खामेनेई की मौत का राज़ खुला: सुप्रीम लीडर की तेहरान लोकेशन लीक करने वाला गद्दार को दबोचा..

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ईरान के सर्वोच्च नेता अली खामनेई तेहरान की किस बिल्डिंग में मौजूद हैं? इसकी जानकारी मोसाद और सीआईए तक किसने पहुंचाई?
किसने धोखेबाजी की? क्या खामने के परिवार के किसी सदस्य ने या फिर उनके सुरक्षा कर्मियों में से किसी एक ने? यह सवाल लगातार पूछा जा रहा है जब से खामने की मौत की खबर सामने आई है। इस सवाल का जवाब अभी तक किसी के पास नहीं है सिवाय मोसाद और सीआईए के उन शीर्ष अधिकारियों के जिन्होंने इस ऑपरेशन को अंजाम दिया है। हालांकि हमने इस सवाल का जवाब जानने की कोशिश की है

इतिहास के जरिए इतिहास खंगाल कर क्योंकि पिछले हालिया वर्षों में कई सारे ऐसे और ऑपरेशन हुए हैं और उनमें किस तरह से सीआईएम मोसाद ने काम किया था उसके आधार पर हम आपको जवाब देने की कोशिश करेंगे। हमारे साथ अभय जी हैं। अभय जी क्या लगता है किसने गद्दारी की होगी?


देखिए सबसे इंपॉर्टेंट बात कि ये सारे जो वॉर शुरू होने से पहले या फिर ये सारी कवायद थी ये एग्जैक्ट लोकेशन खमेका यूएस और मुसाद के पास कैसे गए। हमें पहले से ही पता है कि यह पिछली जो 12 डे वॉर हुई थी 2025 में तब भी यह जाना गया था कि ईरान की जो सेक्रेट काउंसिल्स है जो मिलिट्री एस्टैब्लिशमेंट है उसमें भी कई पैमाने पर अपने जो मोसाद एजेंट्स है वो इजराइल ने अभी नहीं तो कई दशकों से धीरे-धीरे कर कर उनको इंस्टिल किया है।

और आज जो अचानक से हमला हुआ सबसे इंपॉर्टेंट बात पहले वॉर शुरू होने से पहले ये कहा जा रहा था कि ईरान खामिनी को एक सीक्रेट बंकर में रखेगा। एक सीक्रेट बंकर जहां तक यूएस के बी टू बमबर्स भी ना पहुंच पाए। लेकिन जब ये वॉर शुरू हुआ उसके कुछ घंटों के बाद ही उनके सर्वोच्च नेता मारे गए। देखिए ये बात बिल्कुल सरल है और यह सामने रखी जा सकती है कि इंटरनली जो ईरान की इस्टैब्लिशमेंट के लोग थे वो यूएस और मोसाद के लिए काम कर रहे थे। तभी उनका सीक्रेट लोकेशन या फिर उनकी उस वक्त वहां पर है।

ये बात उनके तक पहुंची। सबसे इंपॉर्टेंट जब यह अटैक हुआ तो खामेनी अपने फैमिली के साथ उस्लिशमेंट में। ऐसा नहीं कि वो किसी काम की वजह से या फिर किसी मीटिंग लेने के लिए या फिर स्ट्रेटजी के हिसाब से वहां पर मौजूद थे। मतलब उनको अपने प्राइवेट स्पेस में भी मारा गया। तो हमें यह भी पता है कि ये भी कहा जा रहा था कि जो लारजानी जो वॉर टाइम चीफ जिनको चुना गया था

जब उनको खामेनी के साथ जब उनकी मीटिंग थी तब उनको आंख पर काली पट्टी बांधकर ले जाया गया। मतलब जिस व्यक्ति के हाथ में आपने पूरी सैन्य सेना दे दी, आपने ईरान की सारी मिसाइलें दे दी, उसको आपकी लोकेशन पता नहीं थी। लेकिन इजराइल, मोसाद, यूएस आइदर यूएस और मोसाद की टेक्नोलॉजी इतनी एडवांस हो चुकी है कि वो इस पृथ्वी पर जो भी जीव जहां पर है उसकी लोकेशन पता कर पा रहे हैं या फिर उनका इंटेलिजेंस मोसाद का इंटेलिजेंस इतना मजबूत है कि उसने ईरान में रहकर ईरान के लोगों में के बीच में अपने ऐसे शातिर स्पाइस रखे थे जिन्होंने खामिनी का पता भी उनके सामने रख दिया था। बिल्कुल एक सवाल और उठ रहा है अभय भाई कि क्या यह जल्दबाजी में किया गया ऑपरेशन था या बहुत सोच समझकर रणनीति बनाकर किया गया था?

