अहमदाबाद एयर इंडिया विमान हादसे के बाद 112 पायलट्स ने एक साथ ली छुट्टी! क्या थी वजह?..
एक तरफ देश अभी एयर इंडिया के भीषण हादसे के सदमे से उबर ही रहा था और दूसरी तरफ खबर आई कि एक ही दिन में 112 पायलट्स ने बीमारी के कारण छुट्टी ले ली। सवाल यह है क्या यह सिर्फ एक संयोग था या हादसे का असर पायलट्स की मेंटल हेल्थ तक जा पहुंचा? नमस्कार, मैं हूं सिद्धार्थ प्रकाश। एयर इंडिया की एक फ्लाइट ने टेक ऑफ किया लेकिन वो अपने गंतव्य तक नहीं पहुंच पाई,
एआई171 अहमदाबाद से लंदन गेट पिकक जा रही फ्लाइट 12 जून 2025 को एक भयानक हादसे का शिकार हो गई। फ्लाइट टेक ऑफ के कुछ ही मिनटों में एक बिल्डिंग से जा टकराई और इस हादसे में 260 लोगों की जान चली। यह भारत के एिएशन इतिहास के सबसे बड़े हादसों में से एक बन गया। अब आते हैं हादसे के 4 दिन बाद यानी 16 जून पर। सरकार ने संसद में बताया कि उस दिन एयर इंडिया के 112 पायलट्स ने सिक लीव ली,
इनमें से 51 थे कमांडर्स पी1 और 61 थे फर्स्ट ऑफिसर्स पी2। कुल मिलाकर एयर इंडिया के सभी फ्लड्स में सिख लीव में हल्का इजाफा दर्ज किया गया। यह जानकारी केंद्रीय नागरिक उड्डयन राज्य मंत्री मुरलीधर मोहल ने लोकसभा में दी। इतने बड़े हादसे के बाद पायलट्स की मानसिक स्थिति को लेकर सवाल उठे। इसी के चलते डीजीसीए यानी डायरेक्टेट जनरल ऑफ सिविल एिएशन ने अपनी 2023 की एक पुरानी एडवाइज़री को फिर से याद दिलाया,
इसमें कहा गया है कि एयरलाइंस को अपने क्रू के लिए कस्टमाइज मेंटल हेल्थ ट्रेनिंग देनी चाहिए और पीियर सपोर्ट प्रोग्राम्स यानी पीएसपी शुरू करने चाहिए। अब बता दूं कि पीएसपी एक ऐसा कॉन्फिडेंशियल और नॉन पनिशेबल सिस्टम होता है जिसमें पायलट्स या क्रू मेंबर अपने स्ट्रेस, चिंता या सदमे की बातें शेयर कर सकते हैं बिना डर या सजा के। इसी बीच एक और विवाद उठ गया। ब्रिटेन की एक मीडिया रिपोर्ट में दावा किया गया कि दो ग्रीविंग फैमिलीज को एयर इंडिया ने गलत शव सौंप दिए,
इस पर भारत सरकार ने सख्त प्रतिक्रिया दी। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जयसवाल ने कहा कि हमने हर शव को पूरी प्रोफेशनलिज्म और गरिमा के साथ हैंडल किया है। यूके सरकार के साथ हम लगातार संपर्क में हैं और सभी मुद्दों को प्रोसेस के अनुसार सुलझा रहे हैं। सरकार का साफ कहना है कि हर पीड़ित की पहचान प्रोटोकॉल और तकनीकी नियमों के तहत ही की गई। तो एआई171 हादसा सिर्फ एक टेक्निकल क्रैश नहीं था,
यह उन सवालों की तरफ इशारा करता है जो हमारे पायलट्स की मेंटल हेल्थ, एिएशन सेफ्टी और ट्रॉमा मैनेजमेंट से जुड़े हैं। डीजीसीए की एडवाइज़री यह दिखाती है कि अब सिस्टम भी समझ रहा है। टेक्नोलॉजी के साथ-साथ इंसानी हिम्मत और मानसिक मजबूती भी उतनी ही जरूरी है। आपको इस हादसे और उसके बाद की डेवलपमेंट्स के बारे में क्या लगता है? नीचे कमेंट्स में जरूर बताएं।



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