे का शिकार एयर इंडिया का प्लेन बोइंग ड्रीमलाइन 7878 था जिसका इंश्योरेंस क्लेम ₹21 करोड़ से 28 करोड़ के बीच हो सकता है। भारतीय मुद्रा में यह ₹2400 करोड़ से अधिक हो सकता है। अब परत दर परत इंश्योरेंस की बारीकियों को समझते हैं,

विमानों के बीमा में क्या-क्या होता है शामिल? विमान हादसों के मामले में एयरलाइन कंपनियां आमतौर पर एयरक्राफ्ट फ्यूल इंश्योरेंस, स्पेयर पार्ट्स इंश्योरेंस और लीगल लायबिलिटी के लिए इंश्योरेंस लेती हैं। इस मामले में एयर इंडिया की ओर से लिया गया इंश्योरेंस दोनों ही हिस्सों यानी विमान की क्षति और यात्रियों की मौत दोनों को कवर करता है। खबरों के अनुसार एयर इंडिया ने अपने विमान का बीमा जीआईसीआरई और टाटा एआईजी से करा रखा है,

कैसे तय की जाती है क्लेम की राशि? जानकारों के अनुसार ऐसे मामले में एयरक्राफ्ट का घोषित मूल्य इंश्योरेंस कंपनी को बताया जाता है और उसी के आधार पर नुकसान का मूल्यांकन होता है। इस हादसे में शामिल एयरक्राफ्ट BTABN 2013 मॉडल का Being 787 ड्रीम लाइनर था। इसकी इंश्योरेंस वैल्यू 2021 में करीब 115 मिलियन थी। हालांकि इस क्लास के विमानों की मौजूदा वैल्यू 211 से 280 मिलियन के बीच मानी जा रही है,

वॉर और आतंकी हमले कैसे होते हैं कवर। जानकार बताते हैं कि एयरलाइंस कंपनियां आमतौर पर एक अतिरिक्त कवर भी लेती है जिसे ह्यूल वॉर रिस्क इंश्योरेंस कहा जाता है। अगर दुर्घटना, आतंकवादी हमले या युद्ध जैसे हालातों की वजह से होता है तो यह कवर भी एक्टिवेट हो सकता है,

हालांकि इस मामले में ऐसी कोई पुष्टि नहीं हुई है। परिवारों की मुआवजे की गणना कैसे होगी? मृत यात्रियों के परिवारों को मिलने वाला मुआवजा मॉन्ट्रियल कन्वेंशन 1999 के तहत तय किया जाएगा। जिसमें भारत 2009 में शामिल हुआ था। इसके अनुसार एक व्यक्ति के लिए 12,28,821 एसडीआर तक मुआवजा दिया जा सकता है। अक्टूबर 2024 तक के रेट के मुताबिक यह राशि करीब $1.33 प्रति एसडीआर यानी भारतीय रुपए में करीब ₹120 होती है,

यानी हर व्यक्ति के परिजन को करीब $1 करोड़ 54 लाख तक की राशि का भुगतान बीमा कंपनियों को करना पड़ सकता है। Air इंडिया अब Tata ग्रुप का हिस्सा है। इसलिए समूह ने इस दुर्घटना में जान गवाने वाले प्रत्येक यात्री के परिजनों को ₹1 करोड़ की अंतरिम सहायता देने की घोषणा की है,

खैर कितने ही मोटे रकम क्यों ना दे दिए जाए जिन परिवारों ने अपना सदस्य खोया है उनकी कमी तो कोई पूरी नहीं कर सकता या कोई भी अमाउंट उसकी भरपाई नहीं कर सकता। पर कह सकते हैं कि शायद इससे इकोनॉमिकली परिवार को थोड़ी राहत तो जरूर मिलेगी। ऐसी ही और खबरों के लिए देखते रहें वन इंडिया.

Leave a Comment