99% लोगोको नहीं पता उर्फी जावेद की असली सच्चाई, जान लीजिये अभी…

urfi javed real story..

इस लड़की को आपने कहीं ना कहीं देखे आयोग का इसके जी पैशन को देखकर आपके मन में ख्याल आया होगा क्या कि लड़की है कौन और इतने अजी उल्टे सीधे कपड़े क्यों पहन सी रहती है और ज्यादातर बार तो इन कपड़ो में सड़कों पर घूमते हुए देखा जाता है तो बहुत से लोगों का कहना है कि रोज ऐसे अजीब से कपड़े पहनकर लोगों की टेंशन पब्लिसिटी के लिए यह सब करती है आप इस बात में कितनी सच्चाई है और यह लड़की कौन है और क्या बजाय उनके ऐसे कपड़े पहनने के पीछे चलिए जानते हैं इस वीडियो में तो हेलो फ्रेंड्स वेलकम बैक टू माय चैनल उम्मीद करती हूं.

आप सभी से एक और हल्दी होंगे आज के इस वीडियो में हम बात करेंगे उर्फ जावेद के बारे में साथ जानेंगे इनके ऐसे कपड़े पहने के पीछे का रीजन और बहुत सी अनसुनी बातें इनके बारे में जो शायद आप नहीं जानते होंगे और कैसे एक मुस्लिम कंज़रवेटिव फैमिली से निकलकर उर्फ हां यहां तक पहुंचे हैं और वह अपने आप को मुस्लिम तक भी नहीं मानती जानते इन सब बातों की बेटी का क्या कारण है और क्यों लॉग इन ए इतना रोल करते हैं इनके फ्लावर्स की लिस्ट अपने अप्रिशिएट करने वाले लोगों से ज्यादा संख्या नेगेटिव लोगों की है जो इन ए अक्षर गालियां देते हैं और रोल करते नजर आते हैं ऐसा क्यों है इन सभी के बारे में वीडियो में आगे बात करेंगे उससे पहले जान लेते हैं कि आखिरी और पिज्जा विद है कौन पंद्रह अक्टूबर 1996 को नवाबों के शहर लखनऊ में एक अंदर मिट्टी मुस्लिम फैमिली में एक लड़की का जन्म हुआ.

जिन्हें आज आप उर्फ जावेद के नाम से जानते हैं और फिर बचपन से ही बहुत अंदर कॉन्फिडेंट चाइल्ड थी और बचपन से ही इन्हें अपने क्लासमेट्स द्वारा बहुत ही बॉडी स्लिम और बोली किया जाता रहा है और फिर की फैमिली में मम्मी एक भाई और एक बहन है और फिर अपने पापा को अपनी फैमिली का हिस्सा नहीं मानती क्योंकि उन्होंने इनकी फैमिली और उसी को काफी टॉर्चर किया है और दूसरी शादी कर ली जिसके कारण और फिर इनके पापा के रिश्ते काफी ज्यादा खराब हो गए थे उन्होंने अपने स्कूल इन लखनऊ तो यह सिटी मोंटेसरी स्कूल से कंप्लीट की है और फिर स्कूलिंग एक नार्मल बच्चे जैसी नहीं रही है इन्हें बहुत ज्यादा बोली और पिक्चर किया जाता रहा है दर्शन के साथ एक एसिडिटी हुई थी जिसके बाद और फिर पूरी तरह टूट गई थी दरअसल अपने स्कूल के टाइम में जब उर्फी केवल नाइंथ क्लास में थी.

मीणा इनकी क्लास के कुछ बिगड़े हुए लड़कों ने उर्फ के कुछ फोटोस लिख कर दिए थे जो कि किसी ने कुछ दिनों बाद ही कुछ एडल्ट साइट्स पर अपलोड कर दिए थे और यह बात बर्फी के घरवालों और रिलेटिव्स को पता चल गई थी रिलेटिव्स ने तो इन्हें काफी गंदा और भला-बुरा बोलना शुरू कर दिया था और यहां तक कि कुछ लोगों का कहना था कि बर्फी का बैंक अकाउंट चेक करना चाहिए छुट्टी न जरूर इन सब गलत कामों से बहुत सारे पैसे कमा लिए होंगे और उसी के घरवालों ने इन्हें स्कूल जाने से भी रोक दिया उस समय और फिर यह नहीं समझ पा रहे थे कि आखिर इन की गलती क्या है कि सीरियल के फोटोस वेबसाइट पर डाल दिए तो इसमें इंका क्या कसूर मात्र 14 साल की बर्फी के साथ सोसायटियों घरवाले ऐसा बर्ताव क्यों कर रहे हैं उन्हीं के साथ खड़े होने कि वजह लोग इन्हें ब्लेम कर रहे थे और इस दौरान वह बहुत ज्यादा मेंटल टार्चर से दो प्रवीण उर्फ जैसे-तैसे अपने आप को संभाल रही थी यहां तक कि स्कूल की तरफ से भी हुए एकदम सोसायटी जैसा रवैया देखने को मिला और स्कूल से भी निकाल दिया गया और फिर काफी साल तक प्रशिक्षण से टॉर्चर में रहती रहीं.

