आखिरकार ब्लैक बॉक्स का डेटा हो गया डाउनलोड, अब बहार आएगी असली सच्चाई…
ब्रॉट टू यू बाय हायर वर्ल्ड्स नंबर वन होम अप्लायंसेस ब्रांड Air इंडिया फ्लाइट AI171 के क्रैश के बाद जांच के लिए ब्लैक बॉक्स अमेरिका भेजे जाने की खबरें चल रही थी। मगर अब इस पर अपडेट आई है। ब्लैक बॉक्स के डाटा को भारत में ही डाउनलोड कर लिया गया है। इसके बारे में सरकार ने एक प्रेस रिलीज जारी कर जानकारी दी। मगर यह बात इतनी अहम क्यों है? क्योंकि 12 जून 2025 को अहमदाबाद से लंदन जा रही यह फ्लाइट टेक ऑफ करते ही क्रैश कैसे हो गई? घटना के बाद यही सबसे बड़ा सवाल है। इसका जवाब ब्लैक बॉक्स में मिली जानकारी से ही पता लगेगा। साथ ही,
क्या क्रैश होने से पहले विमान के पायलट ने कुछ मैसेज दिए थे? इसका जवाब भी अब कुछ ही वक्त में मिल सकता है। सरकार ने बताया है कि दोनों ब्लैक बॉक्स मिल चुके हैं। यानी कॉकपेट वॉइस रिकॉर्डर जिसे सीवीआर कहा जाता है और फ्लाइट डाटा रिकॉर्डर एफडीआर। एक ब्लैक बॉक्स हादसे के अगले दिन यानी 13 जून को ही मिल गया था। इसे उस कॉलेज हॉस्टल की छत से रिकवर किया गया था जहां विमान क्रैश हुआ। दूसरा ब्लैक बॉक्स 16 जून को प्लेन क्रैश के मलबे में मिला। सरकार की ओर से जानकारी दी गई है कि इसे अहमदाबाद में हर वक्त सीसीटीवी की निगरानी,
में रखा गया। 247 फिर कुछ दिन बाद 24 जून को दोनों ब्लैक बॉक्स इंडियन एयरफोर्स के विमान से टाइट सिक्योरिटी के साथ दिल्ली में मौजूद एएआईबी लैब लाए गए। एआईबी यानी एयरक्राफ्ट एक्सीडेंट इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो वो संस्था जो यह पूरी जांच कर रही है। एआईबी के डीजी और अमेरिका की एनटीएसबी यानी नेशनल ट्रांसपोर्टेशन सेफ्टी बोर्ड की टीम की मौजूदगी में 24 जून की शाम डाटा एक्सट्रैक्शन का काम शुरू हुआ। उसी शाम विमान के सामने लगे ब्लैक बॉक्स से क्रैश प्रोटेक्शन मॉड्यूल यानी सीपीएम हासिल कर ली गई। फिर उसकी मेमोरी मॉड्यूल जिसमें,
डाटा सेव्ड रहता है उसका रिकॉर्डेड डाटा एआईबी लैब में डाउनलोड कर लिया गया। अब सीवीआर और एफडीआर डाटा को एनालाइज किया जा रहा है ताकि हादसे के कारणों की कड़ी से कड़ी जोड़ी जा सके और भविष्य के लिए एिएशन सेफ्टी को बेहतर किया जा सके यानी हवाई यात्रा की सेफ्टी। अब सीवीआर और एफडीआर ये कैसे इंश्योर करेंगे? इन दोनों का काम क्या होता है और इससे क्या पता चलेगा? यह भी जान लेते हैं। सबसे पहले बता दें कि प्लेन में दो ब्लैक बॉक्स होते हैं जो उड़ान के दौरान अलग-अलग अहम जानकारियों को रिकॉर्ड करते हैं। इसमें एक हिस्सा होता,
है कॉकपिट वॉइस रिकॉर्डर यानी सीवीआर। यह पायलट और ट्रू की बातचीत और कॉकपिट की आवाजें रिकॉर्ड करता है। इसके साथ ही यह रेडियो में हो रही उन बातों को भी रिकॉर्ड करता है जो कॉकपिट और एटीसी यानी एयर ट्रैफिक कंट्रोल के बीच होती हैं। एटीसी मतलब वो ग्राउंड स्टाफ जो फ्लाइट को उड़ाने में पायलट की मदद करता है। एटीसी रेडियो के जरिए पूरी यात्रा के दौरान पायलट से कांटेक्ट में रहता है। दूसरा हिस्सा होता है फ्लाइट डाटा रिकॉर्डर यानी एफडीआर। यह विमान की स्पीड, ऊंचाई और डायरेक्शन जैसे टेक्निकल डाटा को रिकॉर्ड करता है। यह इंजन की जानकारी जैसे फ्यूल,
का फ्लो और थ्रस्ट यानी इंजन को दी जाने वाली पावर ऐसी जानकारियों को भी स्टर्ड रखता है। इसके अलावा फ्लाइट कंट्रोल, प्रेशर, ईंधन आदि लगभग 90 प्रकार के डाटा की 24 घंटों से ज्यादा की रिकॉर्डेड जानकारी एफडी में इकट्ठी होती है। दिल्ली में हाल ही में एफडीआर एंड सीवीआर लैब की शुरुआत हुई है। जहां ब्लैक बॉक्स से डाटा निकाला और एनालाइज किया जा सकता है। यहीं पर इस ब्लैक बॉक्स की जांच की जाएगी। सरकार ने बताया कि इंटरनेशनल लेवल पर तय किए गए मानकों को ध्यान में रखते हुए ही ब्लैक बॉक्स से मिले डाटा की जांच की जा,



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