अग्निवेश की मौत पर टूट गए वेदांता ग्रुप के फाउंडर ने, किया बड़ा ऐलान..

35,000 [संगीत] करोड़ की संपत्ति लेकिन ईश्वर ने ऐसा दुख दिया कि मानो लगा हो किसी ने सीने पर पहाड़ रख दिया हो। 72 साल की उम्र में वेदांता ग्रुप के चेयरमैन अनिल [संगीत] अग्रवाल ने अपने जवान बेटे को खो दिया। पिता के कंधे पर बेटे की [संगीत] अर्थ थी। ऐसा दुख कि कोई अरबपति हो या कोई गरीब हर किसी शख्स के [संगीत] लिए यह उतना ही पीड़ा देने वाला है। बेटे के गुजरने के बाद अनिल अग्रवाल इस कदर टूट चुके हैं कि उन्हें अब जीने की कोई उम्मीद ही नजर नहीं आ रही,

आपने लोगों को यह कहते सुना होगा कि फलाना तो अरबपति है। खूब पैसे हैं उसके पास। [संगीत] उसे किस बात की चिंता? अब भला उसे क्या ही चाहिए?पर सोचिए कि अगर उस शख्स का जवान बेटा गुजर जाए तो क्या उसके ज़हन में नहीं आएगा कि अब क्या करेंगे इतने पैसे का? शायद यही हाल वेदता ग्रुप के चेयरमैन अनिल अग्रवाल का है। अनिल अग्रवाल ने अपने बेटे को याद रखते हुए [संगीत] एक इमोशनल पोस्ट लिखा,

उन्होंने इस बात का ऐलान भी किया कि वह अपनी संपत्ति का 75% से भी ज्यादा हिस्सा [संगीत] दान कर देंगे और अब एक सादा जीवन जिएंगे। बेटे को याद करते हुए पिता ने अपना दिल खोलकर [संगीत] सामने रख दिया। एक उम्रदराज पिता के लिए एक जवान बेटे को खोने का दर्द क्या होता है? यह अनिल अग्रवाल के [संगीत] नोट में साफ झलकता है। अनिल अग्रवाल ने लिखा, आज मेरे जीवन का सबसे दुखद दिन है। मेरे प्यारे बेटे अग्निवेश ने हमें असमय ही छोड़ दिया। वो महज 49 वर्ष के थे। स्वस्थ थे। जीवन से भरपूर थे और उनके सपने भी बहुत थे,

अमेरिका में स्किंग दुर्घटना के बाद न्यूयॉर्क के माउंट सिनाई अस्पताल में उनका इलाज चल रहा था। हमें लगा था कि अब सब कुछ ठीक हो गया है। लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था और अचानक दिल का दौरा पड़ने से हमारा बेटा हमसे छीन गया। अपने बच्चे को अलविदा कहने वाले माता-पिता के दर्द को शब्दों में बयान करना असंभव है। एक बेटे को अपने पिता से पहले नहीं जाना चाहिए। इस क्षति ने हमें इस कदर तोड़ दिया है कि हम अभी भी इसे समझने की कोशिश कर रहे हैं। मुझे आज भी वह दिन याद है जब अग्नि का जन्म 3 जून 1976 को पटना में हुआ था,

एक मध्यमवर्गीय बिहारी परिवार में जन्मे अग्नि एक मजबूत दयालु और दृढ़ निश्चय व्यक्ति के रूप में बड़े हुए अपनी मां की आंखों का [संगीत] तारा एक रक्षा करने वाला भाई एक वफादार दोस्त और एक ऐसा स्वाम हृदय जिसने हर किसी को प्रभावित किया। अग्निवेश कई प्रतिभाओं के धनी थे। एक खिलाड़ी, एक संगीतकार, [संगीत] एक नेता उन्होंने अजमेर के मेयो कॉलेज में शिक्षा प्राप्त की। फिर उन्होंने फजेरा गोल्ड जैसी बेहतरीन कंपनी की स्थापना की। हिंदुस्तान जिंक के चेयरमैन बने और सहकर्मियों और दोस्तों का समान रूप से सम्मान अर्जित किया,

फिर भी तमाम उपाधियों और उपलब्धियों के बावजूद वो सरल, स्नेही और अत्यंत मानवीय रहे। मेरे लिए वह सिर्फ एक बेटा नहीं था। वो मेरा दोस्त था। मेरा गौरव था। मेरी दुनिया था। किरण और मैं टूट चुके हैं। फिर भी अपने इस दुख में हम खुद को याद दिलाते हैं कि वेदांता में काम करने वाले हजारों युवा भी हमारे ही बच्चे हैं। अग्निवेश आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में दृढ़ विश्वास रखता था। वो अक्सर कहता था पापा एक राष्ट्र के रूप में हमारे पास किसी चीज की कमी नहीं है। हम कभी पीछे क्यों रहे? हमारा एक साझा सपना था कि कोई भी बच्चा भूखा ना सोए। किसी भी बच्चे को शिक्षा से वंचित ना रखा जाए,

