आप तो केबीसी के विनर है 5 करोड़ वाले क कई लाख का फोन रखे हुए हैं कैसे कैसे केबीसी में अच्छा एंट्री हुई कैसे कैसे वहां पहुंचे और और अमिताभ बच्चन से मिले कौन सवाल था वो पा करोड़ वाला केबीसी के विजेता सुशील कुमार हो गए कंगाल आप हो गए कंगाल क्या है इन सब खबरों के पीछे की सच्चाई कितना बदला जीवन पहले की तुलना में जीवन काफी बदला बहुत ऐसे अफसर मिले हैं हमको जिन्होंने अपने पास बैठाया बुलाया चाय पिलाया और बहुत धीरे से कहा कि आप मेरे रहे हैं आइकन रहे हैं पैसा ना अपना रास्ता खुद बना लेता है इसलिए पैसा से दूरी रहना चाहिए तो एक व्यक्ति सड़ पी के गाली दे रहा था हम ही लोग को कि ये लोग खाली फोटो खिंचा आता है और एक साल बाद वही आदमी कहता था
कि आप बिना बताए आते हैं हम लोग आपके लिए कुछ खाने का व्यवस्था नहीं कर पाते हैं एक साल में उनका माइंड चेंज हो गया मतलब हम काम किया वही व्यक्ति आपकी कभी ऐ अच्छा नहीं राजनीति में आए चुनाव लड़े बाबा साहब का प्रभाव रहा हां बाबा साहब का प्रभाव कैसे नहीं रहेगा मोतिहारी में हम हैं और हमारे साथ एक शख्स बैठे हुए हैं नेशनल फेस हैं कौन बनेगा करोड़पति के विजेता हैं सुशील कुमार आज इनसे बात करेंगे इनके बारे में बहुत सारी खबरें चलती है कि पैसा इनका खत्म हो गया कोई इनसे ठग लिया और क्या कर रहे हैं
आजकल यह भी हम बात करेंगे तो शुरू से शुरू करते हैं जी बिल्कुल बिल्कुल बिल्कुल कैसे-कैसे 20111 में करोड़पति बने और उस समय आप क्या करते थे 2011 में जो है पांचवा सीजन था केबीसी का और उसमें हम केबीसी विनर हुए और उसी समय चार पांच महीना पहले शादी हुई थी और उस समय केबीसी का काफी क्रेज था आज भी है लेकिन उसम कुछ ज्यादा ही था और हमारे दिमाग में ज्यादा चलता था केबीसी और कंपटीशन की तैयारी भी कर रहे थे उस साल बीपीएससी की मुख्य परीक्षा दे रहे थे और दो उससे पहले भी एक बार पीटी पास कर गए थे लेकिन मेंस में नहीं हुआ था इस बार भी दे रहे थे तो तैयारी का लेवल अच्छा था इसलिए कोई दिक्कत नहीं हुई और केबीसी विनर बन गए हालांकि उम्मीद नहीं थी हमको लग रहा था 25 50 लाख तो जीत ही लेंगे हम लेकिन कुछ चीजें हो जाती हैं हम बस उसके दर्शक बने मतलब हम बस हो जाती हैं हम बस गवाह होते हैं नहीं तो इतिहास रचे कि कोई ची पहला को हमेशा याद रखा जाता है
और आखिरी को याद रखा जाता है बिहार से आप पहले हुए हां बिहार से हम पहले हुए तो वही बीपीएससी की तैयारी के चलते हां तैयारी कंपटीशन का कर रहे थे और जब गए थे उस समय बी बीपीएससी की प्रारंभिक परीक्षा पास कर चुके थे मुख्य परीक्षा तैयारी कर रहे थे तो अच्छा था मेरा मतलब जनरल नॉलेज ठीक ठाक कहा जा सकता उस समय इसलिए बहुत मुश्किल नहीं हुआ शादी छ महीना पहले हुई और आप करोड़पति आप करोड़पति बन गए तो फिर कहां मैडम को ले गए फि मैडम को तो कहीं नहीं ले गए हम लोग घर प ही रहे लेकिन रहा हम तो मानते हैं कि मतलब मैडम का आना मेरे लिए अच्छा रहा तो करोड़ एक करोड़ जैसे आया टैक्स कटके कितना आता है कितना टक्स पर टैक्स कटता है कितना आया सा करोड़ सा करोड़ तो उस समय साढ़े करोड़ का क्या किए आप जमीन लिए घर बनवाए कुछ जरूरत था
