धर्मेंद्र के अंतिम संस्कार पर क्यों उठे सवाल? क्यों की जल्दी?..
इतना जल्दी सर इनका ये कर दिया अंतिम संस्कार किया ये कम से कम पब्लिक को तो जो उनके चाहते हैं इतने फैन है कहांहां से इंडिया से मेरे साथ एक राजस्थान से भी आया था अभी जस्ट कहां से राजस्थान से हां वो अभी मेरे से ट्रेन में था तो बोला कि बोला मैं भी वहीं चल रहा हूं लेकिन इतना अच्छा तो हम पब्लिक को दर्शन के लिए रखना चाहिए आपको दुख है इस बात का कि आप दर्शन नहीं कर पाए दर्शन नहीं मतलब ऐसा जगह रखा होता है,
घर के बाहर कम से कम लोग देख सके कि हां धर्म जी पवनहंस जो क्रिमेशन ग्राउंड है मैं वहां खड़ा हुआ हूं मेरे साथ कुछ लोग हैं जो दुखी भी हैं धर्म जी के जाने में और उनको को शिकायत भी है। सबसे पहले आपसे पूछूंगा आप कहां से आए हैं? सर मैं वरली से आया हूं। वरली से आए हैं। जी सर। और मैं दिखाना चाहूंगा कि बहुत ही इनकी आंखें आप देखें। ये बिल्कुल गम में इस वक्त डूबे हुए हैं। तो आपको धर्म जी के बहुत बड़े फैन रहे हैं,
बहुत सर बचपन से जब से पिक्चर देखना शुरू किया उनका ही पिक्चर देखता था क्योंकि वो ही सबसे बड़े एक्शन स्टार थे। उन्होंने ही एक्शन लाया था। सच में देखो। दिलीप साहब खुद बोलते हैं कि मुझे काश धर्म जी जैसा बनाया होता। उन्होंने खुद बोला था यह बहुत और उनका यह अंत इतना जल्दी सर उनका ये कर दिया अंतिम संस्कार किया कम से कम पब्लिक को तो जो उनके चाहते हैं इतने फैन है,
कहांहां से इंडिया से मेरे साथ एक राजस्थान से भी आया था अभी जस्ट कहां से राजस्थान से हां वो अभी मेरे साथ ट्रेन में था बोला कि बोला मैं भी वहीं चल रहा हूं लेकिन इतना तो हम पब्लिक को दर्शन के लिए रखना चाहिए आपको दुख है इस बात का कि आप दर्शन नहीं कर पाए दर्शन नहीं मतलब ऐसा जगह रखा होता है घर के बाहर कम से कम लोग देख सके कि हां धर्म जी इतने बड़े स्टार हैं आप 65 साल से लोगों को चाहते हैं,
अपने सोशल मीडिया में भी एक्टिव थे लेकिन अब यही है कि दुख तो हो रहा है सर। जी आप क्या बोलेंगे? मैं एरोली से आया हूं नई मुंबई। मेरे साथ में मेरी धर्मपत्नी भी हैं। और मैं उनका जाना मेरे लिए आज ऐसा है कि आज 24 नवंबर आज मेरे से कुछ कुछ खो गया है। मेरे जीवन से कुछ कोई चला गया है। धर्म जी जो थे मेरे जीवन का एक हिस्सा रहे। मैंने उनकी पहली फिल्म जागीर देखी थी कला मंदिर सा क्रूज में। वो था 1984 वो टाइम है,
और आज से 41 इयर्स तक मुझे उनके अलावा कोई पसंद नहीं आया। ये मेरा चाहे कोई रिश्तेदार हो, फ्रेंड सर्कल हो मेरी जो पहचान बनी कि मतलब मैं फिल्मों में प्रशंसक रहा तो एक ही शख्स का रहा वो धर्म जी का रहा और उनका जाना और सडनली मतलब मेरी बेटी ने आई वाज़ ऑन ऑफिस जॉब वर्क और मेरी बेटी का फोन आया कि पापा धर्म जी नहीं रहे। तो यह मेरे लिए सबसे बड़ी शौक थी,