क्योंकि कुछ लोग दावा कर रहे हैं कि जैसे ही पता चला मोसाद और सीआईए को उन्होंने तुरंत यह मिसाइल दागने का फैसला किया, बम गिराने का फैसला किया कि हम मार देते हैं और कुछ लोगों का कहना यह है कि बहुत पहले से जानकारी थी कि खान ने कहां छिपे हुए हैं और उन्होंने पहले से ही सारा बंदोबस्त कर रखा था और उन्होंने एक अच्छी तारीख चुनी, एक अच्छा समय चुना। उसके बाद उन्होंने बम गिराया और नतीजे में हमनी मारी भी गई। देखिए बिल्कुल एक तरीके से यही बात है कि यह कहीं ना कहीं एक अब्रप्टली शुरू हुआ ऑपरेशन नहीं है। इसकी सारी जानकारी या फिर एक तरीके से अंदाजा इजराइल और यूएस के लिए बिल्कुल था।

क्योंकि हमने लास्ट वॉर मैं बार-बार ये कंपेयर इसी वजह से कर रहा हूं क्योंकि लास्ट वॉर भी इतना बड़ा वॉर हो सकता था। लेकिन तब ट्रंप पीछे हट गए थे। नेतया आगे जाना चाहते थे। इस बार जो चीज हुई है कि खामिनी वहां पर आएंगे। खामिनी का वो लोकेशन होगा जो अभी जो रिपोर्ट सामने आ रहे हैं इसकी पूरी इंटेलिजेंस जानकारी इजराइल और ईरान के साथ थी और ये जो वॉर जब शुरू हुआ हमें ये भी जानना पड़ेगा कि इंडियन प्राइम मिनिस्टर वहां पर कुछ घंटों पहले मौजूद थे उसके बावजूद ये वॉर शुरू होता है तो ये वेल प्रीप्लांड और कहीं भी ईरान को इसके एंटीिसिपेशन नहीं थी

क्योंकि टॉक्स हो रहे थे और जो आज का स्पेसिफिक अटैक की अगर हम बात करें सबसे इंपॉर्टेंट जो बंकर बस्टर बॉम्ब्स है वो यूज किए गए उनको पोजीशन करने के लिए उनका प्रिपरेशन टाइम यह कुछ घंटों की बात नहीं हो सकती कि चलिए खामेनी बाहर आ गए। अब यहां से जेट्स भेजे जाए। ये इसका प्रिपरेशन एकद दिन पहले ही शुरू किया जाता है। इसका मतलब यह क्लियर है कि वो वहां पर मौजूद होंगे इसका अंदाजा इजराइल को था, मोसाद को था, यूएस को था और इसी वजह से ये वेल वेल प्रीप्लांड और वेल एग्जीक्यूटेड भी एक तरीके से ये ऑपरेशन था जिसका सक्सेस आज दुनिया देख रही है। बिल्कुल और जैसा कि आपने बताया कि वो इमारत जो थी

उसके ऊपरी भाग में नहीं थे। उसके नीचे भी नहीं थे। बहुत ज्यादा भूमिगत जो सुरक्षित ठिकाना बनाया गया था उस इमारत के वहां पर मौजूद थे और इसीलिए ऐसे बम का इस्तेमाल भी किया गया जो सीधे उस इमारत को भेदते हुए नीचे जाए और फिर फट जाए और नतीजतन सारे लोग मारे जाएं। ऐसा हुआ भी। एक सवाल और उठ रहा है कि अब ईरान के पास क्या विकल्प मौजूद हैं? क्या वो वैसा हमला कर सकता है? वैसी प्रतिक्रिया दे सकता है कि इजराइल और अमेरिका को बहुत ज्यादा नुकसान हो और वो जंग रोकने को मजबूर हो जाए?

देखिए जंग रोकने के लिए यूएस और इजराइल को मजबूर करने के लिए ईरान को कुछ अनप्रेसिडेंटेड करना पड़ेगा। मतलब जो अब तक किसी ने सोचा ना हो जो उन्होंने करने की कोशिश की कल तक कि उन्होंने खाड़ी देशों में अलग-अलग जो मेन इमारतें हैं जो मोन्यूमेंट्स है उनको टारगेट करने की कोशिश की। लेकिन आज के समय में स्टेट ऑफ फॉरमूस उन्होंने बंद करने की कोशिश की। लेकिन जो नेवल एक तरीके से वहां से जो ट्रांसपोर्टेशन है वो कहीं ना कहीं अभी भी चल रहा है। तो ईरान के पास अब एक सबसे निर्णायक क्षण यही है कि अपने सर्वोच्च नेता के मारे जाने के बाद अब उन्होंने नए नेता सामने आकर वो नई-नई जिम्मेदारी ले रहे हैं।