उसको पूरा किए कुछ बैंक में रखे और फिर जमीन लिए ऐसे करके इन्वेस्टमेंट हुआ और अभी भी बहुत जगह प इ है जमीन वगैरह में खेत वगैरह में है जमीन में ही पैसा ठीक आता है बैंक से ज्यादा बैंक से ज्यादा भी आता है और वो हमको ज्यादा सेफ लगता है क्योंकि पैसा को लिक्विड भी कहा जाता है लिक्विड और लिक्विड तो लिक्विड है उसको रोकना मुश्किल होता है लेकिन खेत ले लेना या कुछ ऐसा स्थाई चीज ले लेने से क्या होता है ना कि वो सुरक्षित रहता है व अभी भी है और कैश कम ही रखे हमेशा क्योंकि मेरा यह मानना है कि पैसा ना अपना रास्ता खुद बना लेता है इसलिए पैसा से दूर ही रहना चाहिए उस समय आप मनरेगा में थे हां कंप्यूटर ऑपरेटर थे तो मनरेगा में इनको ब्रांड एंबेसडर बनाया गया बिहार का नहीं पांच राज्यों का पांच राज्यों का हा जयराम रमेश उस समय मंत्री थे उसके उन्होंने पांच राज्यों का बनाया कहां कहा बिहार पश्चिम बंगाल झारखंड उड़ीसा और छत्तीसगढ़ छतीसगढ़ तो उस समय जो करोड़पति बने पा करोड़पति और आपको देख कई बिहार के लोग प्रेरणा लिए और कई लोग पहुंचे भी वहां तक हां यह बात आप सही कर रहे कि प्रेरणा लिए
और पहुंचे भी और और ये बहुत सारे लोग भी उसके बाद मिले जिन्होंने कंपटीशन की तैयारी में भी मतलब इस बात को लेकर मोटिवेट हुए थे बहुत ऐसे अफसर मिले हैं हमको जिन्होंने अपने पास बैठाया बुलाया चाय पिलाया और बहुत धीरे से कहा कि आप मेरे रहे हैं आइकॉन रहे हैं बिल्कुल छ ये हमको मेरे लिए एक गर्व की बात होती है कि जिन परीक्षाओं में मैं पास नहीं कर पाया उनमें जो पास किए हैं वो अपने पास बुला के बैठा कि यह बात बोलते हैं एक समय नहीं नहीं नहीं आईएस नहीं मतलब बड़े-बड़े लोग बीपीएससी वाले हां हां हां उस समय जब पढ़ते थे उस समय जब पढ़ते थे उस समय जीते थे तो एक तरह से उनको मोटिवेशन मिला था जो बिहार के लड़के थे और उसमें से कुछ कंपटीशन और उस कुछ क जो है निकाल पाए जैसे मान लीजिए उस समय जो पढ़ते थे उनको लगा कि ये लड़का ऐसे है
तो हमको मेहनत करना चाहिए और वो आज बड़े-बड़े जगहों पे हैं और बताते हैं एका दुका लोग ही बताते हैं लेकिन उससे भी हमको लगता है कि कहीं ना मोटिवेशन बना बहुत लोग के मोटिवेशन आप बने आजकल प्लस टू टीचर हो गए हां हां हा बीपीएससी से हा हा और अभी प्लस टू पहाड़पुर एक प्रखंड है वहीं प है और बच्च को पढ़ाते हैं हमको जितना यह लगता है और मोटिवेट भी करते हैं कि आप लोग पढ़िए हम भी तो साधारण पृष्ठभूमि से थे मेहनत करने से आदमी प्राप्त कर सकता है लक्ष्य को बहुत सारा भटकाव आता है बहुत सारा नकारात्मक चीजें दिमाग में आती है असफलता का भय रहता है लेकिन हम अगर सही दिशा में लगातार मेहनत करते रहेंगे तो अच्छा होगा अब अच्छा में अब क्या होगा लेकिन अच्छा होगा मेहनत करेंगे तो उसका फल मिलेगा कौन सा विषय है आपका मेरा मनोविज्ञान मनोविज्ञान साइकोलॉजी से एमए कि साइकोलॉजी से एमए किए तो अभी आप टीचर हैं कुछ खबरें चली उसपे बात करें हां का नहीं का
नहीं बिल्कुल बिल्कुल इनके बारे में कई खबरें देखने को मिलती है अफवा है क्या है इन्हीं से जानते हैं कि इनसे इनके संबंधी लोग या मित्र लोग पैसा ठग लिए कंगाल हो गए सीधे तौर पर लिखता है कि केबीसी के विजेता सुशील कुमार हो गए कंगाल आप हो गए कंगाल क्या है इन सब खबरों के पीछे की सच्चाई नहीं देखिए क्या था ना कि बहुत ज्यादा हम परेशान रहते थे बहुत सरा लोग डोनेशन मांगता था तो आदमी गुस्सा में एक बार और मीडिया में भी हमेशा पैसे के बारे में चर्चा होती थी और पैसा के बारे में किसी को बात करना पसंद नहीं होता कि आप कितना कमाते हैं किसी से पूछिए तो उसको बहुत अच्छा नहीं लगेगा हां भाई कितना कमा क्या है बहुत पर्सनल मामला होता है
