अहमदाबाद विमान हादसा में 32 सेकंड में क्या क्या हुवा, आखिरकार पूरा सच सामने आही गया?
आइए सबसे पहले हम एयर इंडिया क्रैश की बात करेंगे। इस हादसे को एक महीना होने वाला है और इसकी जांच चल रही है। माना यह जा रहा है कि शुक्रवार को शुरुआती जांच रिपोर्ट इसी शुक्रवार को आ सकती है। लेकिन उससे पहले ही इस हादसे को लेकर बहुत से खुलासे हो रहे हैं। बहुत सी नई बातें पता चल रही हैं। बहुत सी ऐसी जानकारियां मिल रही है जिनसे संदेह के बादल और ज्यादा गहरा गए हैं। और ये सारी जानकारियां इस हादसे के कारणों से जुड़ी हुई है। क्योंकि अभी तक यह नहीं पता चल पाया है कि हादसे की असल वजह क्या थी। मतलब पिन पॉइंट करके,
नहीं कहा लेकिन क्या-क्या नहीं हुआ है यह बताते हुए एक दिशा में जांच आगे बढ़ी है। ऐसा क्या हुआ कि सिर्फ 32 सेकंड और 32 सेकंड में 242 सवारियों से भरा हुआ विमान हादसे का शिकार हो गया। गिरते ही किसी बम की तरह क्यों फट पड़ा? तो आज हम इसी की गु्थी सुलझाने की कोशिश करेंगे। लेकिन इससे पहले आपको याद दिला दें कि 12 जून को अहमदाबाद से लंदन जा रही एयर इंडिया की फ्लाइट क्रैश हो गई थी। जिसमें 241 लोगों की मौत हो गई थी। जिसमें क्रू मेंबर्स भी शामिल थे। और 19 वो लोग भी मारे गए थे जिनके ऊपर यह प्लेन गिर गया था। सोचिए कोई,
हॉस्टल में खाना खा रहा था, कोई पानी पी रहा था, कोई टहल रहा था, वहां पर आगे बढ़ रहा था। जो जहां था वहीं पर जलकर राख हो गया। आपको याद होगा कि उड़ान भरने के सिर्फ 32 सेकंड के भीतर यह प्लेन क्रैश हो गया था। जिसके बाद से पूरी दुनिया में यह चर्चा यह सवाल उठने लगा कि ऐसा क्या हुआ कि ये प्लेन टेक ऑफ करता है। 32 सेकंड के अंदर हादसे का शिकार हो गए। तब से लगातार तरह-तरह के कयास लग रहे थे। अलग-अलग बातें हो रही हैं। कहीं उस बोइंग कंपनी पर सवाल उठ रहे थे जिसका यह प्लेन था। कोई इंजन फेलियर की बात कर रहा था तो कोई पायलट पर,
ही सवाल खड़े कर रहा था। यह पूरी दुनिया में हो रहा है। अभी तक हो रहा है। यहां तक कि यूर्स भी तमाम ऐसे पुराने पायलट्स जो रह चुके हैं एक्स पायलट्स वो भी वीडियो बनाकर खूब व्यूज बटोर रहे हैं। क्योंकि एक बहुत बड़ी घटना थी। लेकिन अब इस प्लेन क्रैश की जांच रिपोर्ट आने वाली है। भारत का एयरक्राफ्ट एक्सीडेंट इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो यानी कि एएआईबी इसकी जांच कर रहा है और उसकी शुरुआती रिपोर्ट माना जा रहा है 11 जुलाई को रिलीज हो सकती है। क्योंकि यह नियम है कि एिएशन एक्सीडेंट के केस में हादसे से 30 दिन के अंदर पहली रिपोर्ट आ,
