कथावाचक अनिरुद्धाचार्य का न्यूज चैनल्स पर बड़ा आरोप, कहा- ‘गुटखा वालों के दबाव में..
मैंने कितने लोगों को कथा सुना सुना के शराब छुड़ा दी। पूज्य प्रेमानंद जी ने कथा सुना सुना के सत्संग करा करा के लोगों को गुटखा छुड़ा दिया और शराब छुड़ा दी। तो क्या हुआ? हमने कथा सुनाई तो लोगों ने गुटखा छोड़ दिया। शराब छोड़ दी। पूज्य प्रेमंद जी ने कथा सुनाई तो लोगों ने गुटखा शराब छोड़ दी। तो फिर मीडिया वालों को लगा जो न्यूज़ चैनल वाले हैं कुछ लोग उन लोगों को लगा कि भाई हम लोग तो गुटखे का प्रचार करते हैं,
आप बताइए सारे अधिकांश न्यूज़ चैनलों में गुटके का प्रचार आता है कि नहीं? आता है। और उसका प्रचार आता है जुए का। जुए के ऐप डाउनलोड कराने पर। अब ये न्यूज़ चैनल वालों ने सोचा कि भाई ये संत लोग तो हमारी लुटिया डूबा देंगे। दुकान बंद करा देंगे। गुटखे का प्रचार अब नहीं चल रहा है क्योंकि संत लोगों ने मना कर दिया। युवा जाग गए। अब युवा लोग गुटखा नहीं खाते। युवा लोग अब जुआ नहीं खेलते,
भाई जो सत्संग से जुड़ जाएगा वो नहीं खेलेगा। तो ये कुछ न्यूज़ चैनलों ने क्या किया कि इन्होंने सोचा कि यह दो लोग पूज्य प्रेम जी और दास अनिरुद्ध हम दोनों ने खूब गुटके का शराब का गलत चीजों का विरोध किया तो हम दोनों के खिलाफ न्यूज़ वालों ने हल्ला बोल दिया कि इन दोनों को बदनाम करो और इन दोनों को बदनाम कर देंगे तो फिर गुटखा धड़ल्ले से बिकेगा फिर जुए का विरोध करने वाला कोई नहीं बचेगा,
आज जो सच्चाई की आवाज उठाता है लोग उसी की आवाज बंद करना चाहते हैं आप मत बोलिए अब एक न्यूज़ एंकर बोल रही थी कि आप वैश्या को वैश्या क्यों कह रहे हैं तो उससे पूछो कि क्या कहें? गुटके का खुलेआम प्रचार कर रहे हैं। गलत चीजों का खुलेआम प्रचार कर रहे हैं। क्या इनके खिलाफ धरना प्रदर्शन नहीं होना चाहिए? क्या इनका विरोध नहीं होना चाहिए?
आप ही बताइए। आम जनता बताएगी आप आम जनता निर्णय करेगी। जनता जनार्दन निर्णय करेगी कि बताइए इस देश में क्या गौ हत्या का विरोध नहीं होना चाहिए? क्या गुटखे का विरोध नहीं होना चाहिए? लेकिन इस देश में गौ हत्या का विरोध नहीं होता। गुटके का विरोध नहीं होता। मोबाइल पर जुआ के ऐपों का विरोध नहीं होता,
क्रिकेट के नाम पर चल रहे जुआ का विरोध नहीं होता। पूज्य प्रेमंद जी का और अनिरुद्धचार्य का विरोध होता है। क्योंकि हम सत्य की आवाज उठाते हैं। सनातन की आवाज उठाते हैं। तो विरोध हम का हम संतों का होगा। लेकिन गलत चीज का विरोध? आप समझ रहे हैं षड्यंत्र? खुलेआम यदि फिर भी आपको ना नजर ना आए तो फिर धृतराष्ट्र मत बनिए।



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