लेकिन अब चकि केबीसी विनर बने थे तो स्वाभाविक रूप से समाज में ये आया कि लोग पूछेंगे कि क्या है तो एक बार इरिटेट होके हम बोल दिए कि पैसा मेरा खत्म हो गया हम हम पेपर वाले से ही बोल दिए थे क्योंकि हम आप देख रहे हैं छोटे शहर के रहने वाले हैं किस चीज का क्या इंपैक्ट होता है जब जीते थे उसम 27 साल उम्र थी हां तो 27 साल उम्र थी छोटे शहर में यही पढ़ाई लिखाई यही जन्म सब कुछ यहीं पर तो बाहर कभी गया नहीं देश दुनिया उतना देखा नहीं तो किसी चीज का क्या प्रभाव होगा वो जो है वो हम नहीं कैलकुलेट किए और हम बोल दिए कि पैसा सा खत्म हो गया हमको लगा इससे मेरा पीछा छूट जाएगा हां हम लगा छूटा नहीं कहां छूटा उसके बाद तो असली कहानी वही हो गई उसके बाद असली कहानी जो है हां वही हो गई जिसमें लोग बात करने लगे कि और और तरह तरह की कहानियां जुड़ने लगी और वो सारी बातें जो हम बोले नहीं वो भी मेरे नाम से चलने लगी दुख होता था एक खबर ये भी चली कि नशे के आदी हो गए हैं सुशील केबीसी के विनर नहीं हम खबर अब जो रही नहीं ऐसा कुछ हम इसलिए बात कर रहे हैं क्योंकि हमारे सामने जो है सामने है हम इधर उधर बा नहीं ऐसा नहीं नहीं नहीं हम भी पढ़ते हैं ऐसी चीजें देखिए क्या होता है कि उस तरह का लोग अलग होता है अब वो दिखता है हां हां मा जो नशा का आदी होगा य हमारे आज जो आपके साथ आप लोग बैठे हुए उनसे पूछ लीजिए कि कभी मुझे कहीं देखा भी है सिगरेट पीते हुए भी या कभी शराब में देखा है कभी कुछ ऐसा तो कोई भी नहीं बताएगा तो वही हम कहते हैं कि अगर व ऐसा रहता तो कोई तो देखा रहा हां देख के भी नहीं बातचीत करके और कोई नशा करने वाले होते पाच करोड़ रुपया जाक वहां जीत जाते जॉब कर रहे बीपी अभी भी जब हम इनसे बात किए मिलने के लिए तो लाइब्रेरी आप जा रहे थे अभी भी पढ़ रहे हैं आप हा मेरा पीएचडी में हुआ है बाबा साब भीमराव अंबेदकर यूनिवर्सिटी मुजफ्फरपुर अच्छा अच्छा तो सोच रहे थे कि कोर्स वर्क चल रहा है कोर्स वर्क चल रहा था तब तक नौकरी लग गई तो एक्सटेंड हो गया मेरा जब तक नौकरी कंफर्म नहीं होगा तो छ महीने की छुट्टी हमको नहीं मिलेगी तो एक आवेदन दे दिए कि एक साल में कंफर्म हो जाएगा उसके बाद छ महीना का छुट्टी मिल जाएगा हम तो कोर्स वर्क रुक गया आपका हा मेरा कोर्सवर्क रुक गया अगले बैच में आप फिर हां जॉइन कर लेंगे एक साल जूनियर हो ग एक साल जूनियर हो गए हां लेकिन दोनों एक साथ रिजल्ट आ गया था और पीएचडी करना है हमको तो इसलिए और सोच रहे थे कि साइकोलॉजी नेट वगैरह के लिए कर ले तो वही थ लाइब्रेरी में जाते हैं कि पढ़ाई लिखाई भी हो जाए तो पीएचडी कर लीजिएगा तो नेट नहीं भी हो तो कोई हां लेकिन नेट करेंगे तो प्रयास वही कर रहे हैं कि थोड़ा सा लगे रहे तो कि दिसंबर वाला इस वाला नहीं निकलेगा क्योंकि काम का भी रहता है बहुत दूर स्कूल है तो फिर टाइम भी लगता है थक जाता है तो एक दो घंटा आदमी पढ़ता है तो लेकिन कंटिन्यू करेंगे तो आ जाएगा दो चार बार फेल हुए हैं इसलिए कह रहे हैं नेट में है हां नेट में पास हो जाते होंगे कट ऑफ में नहीं आते हां हां कट ऑफ में नहीं आते पास पास तो कर 55 पर 54 पर हमेशा आता है आता कटऑफ में नहीं आ कटऑफ में नहीं आते वो है य नहीं बोलिए फेल नहीं नहीं फेल कभी नहीं किए फेल कभी नहीं कि फेल पास का जो कटे एरिया पास तो होही जाते वो कभी फेल नहीं किए लेकिन अब रिजल्ट नहीं आ रहा है तो हम उसको फेल ही मानते फेल ही मानेंगे कि नहीं हो पाए अच्छा पैसा जीते सही बोलिएगा धम किया नहीं नहीं ऐसा कुछ नहीं उठा लेंगे इतना दे दो फिरती नहीं ऐसा कुछ नहीं आया ऐसा कुछ नहीं आया क्योंकि ये कहा जाता है कि भाई पैसा अचानक किसी के पास आ जाए तो नहीं मेरे साथ ऐसा नहीं हुआ और अभी तक मतलब अभी तक ऐसा कुछ हमको नहीं आगे का पता नहीं लेकिन अभी तक अब कौन चीज आएगा आप तो देखिए ऐसे ही घूम रहे हैं आप शुरू से ऐ में कभी हमको आज तक ये नहीं महसूस हुआ असुरक्षा जैसा हां कभी लोगों ने बहुत प्यार दिया आपको बर प दिया और हम एहसानमंद हैं लोगों के इस शहर के और आसपास जहां जाते हैं हमको बहुत रिस्पेक्ट