लेकिन आपके चीफ ऑफ जनरल स्टाफ आर्मी के वो भी मारे गए। आपके आईआरजीसी के सीनियर कमांडोस मारे गए। आपका सर्वोच्च नेता खामियानी मारे गए। तो क्या आप यूएस और इजराइल के सामने आकर जो वेनेजुअला ने रास्ता अपनाया कि टॉक्स उनकी एक तरीके से जो मिलिट्री सुपर पावर है उसका आपको सम्मान करना पड़ेगा और आगे जाकर शांति बरकरार रखने के लिए उनके साथ बातचीत करनी होगी।

लेकिन ये ईरान नहीं करेगा। ऐसा प्रीिलिमरी जो रिपोर्ट्स है वो यही कहते हैं। क्यों? क्योंकि अब बात डायरेक्टली उनके सर्वाइवल की आ चुकी है। वहां की इस्लामिक पूरी परिसंस्था की आ चुकी है कि वहां पर किस तरीके से ईरान इस्लामिक रहेगा या फिर नहीं रहेगा इस बात पर आ गया। तो ये डू और डाई की लड़ाई है। जहां पर आगे जाकर जो ये बचे कुछ आईआरजीसी के कमांडोस है क्योंकि उनके लिए अब उनके बड़े नेता का ये शहीद उनको एक तरीके से दर्जा मिल चुका है। तो वो कहेंगे कि जो बड़ा नेता हमारा या फिर जो सर्वोच्च नेता थे उन्होंने अगर वो खुद शहीद हुए तो उनकी लेजेंड की स्टोरी बनाकर वो ये पूरी फाइट जारी रखेंगे जैसे हमास ने रखा अंटिल अनलेस वो खत्म नहीं होगी। लेकिन अभय भाई यहां पर एक बात और उठती है।

अगर हम पिछले दो-तीन दशकों के इतिहास को देखें तो अगर अभी ईरान के जो भी सर्वे सर्वा बचे हुए हैं वो ट्रंप और नैतन्याहो की बात नहीं मानते हैं तो ईरान खंडहर बन जाएगा। जैसे हमने लीबिया को बनते हुए देखा है। सीरिया को बनते हुए देखा है। इराक को बनते हुए देखा है। हमास के नियंत्रण वाले क्षेत्र को बनते हुए देखा है। 7 अक्टूबर 2023 के हमले के बाद तो ट्रंप और नतनाऊ तो रुकने वाले नहीं है। वो जितनी बड़ी-बड़ी इमारतें हमें तेहरान में दिखती हैं वो तो आने वाले दिनों में खंडहर बन जाएंगी। स्कूल टूट जाएंगे। अस्पताल सारे टूट फूट जाएंगे तो वो कैसे रोकेंगे?


देखिए ये यही सवाल है कि जब यूएस और इजराइल इन जैसे जो इंप्रलिस्ट कंट्रीज है वो आगे बढ़कर ऐसी वॉर स्टार्ट करती है ना ह्यूमन राइट कुछ कहता है ना वेस्टर्न जो थिंक टंग्स है वो कुछ कहते हैं। वो इसे वर्ल्ड पीस के लिए एक पहल बताते हैं। तो यही बात है कि जैसे हमने देखा कि इस वजह से ईरान अगला नेक्स्ट सुप्रीम लीडर अनाउंस करने से भी बच रहा है और बचेगा भी। क्योंकि जब जब हमास ने या फिर हजबुल्ला ने अपने अगले चीफ्स बताए इजराइल ने उनको टेक आउट कर लिया,

मतलब उनको अटैक करके उनको मार दिया। जैसे हनी के साथ हुआ, सिनवार के साथ यही हुआ। तो एक तरीके से इजराइल और ईरान की ये जो पूरी रणनीति है उसके खिलाफ ईरान को ये सोचना पड़ेगा कि क्या हमें डू और डाई के मार्ग पे जाना है। क्योंकि अगर वो उस मार्ग पे जाएंगे तो ईरान एक दूसरा गाजा बनेगा। बिल्कुल। पिछले 2030 सालों में ईरान ने जो भी तरक्की की है वो सारी मिट्टी में मिल जाएगी। खामनी साहब की मेहनत खुद की सब कुछ तहस-नहस हो जाएगा।

और आपने संयुक्त राष्ट्र की बात की। संयुक्त राष्ट्र तो बिल्कुल अमेरिका के सामने पंगू बन जाता है। उसके पास वीटो पावर है। कोई भी कुछ ऐसा करने की कोशिश करेगा तो वहां पर वो सारा मामला अपने आप ही संयुक्त राष्ट्र में गिर जाएगा। कुछ हो नहीं पाएगा और सब कुछ अब ट्रंप और नितिनू के हाथों में है। जो भी नई जानकारी सामने आएगी हम आपको और देते रहेंगे

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