मनोज कुमार को क्यों दी गई 21 तोपों की सलामी? जानें वजह..

भारतीय सिनेमा के कोहिनूर मनोज कुमार हमेशा के लिए पंचकृत में विलीन हो गए [संगीत] स्वाहा [संगीत] शुक्रवार को उन्होंने मुंबई के कोकिला बहन धीरू भाई अंबानी अस्पताल में 87 साल की उम्र में अंतिम सांस ली थी इसके बाद शनिवार को मुंबई के जूहू स्थित पवनहंस श्मशान घाट में उनका अंतिम संस्कार किया गया उनके पार्थिव शरीर को तिरंगे में लपेट कर लाया गया और मुखाग्नि से पहले उन्हें 21 तोपों की सलामी भी दी गई.

मतलब पूरे राजकीय सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार हुआ इस भावुक पल के साक्षी बनने बॉलीवुड के कई बड़े सितारे पहुंचे जिनमें अमिताभ बच्चन प्रेम चोपड़ा जैसे नाम भी शामिल थे लेकिन क्या आप जानते हैं कि मनोज कुमार को 21 तोपों की सलामी क्यों दी गई यह राजकीय सम्मान आखिर होता क्या है आज की वीडियो में हम इसी पर बात करेंगे सबसे पहले बात करते हैं कि यह राजकीय सम्मान किसे दिया जाता है.

इस सवाल का जवाब साल 1950 में छिपा है जब पहली बार राजकीय सम्मान के लिए एक निर्देश बना था लेकिन तब यह सम्मान सिर्फ प्रधानमंत्री पूर्व प्रधानमंत्री और केंद्रीय मंत्रियों के लिए ही था हालांकि भारत में पहली बार राजकीय सम्मान से अंतिम संस्कार की घोषणा राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के लिए की गई थी उनके निधन के बाद राजकीय सम्मान के प्रोटोकॉल में समय के साथ-साथ जरूरी बदलाव किए गए थे.

अब तो किसी भी राज्य की सरकार किसी भी फील्ड की महान हस्तियों के लिए सम्मान का ऐलान कर सकती है इस विशेषाधिकार का उपयोग राज्य के सीएम अपने कैबिनेट मंत्रियों की सलाह से ही करते हैं फिर जिला मजिस्ट्रेट और पुलिस प्रमुख को इससे जुड़ा आदेश भेजा जाता है ताकि वे इसका सही तरीके से अनुपालन करा सकें मतलब यह कि चाहे कोई बड़ा नेता हो या कोई बड़ा साहित्यकार या फिर कोई बड़ा अभिनेता अपने क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान देने के लिए उन्हें राजकीय सम्मान दिया जा सकता है.

इसके अलावा देश का नागरिक सम्मान जैसे भारत रत्न पद्म विभूषण और पद्म भूषण पाने वाले किसी भी व्यक्ति को भी यह सम्मान दिया जा सकता है हालांकि इसके लिए केंद्र या राज्य सरकार को सिफारिश करनी पड़ती है आपको बता दें कि मनोज कुमार को भी साल 1992 में पद्मश्री अवार्ड से सम्मानित किया गया था तो यह तो हुई बात राजकीय सम्मान की इसके बाद बात करते हैं इस राजकीय सम्मान के तहत दी जाने वाली 21 तोपों की सलामी के इतिहास के बारे में आजाद भारत में 21 तोपों की सलामी पहली बार 26 जनवरी 1950 को दी गई थी.

जिस दिन देश का संविधान लागू हुआ था 21 तोपों की सलामी को देश का सर्वोच्च सम्मान माना जाता है 1971 से इसे सर्वोच्च सम्मान के रूप में देखा जाता है जिनका अंतिम संस्कार राजकीय सम्मान के साथ किया जाता है उन्हें 21 तोपों की सलामी दी जाती है जानकारी के मुताबिक 21 तोपों की सलामी को 52 सेकंड में पूरा किया जाता है क्योंकि राष्ट्रगान भी 52 सेकंड में पूरा होता है झंडा फहराने के साथ ही राष्ट्रगान शुरू होता है और बैकग्राउंड में 21 तोपों की सलामी दी जाती है.

आपको यह जानकर हैरानी होगी लेकिन 21 तोपों की सलामी सिर्फ सात तोपों से ही दी जाती है और इसके अलावा एक अन्य तोप होती है जो उल्टी दिशा में रहती है यानी टोटल आठ तोपे मौजूद रहती है इनमें तीन राउंड में सात तोपों का इस्तेमाल सलामी देने के लिए किया जाता है तो यह था जवाब इस बात का कि मनोज कुमार को अंतिम संस्कार से पहले 21 तोपों की सलामी क्यों दी गई आपको हमारी यह जानकारी कैसी लगी नीचे कमेंट्स में जरूर बताएं.

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