मिलता है और हम लोग बहुत सारा एनवायरमेंट रिलेटेड काम करते हैं हां आपके बारे में पता चला है कि पेड़ पौधा आप खूब लगा है उसम पैसा खर्च किए है हां हा चंपा का पेड़ हां चंपा का पेड़ हम लोग ने 700 के करीब लगाया है और उसमें शहर में बहुत हमको मिला दोस्त लोग से सहयोग मिला डोनेशन मिला लेकिन अपने तरफ से भी लगाए हैं गड़िया संरक्षण पे काम किए हैं 450 पीपल लगाए हैं और उसमें 100 से अधिक बचा हुआ है सबका नंबर है जैसे पीपल नंबर 100 102 104 कहां है सबका डिटेल रखे हुए हैं और 100 से अधिक बचा हुआ है इसी तरह चंपा हम लोगों ने 700 लगाया चंपा लगाने के पीछे का चंपारण का जो पुराना नाम है वो है चंप का अरण्य अर्थात चंपा का जंगल लेकिन चंपा कहीं दिखता नहीं था हां आया दिमाग में आडिया बहुत सारे लोग ऐसा कहते भी थे लेकिन आगे कोई नहीं बढ़ता था कहता था लोग चंपारण चंपा का वन था कभी लेकिन आज दिखता नहीं है तो हम आगे बढ़े आगे बढ़े और खूब सहयोग मिला चंपा कलावे और पेड़ लगाए हां और ये 70000 के करीब तो हम लोगों ने लिया है नर्सरी से और ये ऑन रिकॉर्ड लिया मतलब उसको पैसा दे दे के लिया है पैसा तो मनरेगा तो योजनाएं हैं कि पेड़ पौधा फ्री में हां लेकिन ये मेरा इंडिविजुअल एफर्ट था ना और मेरी इच्छा थी जैसे आप समाज अगर आपको कुछ देता है तो आपको समाज को कुछ देना चाहिए कि नहीं बिल्कुल पे बैक टू सोसाइटी हां तो वो पे बैक टू सोसाइटी में मैंने प्रयास किया और बहुत लोग मिले शहर में बहुत ऐसे लोग मिले जो सहयोग करते थे ये डोर टू डोर कैंपेन था मतलब कि लोगों के नॉक करके घर जाना अपना परिचय देना वहां पौधा लगाना जहां भी कैंपस दिखा लगाना सार्वजनिक कार्यक्रम में वितरित करना कहीं भी कोई कार्यक्रम हो रहा है वहां उपस्थित सभी लोग को देना दलित बस्ती में पढ़ाने वा हां हां हां ये 2016 से हम लोगों ने कोरोना काल तक हम लोगों ने एक गांव है मच्छर गावा में वहां मो सहर टोली है उसमें हम लोगों ने गांव गोद लिया और लगभग एवरेज 40 बचे शुरू में 100 बच्चे आए लेकिन 40 बच्चे आए और हम लोगों के प्रयास से उस टोला में पहली बार मैट्रिक पास किया स और इसको बहुत ज्यादा थ नहीं किए क्योंकि ये मेरा अंदरूनी मामला था इसको प्रचारित प्रसारित जैसे पौधरोपण वाला नहीं कि आप काम कि तो लोगों को इसलिए पता चलना चाहिए कि सुशील जी ऐसा कर सकते हैं तो हमको भी ऐसा करना चाहि मात्र 5000 महीना लगता था टीचर को पहली बार वहां मुसहर टोली में कोई बच्चा मैट्रिक पास किया और भावनात्मक रूप से काफी जुड़े थे अभी पिछले साल गए थे इधर तो बंद हो गया कोरोना के बाद चीज बहुत कम हुई और उस वक्त तक अभी दो साल पहले जब गए थे तो वहां के बच्चे कह रहे थे कि सुशील सर का सपना पूरा करना है इतना इमोशनली अटैच थे और कोई भी आता था मित्रगण तो वहां जाकर कॉपी कलम सब हम लोग बटवा थे और कोई दिक्कत होता था फिर उनके माता-पिता से बात करते थे एक बड़ी इंटरेस्टिंग कहानी सुनाते क्या हुआ कि जब हम लोग शुरू किए थे तो वहां उसमें सराबंदी नहीं हुई थी बिहार में तो एक व्यक्ति सरा पी के गाली दे रहा था हम ही लोग को कि ये लोग खाली फोटो खिंचा आता है फोटो खिंचा और कुछ भी नहीं करता है तो जो लोग लड़के थे वॉलेटर टाइप के उनको बोलने लगे डांटने लगे तो हम बोले मत डांट वो अपना अनुभव बता रहे हैं उनको मत डांट वो अपना अनुभव बता रहे हैं और एक साल बाद वही आदमी कहता था कि आप बिना बताए आते हैं हम लोग आपके लिए कुछ खाने का व्यवस्था नहीं कर पाते हैं एक साल में उनका माइंड चेंज हो गया मतलब हम लोग काम किया वही व्यक्ति क हम लोग अब बिना बताए आते कुछ नाश्ता भी नहीं ला पाते हैं आपके लिए तो यह