केरल स्टोरी ने जीता 71वां राष्ट्रीय पुरस्कार, केरल के सीएम पिनाराई विजयन ने जूरी की आलोचना की..

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फिल्में समाज का आईना होती हैं। फिल्में हमारे दिमाग पर जितनी गहराई से असर डाल सकती हैं, उतना कोई और नहीं। भारत में फिल्में आजादी से पहले बनना शुरू हो गई थी। उन्होंने अंग्रेजों के खिलाफ चल रहे आंदोलन में अपनी एक खास भूमिका निभाई। वक्त बदला तो फिल्मों ने अपने रास्ते बदल लिए। कभी फिल्मों में समाज की कमियों को उजागर किया जाने लगा तो कभी गरीब मजलूमों पर हो रहे अत्याचारों को दर्शाया गया,

अमीर गरीब के बीच का फर्क महिलाओं पर होते जुल्म फिल्मों के जरिए आम लोगों तक पहुंचे। अंडरवर्ड से लेकर नेताओं के काले चिट्ठे भी फिल्मों के जरिए ही हमें समझ आने लगे। लेकिन आज एक ऐसी ही सामाजिक फिल्म अवार्ड क्या जीत गई एक राज्य के मुख्यमंत्री भड़क गए। दरअसल कल 71वें नेशनल अवार्ड्स के विनर का ऐलान किया गया,

एक तरफ शाहरुख खान, विक्रांत मैसी, रानी मुखर्जी पहली बार नेशनल अवार्ड जीते तो वहीं दूसरी तरफ केरला स्टोरी को भी नेशनल अवार्ड मिला। सुदीपो सेन के डायरेक्शन में बनी इस फिल्म को बेस्ट डायरेक्टर और बेस्ट सिनेमेटोग्राफी का नेशनल अवार्ड मिला। लेकिन अपने ही स्टेट की फिल्म पर केरल के मुख्यमंत्री पिनराई विजय ने आपत्ति जताई है। उन्होंने इसे इंडियन सिनेमा की महान परंपरा का अपमान बताया है,

साल 2023 में रिलीज हुई यह फिल्म बहुत विवादित थी। फिल्म में दिखाया गया कि कैसे हिंदू लड़कियों का कन्वर्जन करके उन्हें सीरिया जैसे देशों में भेजा गया। जहां कईयों की मौत हो गई। कईयों के साथ रेप हुए। कईयों का आज तक कोई अता-पता नहीं चला। फिल्म के मेकर्स ने दावा किया कि करीब 32,000 लड़कियों का धर्म बदलवाकर उनके साथ क्रूरता की गई। फिल्म को लेकर तब काफी बवाल मचा था,

लेकिन अब फिल्म को नेशनल अवार्ड दिए जाने पर केरल के मुख्यमंत्री ने कड़ी आलोचना जताई है। उनका कहना है कि फिल्म केरल को बदनाम करने के लिए और देश में सांप्रदायिकता फैलाने के लिए बनाई गई थी। मुख्यमंत्री विजय ने कहा कि यह फिल्म झूठ पर बनाई गई है। ऐसा कभी कुछ नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि ऐसी फिल्म को नेशनल अवार्ड देकर ज्यूरी ने भारतीय सिनेमा की उस परंपरा का अपमान किया है,

जो धार्मिक भाईचारे और राष्ट्रीय एकता के लिए खड़ी है। उनका कहना है कि यह कदम संघ परिवार के वैचारिक एजेंडे को दिखाता है। उन्होंने कहा कि हर किसी को इसके खिलाफ आवाज उठानी चाहिए। हालांकि इससे पहले कई नेताओं ने कश्मीर फाइल्स को भी एक एजेंडा फिल्म कहा था,

लेकिन जब लोगों ने इसके बारे में धीरे-धीरे किताबों में पढ़ा, अखबारों में जाना और सोशल मीडिया पर पड़ी पुरानी क्लिप्स को देखा तो पता चला कि फिल्म से 1000 गुना ज्यादा हिंसा कश्मीर में हिंदुओं के साथ की गई थी। फिलहाल केरला स्टोरी को नेशनल अवार्ड दिए जाने पर आपका क्या कहना है? अपनी राय हमें कमेंट में दीजिए.

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