और फिर एक दिन इनके पापा ने इनकी फैमिली को छोड़कर दूसरी शादी करने का फैसला किया और तब इन्हें पहले तो बहुत बुरा लगा लेकिन इन्होंने इस बात को एक्सेप्ट किया और फिर पॉजिटिव रहते हुए सोचा कि उनके पापा दूसरी शादी कर लेंगे तब यह रिस्ट्रिक्शन से टॉर्चर से निकल जाएगी और फिर के बाप ने दूसरी शादी कर ली जिसके बाद इनके छोटे भाई-बहन और मम्मी के रिस्पांसिबिलिटीज उसकी पर ही आ गई थी है और तब मृत्यु दौरान ग्रेजुएशन कर रही थी इसके साथ-साथ उन्होंने कॉल सेंटर में जॉब करना भी शुरू कर दिया इन्हें कॉल सेंटर में बस इतना पैसा मिलता था जिससे उनकी फैमिली पर दो वक़्त का खाना खा सके और तब फिर ने 2015 में मुंबई आने का फैसला किया मैं अभी मुंबई तो आ गई लेकिन यह बहुत अंदर कॉन्फिडेंस और चाय लड़की थी इन्होंने अपने आप को हमेशा क्रिटिसाइज ज्योति देखा था कि मुंबई में आकर यह कुछ दिनों तक अपने दोस्त के साथ रहने लगी.

और इन्होंने उस दौरान सोचा कि जब मुंबई आई को यूं तो कुछ न कुछ करके ही जाऊंगी तू की जिंदगी भर कॉल सेंटर के हिसाब से तो कुछ नहीं होने वाला और तब इन्होंने कुछ TV सीरियल्स के लिए ऑडिशन देने का फैसला किया लेकिन उस समय 9:00 कोई एक्टिंग आती थी और न ही इनका कोई कनेक्शन था तो इन्हें अपने पहले काम को पाने के लिए बहुत स्ट्रगल करना पड़ा तब जाकर 2015 में इन्हें तेरी मेरी फैमिली सीरियल में एक साइड रोल करने का मौका मिला है यहां पर यही और फिकर डेब्यू सीरियल्स है इसके बाद उन्हें काफी ज्यादा सीरियस में भी छोटे-मोटे रोल किए 2016 में इन्हें बड़े भैया की दुल्हनियां कसौटी जिंदगी की चंद्र नंदिनी जैसे कई सारे सीरियल्स में साइड उसमें देखा गया है है लेकिन और इसको अब तक कोई रिकॉग्निशन देने वाला काम नहीं मिला था और फिर कुछ मिनट पहले ही बिग बॉस की टीम में भी दिखाई दी जाए यह पहले हफ्ते में एडमिट हो गई लेकिन बिग बॉस करने के बाद इन्हें थोड़े बहुत लोग पहचानने लगे थे लेकिन उर्फ को असली पहचान मिली सोशल मीडिया से जहां लोग उर्फी को एक्टिंग सीरियल यह सोच की वजह से नहीं इनके अजीब-अजीब उल्टे-सीधे फैशन की वजह जानने लगे.

और ज्यादातर फ्री के जानने वालों में नेगेटिव पॉपुलैरिटी ज्यादा थी जहां मोस्टली लोग इन्हें बराबर बोलते और ज्ञान देते नजर आते हैं जिस पर फिर का कहना है कि सोशल मीडिया ना होकर नोटिस की सांस हो गई है जिसे देखो ज्ञान दे रहा है लेकिन इस सबसे उर्फी को कोई फर्क नहीं पड़ता वह कहती है कि उन्हें हमेशा से ही फैशन डिजाइनिंग और डिजाइन और कुछ क्रिएटिव करते रहने की चाहत ही अ है जिसे उनकी फैमिली वालों ने और रिलेटिव्स ने कभी फोलो नहीं करने दिया लेकिन अब जब उन्हें मौका मिला है वह अपनी क्रिएटिविटी सबको दिखाना चाहती हैं इनका कहना है कि क्यों सिर्फ रेड कार्पेट पर यूनिक और स्टाइलिश कपड़े पहने जाएं मैं तो कहती हूं हमें रोजाना कुछ इंट्रेस्टिंग पहनना चाहिए लेकिन उन्हीं को शायद यह नहीं पता कि हम इंट्रस्टिंग कपड़े पहने तो चाहिए लेकिन जगह और सिचुएशन देखकर अब तो मै गाला रेड कारपेट और अवॉर्ड्स में तो समझ भी आता है अब तू सड़कों पड़ी आते-जाते ट्रैवलिंग ऐसे कपड़े पहनकर कम होगी तो लोग तो नोटिस करेंगी और खासकर वह चीज जो तुम्हें बिल्कुल भी कंप्यूटर पर ना हो.

क्योंकि मेरे लिए फैशन से ज्यादा कंप्लीट मैटर करता है वह है दोस्तों यह मेरा पर्सनल फॉर इंटरव्यू आप क्या कहना है इस बारे में आपको मे शेयर कर सकते हैं मैं आप सभी के कमेंट करूंगी और मुझे बहुत अच्छा लगेगा यह जानकर कि आप क्या सोचते हैं और वैसे ही और भी की पर्सनल लाइफ है वह जो चाहे वह कर सकती हैं कि अगर अपने पुराने शो को फॉलो करना चाहती हैं तो इसमें क्या बुराई है और किसी भी रोलर की कुछ भी बोलने पर उसी को कोई फर्क नहीं पड़ता वह कहती है कि वह जो करती है वह अपनी मर्जी से करती हैं और उन लोगों को भी कहना चाहती है जो मुस्लिम बन कर उन्हें ज्ञान देते हैं और फिर का साफ कहना है कि वह किसी उलझन को नहीं मानती और अपनी मर्जी से देती है दोस्तों यह थी कहानी उर्फ जावेद कि आपके कहना इनके बारे में आप कमेंट में जरूर बताना.

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