जो चेंजिंग है तब हमको लगा कि असली जो है चुप कराना इसको कहते हैं हां काम करके काम करके अब वहां चुप कराना तो सराब पिए हुआ कोई उसको धक्का देके गिरा देता हा कि भागो यहां से हां हां प हुआ पिए हुआ है लेकिन हम बोले आदमी सच क र अपना अनुभव बता जो ट्रेशन चलते आ रहा है कि भाई काम कुछ नहीं कि लेकिन फोट ख फोट से एक चीज याद आया कि सोशल मीडिया पर आजकल थोड़े पॉपुलर लोग हो जाते हैं तो उनकी राजनीतिक महत्वाकांक्षा जाग जाती है और सीधे या तो कोई पार्टी में जवाइन करते हैं या फिर निर्दलीय चुनाव लड़ लेते हैं आपकी कभी ऐसी इच्छा नहीं हुई कि राजनीति में आए चुनाव लड़े या किसी पॉलिटिकल पार्टी के द्वारा ऑफर मिला नहीं नहीं किसी तरह का इच्छा ही नहीं थी हम एक बात जानते हैं काम करने के लिए इच्छा शक्ति होना चाहिए और अपने स्तर से भी हम काम कर सकते हैं और हमारा जो सामाजिक दायित्व है राजनीतिक सही में राजनीति बहुत बड़ी चीज है बहुत बदलाव आता है राजनीति से इसमें कोई संदेह नहीं है लेकिन हमारे यहां की जो राजनीति है उसमें एक समस्या क्या है कि वोटर अभी तक नहीं समझ पाए हैं कि उनको वोट किसको देना है वोटर नहीं समझ रहे नहीं समझ पाए अभी तक समझ पाए हैं और वो जो है जब तक वोटर ये नहीं समझ पाएगा कि हमको वोट किसको देना है तब तक मतलब कि हम जैसे लोग राजनीति से दूर रहे वही बेहतर है जैसे आप मुसहर टोली में गए और एक बच्चा जो कभी वहां पढ़ता नहीं था वहां से मैट्रिक पास किया आपके प्रयास से तो आपके प्रयास से राजनीति में भी तो बदलाव आ सकता है नहीं मैं मैं व्यक्तिगत रूप से अपने को इस योग्य नहीं मानता हूं और हर आदमी को दुनिया के बारे में हम जान जाते हैं लेकिन खुद के बारे में हम नहीं जान पाते हम लोग के साथ एक समस्या है तो हम अपने बारे में यही जानते हैं कि इस बहुत संवेदनशील आदमी है तो अगर कोई कुछ हमारे बारे में बोलता है तो हम काफी काफी तकलीफ में आ जाते काफी तकलीफ में आ जाते हैं चिंता में आदमी पड़ जाता है कि मेरे बारे में कुछ ऐसा बोला लेकिन राजनीति में जो है राजनीति में ऐसा नहीं होता है राजनीति में रोज आप चार गाली किसी को देंगे चार गाली आपको देगा और हमको कोई बोल दे झूठ इल्जाम लगा दे तो हमको तो रात भरनी नहीं आता है तो हम कैसे तो हम जान गए कि हमारी हम राजनीति के लिए नहीं बने भामी भाव का आदमी है राजनीति के लिए नहीं बने क्योंकि राजनीति में क्या है दो इधर से आएगा दो उधर से रोज का यही काम चलेगा क्योंकि आपका चमड़ा मजबूत होना चाहिए तो मेरा चमड़ा मजबूत नहीं है लेकिन हम कु एक चेहरा मिला है एक ऐसा मिला है अवसर मिला है तो अपने स्तर से छोटा-छोटा काम करते हैं लोग ध्यान से सुनते हैं नहीं हमें सुनने में आया था कि कहीं से ऑफर भी मिला पार्टी से नहीं बहुत पहले की बात है लेकिन हम उसको मिला है मिला तो उसको बहुत जदा नहीं कि क्योंकि हमको मालूम था कि हम बहुत संवेदनशील आदमी है ये सब चीज पॉलिटिक्स आपसे नहीं हो नहीं होगा पॉलिटिक्स नहीं होगा और मुझे समाज का काम करना है तो कर ही रहे हैं आगे भी करेंगे बड़े स्तर पर लोग कर रहे हैं बदलाव की प्रक्रिया धीमी गति से चलती है और प्रकृति जो है अपना नायक एक समय के बाद ले आती है अब फिर से थोड़ पीछे चलते हैं कैसे कैसे केबीसी में अच्छा एंट्री हुई कैसे कैसे वहां पहुंचे और और अमिताभ बच्चन से मिले ये सब तो सुनने में लोगों को हा मजा आता है हां देखिए अनुभव आपका है एकदम साक्षात मनरेगा में काम करते थे तो उस समय ना जैसे अप्रैल मई में उसका लाइन खुलता है और उस समय मैसेज एसएमएस के थ्रू होता था तो पत्नी से पूछते थे कि आज टीवी पर क्या दिया है क्वेश्चन लेते थे