उर्फी जावेद ने एक इंटरव्यू में फिर साबित कर दिया कि वो भीड़ से अलग सोचने की हिम्मत रखती हैं।
उन्होंने साफ कहा कि वह इ’स्लाम को फॉलो नहीं करतीं और किसी मु’स्लिम पुरुष से शादी नहीं करेंगी।
उर्फी ने बताया कि इस वक्त वह भगवद गीता पढ़ रही हैं और आध्यात्म को अपने तरीके से समझना चाहती हैं।
उनका मानना है कि धर्म और शादी किसी का दबाव नहीं, बल्कि व्यक्ति की निजी पसंद होनी चाहिए।
उर्फी बोलीं— किसी को ये हक नहीं कि वो तय करे मैं किससे शादी करूं या क्या मानूं।
उनका यह बयान सोशल मीडिया पर बहस का विषय बन गया, लेकिन उर्फी एक बार फिर अपनी बात पर अडिग दिखीं