एक महिला अपने पैरों पर खड़ी हो और हर युवा भारतीय को काम मिले। मैंने अग्नि से वादा किया था कि हम जो भी कमाएंगे उसका 75% से ज्यादा हिस्सा समाज को वापस दे देंगे। आज मैं उस वादे को दोहराता हूं और पहले से भी सरल जीवन जीने का संकल्प लेता हूं। उसके सामने बहुत जीवन था। बहुत सारे सपने थे जिन्हें पूरा करना बाकी था। उसकी अनुपस्थिति से उसके परिवार और दोस्तों के दिलों में एक खालीपन आ गया है। हम उसके सभी दोस्तों, सहकर्मियों और शुभचिंतकों का धन्यवाद करते हैं जो हमेशा उसके साथ खड़े रहे। बेटा तुम हमारे दिलों में,

हमारे काम में और उन सभी लोगों के दिलों में हमेशा जीवित रहोगे जिन्हें तुमने छुआ। मुझे नहीं पता कि तुम्हारे बिना इस रास्ते पर कैसे चलूं। लेकिन मैं तुम्हारी रोशनी को आगे ले जाने की कोशिश करता रहूंगा। बता दें अनिल अग्रवाल के बेटे अग्निवेश अग्रवाल का 39 साल की उम्र में कार्डियक अरेस्ट के चलते निधन हो गया। अग्निवेश अग्रवाल वेदता कंपनी की तलवंडी साबू पावर लिमिटेड के बोर्ड में थे। उन्होंने फजाइरा गोल्ड जैसी कंपनियां भी बनाई। एक अरबपति परिवार से होने के बावजूद भी वह अपना जीवन सादा [संगीत] ही रखना पसंद करते थे। उनके ख्याल उनके पिता अनिल अग्रवाल से काफी मिलते जुलते थे,

अनिल अग्रवाल वेदता रिसोर्सेज [संगीत] के फाउंडर और चेयरमैन है। उन्होंने साल 1976 में वेदता ग्रुप की शुरुआत की थी। आज वेदता मेटल, माइनिंग, पावर और ऑयल [संगीत] जैसे बड़े सेक्टर्स में काम करती है। इस कंपनी ने केवल भारत ही नहीं बल्कि विदेश [संगीत] में भी नाम कमाया। अनिल अग्रवाल की पहचान एक सेल्फ मेड बिजनेसमैन के रूप में रही है। अनिल अग्रवाल को वेदता ग्रुप खड़ा करने के लिए काफी चुनौतियों का सामना करना पड़ा। साल 1954 में अनिल अग्रवाल का जन्म बिहार [संगीत] के पटना में हुआ था। अनिल अग्रवाल के घर की परिस्थितियां बहुत अच्छी नहीं थी। बहुत कम लोग जानते हैं कि [संगीत] उन्होंने अपने पिता के साथ कबाड़ के काम से शुरुआत की थी,

महज 19 [संगीत] साल के थे अनिल अग्रवाल जब वह आंखों में सपने लिए मुंबई पहुंचे थे। पैसे कम थे लेकिन उनके [संगीत] हौसले मजबूत थे। कई बिजनेस में नुकसान होने के बावजूद भी उन्होंने हार [संगीत] नहीं मानी और संघर्ष जारी रखा। और उनकी जीत मेहनत रंग [संगीत] लाई। उन्होंने वेदांता ग्रुप अपने दम पर खड़ा किया। यह फर्श से [संगीत] अर्श का सफर यकीनन अनिल अग्रवाल के लिए आसान नहीं था लेकिन उन्होंने कर दिखाया,

फोब्स के मुताबिक अनिल अग्रवाल और उनके [संगीत] परिवार की नेटवर्थ तकरीबन 4.2 अरब डॉलर है [संगीत] जो भारतीय रुपए में लगभग ₹35,000 करोड़ के आसपास होती है। इतनी नेटवर्थ होने के बावजूद भी बड़ा सवाल यह भी है कि इतने पैसे होने [संगीत] के बावजूद अगर कोई पिता अपने बेटे को बचा ना सके। अगर उनका जवान बेटा उन्हें हमेशा हमेशा के लिए छोड़कर चला जाए तो उस पिता के मन की स्थिति क्या होगी?

कितना असहाय महसूस करते होंगे वह खुद को। अनिल अग्रवाल के दिल के दर्द को मापना बहुत मुश्किल है। लेकिन उसे [संगीत] समझना हर किसी के लिए बेहद आसान होगा। अपने बेटे के लिए जब अनिल अग्रवाल ने अपनी भावनाएं जाहिर की तो उनका ढंडस [संगीत] बंधवाने वाली और उनके बेटे के लिए प्रार्थना करने वालों का सैलाब उमड़ पड़ा। देश भर से ही नहीं दुनिया भर से [संगीत] लोग अग्निवेश अग्रवाल की आत्मा की शांति के लिए प्रार्थनाएं भेज रहे हैं.

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