और उसको एसएस करते तो यही रोज करते थे एक दिन में 100 100 एसएमएस कर देते थे दो और उस समय वेतन था 6000 और उसमें समझ दोती हज हम खर्च कर देते थे साल में एक बार उसमें खर्च कर देते थे तो उस साल हो गया तो हो गया और उसके बाद फिर गए ऑडिशन होता है तो पटना में ऑडिशन हुआ और ऑडिशन के बाद फिर उस कॉल आया कॉल आया तो ने पहली बार हवाई जहाज में बैठने का मौका मिला हवाई जहाज का टिकट उधर से आया था हां उधर से आया पत्नी का भी था तो क्या हुआ था कि पत्नी उस समय थोड़ी मालूम था पति में कितना जीतेंगे नहीं जीतेंगे क्योंकि 10 आदमी को बैठा आता है उसमें चार आदमी ही जीत पाता है सीट पे छ आदमी तो आता नहीं है तो हम बोले कि चलो पत्नी को ले चलते हैं इसी बहाने कम से कम हवाई जन तो बैठ जाएगी पता थोड़ी था कि हम पा करोड़ जीत जाएंगे हो सकता था हॉट सीट प भी नहीं आते बहुत लोग नहीं आ पाते हैं ज बहुत तेत लोग नहीं आता है ना आ पाता है तो हम बोले कि इसको घुमा ला हई बचारी नीचे झाक रही थी ऐसे तो हमको बड़ी अच्छा लगा लगा चलो भाई शादी थी तो आप हनीम ट्रिप कर सकते उसको हम तो ऐसे ही मानते थे और फाइ स्टार होटल ब ग जितना बड़ा होटल था उस समय उसका 00 प्लेट था उस समयक हम लोग को पैसा नहीं लगता था लेकिन हम पूछे तो बोज एक प्लेट का खाना का ना का तो वो हम लोग मतलब की उस लाइफ को में पहली बार रहना मतलब बहुत ये हम बहुत इसको एंजॉय किए और हम एंजॉय करते थे साइड में पत्नी को देखकर कि वो कितनी खुश है तो हमको लगता चलो कुछ अचीवमेंट हुआ है पत्नी को पत्नी की फीलिंग को फील करते थे हां हां हां तो वो क्योंकि हम लोग जानते थे कि कंपटीशन की तैयारी करते हैं नौकरी लगेगी हई चप्पल पहन के बैग पछ टांग के परीक्षा देने शनिवार को शनिवार को निकलते थे ट्रेन में खड़ा होके हम तो हमको तो याद है अहमदाबाद से लखनऊ हम लोग खड़े खड़े आ गए थे एक बार रे का एग्जाम देने ऐसा सब बच्चा करता है इसमें ऐसा कुछ सोना अख स्टेशन पे सोना अखबार बिछ के ये कॉमन चीज था तो अब एक और बात सुनाते हैं 16 अक्टूबर मतलब 22 24 अक्टूबर को हम केबीसी विनर हो गए और 16 अक्टूबर को पटना में एजाम था सिविल कोर्ट के क्लर्क का देने गए थे तो पटना में क्या हुआ था कि देर से पहुंचे थे ना तो जो जो स्टेशन प सोने का एक नियम होता है जो पहले पहुंचता वो अच्छे साफ जगह प ज देर होते जाएगा ही बाथरूम की तरफ या गंदा की तरफ उसका चला जाता है तु देर से ये आए थे तो बाथरूम के आसपास सोए थे जब रात काटनी थी तो जो सफाई कर्मी है झाड़ू मारा भोरी उठा देता च हा तो झाड़ू मारा अब झाड़ू मा तो झाड़ू मार के उठाया मतलब झाड़ू मार के मतलब ऐसे सारा गंदा दे प तो हम बोले कि रुको यार क्या कर रहे हो तो बोला कि फाइव स्टार में सुताल उठो पानियों हां हा पानी भ पछा मारता है नहीं उस समय खाली झाड़ू मारा तो ठीक हम फ में सोए हुए थे एक सप्ताह बाद हां अब याद कर रहे थे उस सन को हसते हसने लगे जब बोने के बाद हा तो हसने लगे जब वो बोला ना तो गुस्सा नहीं आया मने हसने लगे हसने लगे कि सब तो अपना ड्यूटी करता है भी ड्यूटी कर रहा है हा तो नाराज होने की क्या बात है तो हसते हुए उठ गए और देखिए फिर जब सोए थे केबीसी में जाके उस फाइव स्टार होटल में तो वो बातो हमको याद आ रहा था उसका कि फाइव स्टार में सुतल ब उस समय सोशल मीडिया नहीं था नहीं तो पहचान जाता आपको हां हां हां हां बाद में जब देखता तो कता यही यही हा तो इसी को हम बोले लेकिन क्या है कि जीवन में जो है कब क्या हो जाए बहुत कुछ आदमी नहीं जानता है और बदलाव ही होता है जीवन में जीवन तो हर तरह का बदलाव है अच्छा हो बुरा हो सब कुछ स्वीकार करना चाहिए आदमी