और उसके साथ में हुआ कि मैं सारे काम छोड़ के आननफानन में मैं अपनी वाइफ के साथ यहां चला आया उन्हें श्रद्धांजलि देने। लेकिन जैसे कि भाई साहब ने कहा कि उस चीज का हमें हमेशा मलाल रहेगा कि हमें उनके अंतिम दर्शन नहीं हुए। कुछ लोग भी हैं जो हमारे साथ बात करना चाहते हैं। क्या उम्र है आपकी? क्या नाम है? मेरा नाम उमेश पंड्या है और धर्मेंद्र जी हमारे लिए बहुत प्रेरणादायक है और उनका जाना एक बहुत क्षति पहुंची है,
हमें और उनकी बहुत पिक्चर देखी हमने शोले उनका जयवी का याराना बहुत आज हमें बहुत दुख दुख हुआ है यहां पर आके बट आंखें ना पर वो हमारे दिलों में हमेशा जिंदा रहेंगे मैडम थैंक यू तो आप बात कर रहे हैं 70 के उस दौर का जहां पे एक एक्शन हीरो के तौर पर उनको देखा गया इसीलिए गरम धर्म भी उनका नाम रखा गया आप लोग किस दौर को याद कर रहे हैं शोले और मैं धर्म जी को कम से कम 20 बार मिला हूं उनके घर पे जाकर। मैं खुशनसीब हूं कि मेरे पास सारे उसके फोटो हैं,
तो इस तरह से फैंस से मिला करते थे वो घर पे। बोलते थे उनकी एक भाषा होती थी और वो बोलते थे अरे ऐसे सामने से बोलते थे। पूरा बदन भर भर आता था कि ऐसे लिजेट आदमी से हम लोग मिल रहे हैं। तो हमेशा मैं किसी को भी लेके जाता मैं खुद मिलता था तो प्यार से मिलते थे। गले लगाते थे भाई। हम बोलते थे और मेरे तो क्या बताऊं। मेरे बहुत यादी जुड़े उनके साथ घर पे बहुत सारी फोटो मेरे पास है,
और बचपन की उनकी सारी फिल्म आज जब आपको खबर मिली यहां पर ये खबर तो आपको 11 नवंबर को भी मिली होगी ये खबर आज मिली होगी तो आप लोग एज फैंस कैसा सोचते हैं बहुत अफसोस हो रहा है क्योंकि इनकी फिल्में मैंने बचपन में बहुत देखी है क्या बताऊं मेरा गांव मेरा देश मां है बहुत सारी फिल्में भी नाम नहीं बता सकता हूं अनगिनत फिल्में हैं पर आज ऐसे लेजेंड जाने का आज किस किरदार में आप उनको याद कर रहे हैं,
भाई बहुत सारे किरदार उन्होंने निभाए ऐसे मॉल में सबसे फेवरेट जो फेवरेट थे उनका सोने का जो रोल था वो कल कोई नहीं कर सकता है। हम इस वक्त धर्मेंद्र के बंगले के बाहर मौजूद है। यहां पर लगातार फैंस इकट्ठा हो रहे हैं। हमारे साथ कुछ फैंस हैं बात करने के लिए। पहली बात तो ये जानना चाहता हूं आपसे कि अ यकीन हो पा रहा है क्योंकि जिस तरीके से चीजें हुई जल्दी-जल्दी में आज भी जो फैंस हैं वो यकीन नहीं कर पा रहे कि धर्मेंद्र जी हमारे बीच नहीं है,
सर कैसा है मेरे को मैं मेरे से भी ज्यादा लोग फैन हैं धर्मपाजी के। पर मुझे तो यकीन ही नहीं हो रहा है कि मतलब वो चले गए साहब और मैं बहुत उनका इमोशनल मेरा अटैचमेंट था। मैं जभी भी आता था वो हम लोग को बाहर हम लोग बाहर खड़े रहने का। मेरी मम्मी के साथ में जाने मम्मी को भी लेके आने के तो वो अंदर बुलाकर एकदम मतलब बहुत ऐसा ऐसा मेरा ऐसा लगता है मेरे दादा थे वो दादा मैं दादा ही बोलूंगा उनको और वो मेरे को..



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