दिल्ली केस का रानी मुखर्जी के मर्दानी 3 से क्या संबंध है? दिल्ली पुलिस-YRF का हुआ आमना-सामना..

चाहे एक हो या 100 किसी के भी अगवा होने पर समाज और व्यवस्था दोनों को सचेत हो जाना चाहिए। पर क्या हो जब आपको कोई यह कहे कि राजधानी दिल्ली में एक के बाद एक 800 लोग किडनैप हो गए। वो भी 15 दिन के भीतर। [संगीत] पिछले कुछ दिनों में इस तरह की खबरें इंटरनेट पर छाई हुई है। जाहिर है कि इससे देश भर के पेरेंट्स अपने बच्चों को लेकर चिंतित हो गए हैं। मगर इस बीच ऐसी रिपोर्ट्स भी सामने आ रही है जिनमें इन आंकड़ों को गलत बताया जा रहा है। लोग दावा कर रहे हैं कि यह खबर एक खास फिल्म का प्रमोशन करने के मकसद से फैलाई गई है। यह फिल्म है रानी मुखर्जी की मर्दानी 3। इस पूरे विवाद की शुरुआत 30 जनवरी को पीटीआई की एक रिपोर्ट से हुई है।

इसमें दिल्ली पुलिस के ऑफिशियल डाटा के हवाले से एक सनसनीखेज खबर छापी गई। खबर के मुताबिक 2026 के शुरुआती 15 दिनों में यानी 1 से 15 जनवरी के बीच दिल्ली में 807 लोगों की किडनैपिंग हुई है। इस दौरान औसत 54 लोग रोज लापता हुए हैं। इनमें से 509 महिलाएं और 298 पुरुष हैं। 800 में से 616 एडल्ट जबकि 191 बच्चे के किडनैप होने का दावा किया जा रहा है। यह काफी डरावना आंकड़ा है। जाहिर है इसने पेरेंट्स और प्रशासन दोनों के पसीने छुड़ा दिए हैं। हालांकि दिल्ली पुलिस ने इन आंकड़ों को गलत बताया है।

उनके मुताबिक दिल्ली में लोगों के अपहरण में कोई बढ़ोतरी नहीं हुई है। जॉइंट कमिश्नर संजय त्यागी अपने ऑफिशियल वीडियो स्टेटमेंट में कहते हैं, दिल्ली में लापता लोगों खासकर बच्चों को लेकर डराने या घबराने की कोई जरूरत नहीं है। पहले की तुलना में दिल्ली में गुमशुदी के मामले मामलों में कोई बढ़ोतरी नहीं हुई है। जनवरी 2026 में तो पिछले साल की इसी अवधि के मुकाबले लापता लोगों की रिपोर्टिंग में कमी दर्ज की गई है। यह भी बताना जरूरी है कि दिल्ली पुलिस अपराध के मामलों में निष्पक्ष और ट्रांसपेरेंट रिपोर्टिंग करती है।

इधर दिल्ली पुलिस ने अपना पक्ष रखा। उधर सोशल मीडिया पर एक दूसरी खबर उफान मारने लगी। लोगों ने दावा किया कि किडनैपिंग की ये चर्चा एक सोची समझी प्लानिंग है। इसका मकसद केवल और केवल रानी मुखर्जी की मर्दानी 3 को प्रमोट करना है। सवाल उठता है कि यशराज फिल्म्स की यह फिल्म किडनैपिंग केस में कहां से आ धमकी?
दरअसल मर्दानी 3 का प्लॉट बच्चों की किडनैपिंग और चाइल्ड ट्रैफिकिंग से जुड़ा है। रानी का किरदार फिल्म में इस अपराध से जुड़े एक बड़े गिरोह का भांडा फोड़ने के लिए निकलता है।

मर्दानी 3 जनवरी को सिनेमाघरों में रिलीज हुई थी। यानी ठीक उसी दिन जिस दिन पीटीआई ने 807 लोगों की किडनैपिंग वाली खबर छापी थी। अब यह इत्तेफाक है या कुछ और यह तो केवल खबर छापने वाला ही बता सकता है। मगर इस बात के सामने आते ही माहौल पलटने लगा। लोगों ने एक के बाद एक सोशल मीडिया पर वाईआरएफ की भद्द पीटनी शुरू कर दी। इन्फ्लुएंसर्स ने पानी पी पीकर उस कंपनी को खूब कोसा।

लगे हाथ दिल्ली पुलिस ने एक नया स्टेटमेंट जारी करते हुए कहा कुछ सुरागों की जांच करने के बाद हमें पता चला कि दिल्ली में लापता लड़कियों की संख्या बढ़ने को लेकर जो माहौल बनाया जा रहा है, वह असल में एक पेड प्रमोशन है। पैसे कमाने के लिए डर और घबराहट फैलाना बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। ऐसे लोगों के खिलाफ सख्त कारवाई की जाएगी। दिल्ली पुलिस ने अपने बयान में किसी का नाम नहीं लिया है।

मगर लोग इसे मर्दानी 3 और यशराज फिल्म से जोड़कर देखने लगे। हालांकि इससे पहले कि मामला और बिगड़ता वाईआरएफ ने इस मामले पर अपना पक्ष रखा है। एएनआई की रिपोर्ट के मुताबिक यशराज फिल्म्स ने ऐसी किसी भी पीआर कैंपेन से इंकार करते हुए कहा यशराज फिल्म्स एक 50 साल पुरानी कंपनी है। इसकी नीव ईमानदारी और ट्रांसपेरेंसी जैसी सिद्धांतों पर रखी गई है। सोशल मीडिया पर लगाए जा रहे उन आरोपों को हम पूरी तरह से खारिज करते हैं कि मर्दानी 3 के प्रमोशन में किसी संवेदनशील मुद्दे को जानबूझकर सनसनीखेज बनाया गया।

इससे संबंधित अथॉरिटी पर पूरा भरोसा है कि वो सही समय पर सभी तथ्यों का सच सामने ले आएगी। कुल मिलाकर किडनैपिंग से जुड़े इस मसले ने एक बड़ा विवाद खड़ा कर दिया है और जिस तरह यह मामला है दिल्ली पुलिस और वफ दोनों इससे पल्ला झाड़ना चाहती है। हालांकि यहां आपको कुछ बातों पर ध्यान देने की जरूरत है। पहली यह कि दिल्ली पुलिस एक तरफ यह दावा करती है कि इस बार 800 लोग किडनैप नहीं हुए।

वहीं दूसरी तरफ 5 फरवरी को टाइम्स ऑफ इंडिया की एक ऐसी रिपोर्ट रिशेयर कर देती है जिसके मुताबिक हर महीने 2000 लोग किडनैप होते हैं। दूसरी बात यदि 807 लोगों के किडनैप होने की बात वाईआरएफ ने फैलाई है तो यह एक बेहद घटिया कैंपेन है। मगर सवाल यह है कि ऐसे में पुलिस अपनी तरफ से क्या एक्शन लेने वाली है? जैसा उसने अपने बयान में भी कहा। तीसरी बात यह कि पीटीआई ने दिल्ली पुलिस के किस ऑफिशियल डाटा से 807 लोगों के किडनैप होने की खबर छापी? पुलिस को या तो उसकी सच्चाई जांचनी चाहिए या फिर खुद ही असली आंकड़े सामने ला देने चाहिए.

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