को और संघर्ष करना चाहिए कितना बदला जीवन पहले की तुलना में जीवन काफी बदला और सब जैसा भी बदला उसको हमने स्वीकार किया और जैसे वीडियो गेम में होता नहीं है कि इका अगले स्टेज पे आप चले जाइए एक विन कर जाइए अगले स्टेज पे तो अगले स्टेज प जाने का होता है कि हां चलो ठीक है कि आप पुराना सीखे हुए हैं अगले स्टेज प चले गए लेकिन हमारे साथ क्या था कि चार पांच स्टेज ऊपर चले गए बिना कुछ सीखे जब आदमी साधारण से उतना जगह प चला जा बहुत ज्यादा चले गए तो सब कुछ नया लगता था हमारा व्यवहार अलग था उस वहां जहां पहुंचे थे वहां का व्यवहार सिस्टम अलग था कभी आदमी जब किसी कार्यक्रम में जाता था तो पिछली सीट प आराम से बैठ के देखता था और अब क्या होता था चीफ गेस्ट सीट प बैठे हुए हैं और वो नाम अनाउंस हो रहा है तो ये दोनों एक साथ चीजें जो है उसको एडजस्ट करने में टाइम लगता है ना कि कहां आप सबसे पीछे बैठ के देख रहे हैं कहां आप सबसे ऊपर बैठे वो एटीट्यूड नहीं नहीं नहीं नहीं हम जानते थे कि जीवन जो है कुछ भी स्थाई जीवन में नहीं है और एटीट्यूड से लोग दूर ही होते हैं हम लोगों से दूर हो लोग से दूर हो जाते हैं तो जीवन से लोगों से दूर होना मतलब जीवन से दूर होना वास्तविकता से दूर होना तो आदमी वास्तविकता से दूर होकर क्या हासिल कर लेगा आप तो केवीसी विनर है 5 करोड़ वाले क क लाख का फोन रखे हुए हैं 13000 का क्या बात कर रहे हैं हम ल आई महंगा महंगा नहीं नहीं हम जब केबीसी विनर बने तब से आज तक 10000 से 15000 के बीच में ही फोन रखे हैं पिछले 13 साल में और उम्मीद है आगे भी रखेंगे मतलब महंगा फोन रख उससे कोई मतलब नहीं विलासिता की वस्तु और उपयोगी वस्तु में अंतर होता है तो ये उपयोग की वस्तु गाड़ी मेरे पास स्कूटी है आज तक कार भी नहीं र भी नहीं लिए एक होता है ना कि महंगा फोन लेने की जरूरत दिखावे वाला फोन लेने की जरूरत उसको है जिसको लोग नहीं जानते हैं आप आप बिना ब्रांड वाला भी कपड़ा पहने अरे करोड़पति आदमी है तो ब्रांडेड शर्ट पहने होंगे नहीं हमारा यह मानना है कि दो चीज या तो उपयोगिता की वस्तु और विलासिता की वस्तु दो बातें हैं और मोबाइल को हमेशा ना उपयोगी वस्तु की तरह ही हम लोग को समझना चाहिए और बस और बाकी क्या है कि दिखावे का अंत ो सिंपल लिविंग हाई थिंकिंग वाली सोच है दिखावे का अं थोड़े आदमी बर्बाद हो जाएगा दिखावा करेगा तो प्रेरणा महापुरुष ये तो हर इंटरव्यू में सफल आदमी से एक सवाल होता है कि आपकी प्रेरणा कौन है देखिए ना हम दो तीन लोग को बहुत पसंद करते हैं हमको सुकरात पसंद है हमको महात्मा गांधी पसंद है हमको मिर्जा गाली भी पसंद है हा हमको गुरुदत्त साह भी पसंद है हा उनकी फिल्म ये सब लोग पसंद है और कहीं ना कहीं जो है इन लोगों का हम जिसको पसंद करते हैं उनका कहीं ना कहीं प्रभाव हम पर होता है बाबा साहब का प्रभाव रहा हा बा साब का प्रभाव कैसे नहीं रहेगा आज जो है मतलब की सारी दुनिया में उनकी जो प्रतिष्ठा है उन्होंने सबसे बड़ा चीज जो दिया हम लोग शिक्षित हुए इतने अच्छे से सब कुछ कर रहे हैं यह उनका रहेगा बाबा साहब का तो मतलब किसके पास कौन आदमी है जिस बाबा साहब को नहीं पसंद करेगा आदर्श पुरुष नहीं हो बा अब जो देशवासी आपको इतना प्यार स्नेह दिए उनको क्या कहेंगे उनको कहेंगे कि जीवन की वास्तविकता के साथ रहिए दिखावा से दूर रहिए और विज्ञापन का ज्यादा प्रभ नहीं पड़े क्योंकि विज्ञापन से क्या होता है हम वास्तविकता से दूर होते हैं मूल्यांकन कीजिए चीजों को जांच सोचिए खिए तब कोई निर्णय लीजिए कोई अच्छा कह रहा है तो अच्छा मत मानिए उसको समझ के तब अच्छा मानिए हम नहीं क बुरा मानिए लेन