जानी चाहिए। लेकिन उससे पहले इस रिपोर्ट के कुछ हिस्से सामने आए हैं जिनसे एक नई थ्योरी को जन्म मिल रहा है। विस्तार से आपको बताते हैं। एक एिएशन जर्नल है मशहूर एिएशन जर्नल जिसका नाम है द एयर करंट। इसी एिएशन जर्नल ने इस जांच में शामिल बहुत से लोगों से बात की और उनसे फिर सूत्रों के आधार पर यह रिपोर्ट पब्लिश की। इस एयर करंट द एयर करंट जो जर्नल है उसको सूत्रों ने बताया है। ऐसा लग रहा है कि जो रिपोर्ट आने वाली है उसका एक्सेस इस एयर करंट जर्नल को मिला है। क्योंकि उसको सूत्रों ने बताया है कि अभी तक की जांच के,
हिसाब से किसी मैकेनिकल किसी तरह की डिज़ इशू मतलब जो उसका डिजाइन था उसकी वजह से हादसा नहीं हुआ है। यह भी बताया गया है कि हादसे का कारण इंजन फेल होना भी नहीं दिख रहा है। तो इंजन फेल भी नहीं हुआ। हादसे के बाद के जो एनालिसिस है उससे पता चलता है कि फ्यूल फैल गया हो या एयरक्राफ्ट के फ्लैप पूरी तरह से ना खुले हो। नहीं ऐसा भी नहीं है। यानी थ्योरी यह बन रही है कि इन वजहों से एक्सीडेंट हुआ नहीं। ऐसे हादसों में अक्सर यह जो फैक्टर्स हैं यही प्रमुख कारण माने जाते हैं। लेकिन अब तो यह सारे हादसे के कारण नहीं माने जा रहे हैं। तो फिर हादसे का कारण है,
क्या? किसी वजह से तो हादसा हुआ होगा। इसीलिए कहा जा रहा है कि जांच का पूरा फोकस इंजन फ्यूल कंट्रोल स्विच की तरफ चला गया है। अब ध्यान से सुनिएगा जो रिपोर्ट आने वाली है और जो लोग जांच में गहन तरीके से डूबे हुए हैं उनसे उन सूत्रों से इस जर्नल द एयर करंट की रिपोर्ट के मुताबिक इस जर्नल की रिपोर्ट में लिखा गया है कि जांच में यह थ्योरी भी ध्यान में रखी गई है कि कहीं कॉकपिट में मौजूद फ्यूल कंट्रोल स्विच को गलती से बंद तो नहीं कर दिया गया था। यह हम आपको वही दिखा रहे हैं इस वक्त स्क्रीन पर क्योंकि यह तस्वीरें भी बाकायदा उसमें डाली गई,
हैं। लेकिन साथ ही यह लिखा गया है कि फ्लाइट के दौरान इन स्विचेस को बंद किया गया था या नहीं। इसका पूरी तरह से विश्लेषण करने में कई महीनों का वक्त अभी लग सकता है। यानी जो एक महीने की रिपोर्ट है उसमें यह नहीं आएगा। लेकिन अभी तक की जांच में जब बड़ी पैमाने जो थे जो बड़े कारण थे उन पर क्रॉस लग गया है तो उसके बाद सारा फोकस इन फ्यूल कंट्रोल स्विचेस पर आ गया है। ईंधन को नियंत्रित करने वाला बटन आसान भाषा में। ये जो स्विच है इसमें दो सेटिंग्स होती है। अब यह समझिए रन और कट ऑफ। रिपोर्ट में कहा गया है कि इन स्विचेस का,
इस्तेमाल तब किया जाता है जब प्लेन ग्राउंडेड होता है। या तो टेक ऑफ से पहले इंजन को स्टार्ट करने के लिए या फिर लैंडिंग के बाद इंजन को बंद करने के लिए कट ऑफ। लेकिन अगर किसी इमरजेंसी में फ्लाइट के दौरान कोई इंजन फेलियर होता है तो इंजन को शट डाउन करने के लिए या फिर रिस्टार्ट करने के लिए इन्हीं स्विचेस का इस्तेमाल किया जाता है। रिपोर्ट में लिखा गया है कि अगर फ्लाइट हवा में है और स्विच को रन से कट ऑफ पर शिफ्ट किया जाता है। ध्यान से सुनिए। यह जो द एयर करंट की रिपोर्ट है। यह किसके आधार पर है? उन सूत्रों के हवाले,