समझ बूझ कर तब अच्छा मानि अच्छा फिर वही थोड़ा पीछे अमिताभ बच्चन से जो इंटरेक्शन हुआ आपका उसका अनुभव थोड़ा शेयर कर अमिता बच्चन को जो पहली बार देखे तो फिल्म स्टार को देखना हम लोग का तो क्रेज रहता है ना तो अपने संस्कार के अनुसार पै छुके एकदम दोनों हाथ जोड़ के पैर पकड़ लिया कि अमिता बच्चन से मिले हैं उन्होंने भी गले लगा लिया तो बहुत अच्छा लगा हमको आज भी याद आता है तो लता अमिताभ बच्चन से मिले कौन सवाल था व अ वा 186 में निकोबार आइलैंड को बेचकर भारत से कौन देश चला गया था यह सवाल था तो हम लोग जैसे कंपटीशन में प्रैक्टिस सेट में क्वेश्चन छटना विधि आंसर छ ना या ऑप्शन छटना विधि जो होता है ना उसमें छाट लेते हैं कि ये ऑप्शन सही नहीं है ये ऑप्शन सही नहीं ये सही होगा उस समय नहीं था ऐसे करते तो उसम सही होता है तो ऑप्शन छटना विधि से बनाए थे हमको आंसर उसका नहीं मालूम था कंफर्म नहीं थे आप कंफर्म नहीं थे तुक्का मार दिया नहीं तुक्का नहीं था अनुभव था अनुभव था कि ऑप्शन छाट जैसे ये तो नहीं था इटली और फ्रांस नहीं था इटली के साथ क्या था एकीकरण नहीं हुआ था एकीकरण हुआ 181 में 67 में पूछ रहा है वो अपने ऑस्ट्रिया का गुलाम था गुलाम नहीं था प्रभाव में था तो लगभग गुलाम मानी उस ऑस्ट्रिया का अकरण के लिए संघर्ष कर रहा था तो वो यहां कैसे आएगा जब तक यूनाइट देश नहीं बनेगा उसकी सब छ दि फ्रांस 194 में गया कह रहा है आंसर की चला गया तो 54 में गया व कहां से गया लिखा था देश छोड़कर चला गया उस तो जो क्वेश्चन होता है ना उसके हर पक्ष को पढ़ा जाता है बारबार पढ़ा जाता है समय मिलता है उस और कंपटीशन में भी अगर किसी को देखना है तो क्वेश्चन को बार-बार पढ़िए क्योंकि उसी में कहीं ना कहीं आंसर जैसा कुछ रहता है अच्छा अब उम्र बची है बीपीएससी प्रशासनिक सेवा वाली की अ हां छ महीना बचा है भरिए ग आप देखेंगे हमको लगता है एक बार भरेंगे चलिए बी बीपीएससी से अधिकारी बनना चाहते थे हां लेकिन अभी के डेट में हमको शिक्षक ज्यादा अच्छा लग रहा है पता नहीं क्यों हां हां हां हां सब सलवा ये है ना हां कि बी बीपीएससी से ऑफिसर बनना चाहते थे हां बीपीएससी की परीक्षा पास करके आप ऑफिसर बनना चाहते उस समय जब केबीसी में गए थे हां पीटी पास कर गए थे मेंस दे रहे थे हां उसमें सफलता नहीं मिली कहां दिए परीक्षा मेंस केबीसी विनर हो गए उसके बाद तो इस बाद फिर बीपीएससी दिए कि नहीं नहीं उसके बाद दिए ही नहीं दिए ही नहीं नहीं दिए लेकिन बी बीपीएससी की परीक्षा पास करके टीचर बने हैं ये है हां 14 में बीएड कर लिए थे हां बीएड कर लिए तो आगे है कि प्रोफेसर बनना है हां प्रोफेसर हां प्रयास करेंगे कोई सवाल छूटा लग रहा है कि कुछ कुछ ऐसी चीजें जो छूट गई जो बताना चाहिए हम नहीं पूछ पाए नहीं बहुत देर से हम लोगों ने बात की बहुत सारी बात की हां बहुत अच्छा लगा कुछ सवाल है तो कमेंट में लिखिए अगली बार जब इनसे मिलेंगे मोतिहारी में या पटना में या कहीं भी तो पूछा जाएगा इन अंदर है सतार बजाते हैं हां सितार बजाते हैं बोल रहे हैं हां सितार वादक भी हैं स्टेज परफॉर्मेंस भी देते हैं हां और यह अच्छा लगता है शौकिया बजाते हैं अच्छा शौख है और इच्छा है कि बड़े स्टेज पर भी बजाएं आगे तो कभी मिलेंगे तो वो भी रहे तो हम लोग साथ में बातचीत करेंगे ठीक है तो कैसी लगी बातचीत और इनसे प्रेरणा मिली आपको मिली ही होगी और बहुत सारे लोग जो गरीब घर के लोग हैं या फिर बिहार से हैं जिनमें कॉन्फिडेंस नहीं इस बात का कि हम उस जगह जा सकते हैं तो ऐसे लोगों से मिलके उनको सुनके उनसे प्रेरणा लेते हैं कि अगर सुशील जी किए हैं तो हम भी इस काम को कर सकते हैं