से है जो जांच कर रहे हैं जिनकी रिपोर्ट फाइनली इसी शुक्रवार को आने वाली है। इस रिपोर्ट में लिखा है कि अगर फ्लाइट हवा में है और स्विच को रन से कट ऑफ पर शिफ्ट किया जाता है तो इंजन को फ्यूल मिलना बंद हो जाता है। जिसकी वजह से वो इंजन बंद हो जाता है। उसे थ्रस्ट नहीं मिलता और वो सीधा नीचे ड्राइव करता है। वो ऊपर उड़ ही नहीं पाता। लेकिन अगर ऐसा होता है तो फिर इंजन के दो इलेक्ट्रिकल जनरेटर्स की सप्लाई भी रुक जाती है। जिसकी वजह से एयरक्राफ्ट के कई सारे सिस्टम कॉकपिट में बहुत सारे जो डिस्प्लेस हैं सामने जिस पर,
वो देखते हैं एयर प्रेशर या जो हाइट है जमीन से या जो बैलेंस है प्लेन का वो सब दिखता है सामने डिस्प्लेस में। वो तमाम डिस्प्लेस प्रभावित होते हैं। यह स्विच एयरक्राफ्ट के थ्रोटलल लिवर के नीचे होते हैं। एक बार फिर से अगर वो तस्वीर हम दिखा दें। ये देखिए। ये जो स्विचेस है ये थ्रोटलल लिवर के नीचे होते हैं। ताकि गलती से उन पर कोई हाथ ना पड़ जाए। इसका ध्यान रखा गया है। ऐसी गलती ना हो। इसके लिए बहुत सारे चेकक्स एंड बैलेंसेस हैं। स्विच का अपना मेटल स्टॉप लॉक होता है। अगर इस स्विच का इस्तेमाल करना होता है तो क्रू को उसे उठाकर हटाना,
पड़ता है। द एयर करंट की रिपोर्ट में सूत्रों के हिसाब से लिखा गया है कि ब्लैक बॉक्स का डाटा यह कंफर्म नहीं करता है कि स्विचेस को गलती से मूव किया गया था या फिर नहीं। और वैसे भी अभी ये थ्योरी है। इसे थ्योरी के ही रूप में देखा जाना चाहिए क्योंकि सूत्रों के हवाले से द एयर करंट ने जनरल ने ये रिपोर्ट छापी है। अभी 11 तारीख को जो रिपोर्ट आती है उसमें क्या कुछ खुलासे होते हैं उसके संकेत मात्र इससे मिल रहे हैं। इस रिपोर्ट में साफ लिखा गया है कि यह जानने में महीनों लगेंगे कि कहीं हादसा इस गलती की वजह से तो नहीं हुआ। कुल मिलाकर अभी भी इस हादसे,
की जांच चल रही है। लेकिन जो बड़े पैमाने हैं जिसमें डिजाइन हो या फ्यू जो इस कॉकपिट की बात हो रही है या इंजन की बात हो रही है उसके फेलियर से इंकार किया जा रहा है। इसकी शुरुआती रिपोर्ट 11 जुलाई को आने की उम्मीद है। उस रिपोर्ट में क्या निकल कर आएगा इस पर हमारी नजर बनी रहेगी। लेकिन अब ये बात सुनिए क्योंकि हमने इसके बाद सोचा कि इसकी गहन जांच करनी जरूरी है कि क्या जो शुरुआती रिपोर्ट में आता है वही अंतिम रिपोर्ट में आता है या फिर मामला पलट भी जाता है। ऐसा ही एक हादसा अक्टूबर 2018 में इंडोनेशिया में जावा के समंदर में भी हुआ था.



Post Comment