कोई बड़ा गुनाह नहीं किया बल्कि इस छोटी सी गलती की वजह से जाना पड़ रहा बार-बार जेल..

अपनी एक चूक की वजह से राजपाल यादव को जेल जाना पड़ गया। अगर राजपाल यादव उस दिन वो गलती नहीं करते तो आज जेल से बाहर होते। राजपाल यादव ने खुद अपने एक इंटरव्यू में खुलासा किया था कि आखिर अता पता लापता बनाते टाइम जो पैसा ₹5 करोड़ उन्होंने बिजनेसमैन से लिया उस पैसे को लेनदेन करते वक्त कहां राजपाल यादव से गलती हो गई। आपको बता दें कि 2010 में राजपाल यादव ने अता पता लापता नाम की फिल्म बनाई थी। 200 से ज्यादा आर्टिस्ट ने इस फिल्म में काम किया था और 250 से ज्यादा पब्लिक इस फिल्म का हिस्सा थी।

राजपाल यादव ने खुद इस फिल्म को डायरेक्ट भी किया था। इस फिल्म के कुछ रशेस राजपाल यादव ने दिल्ली के बिजनेसमैन माधव गोपाल अग्रवाल को दिखाए। माधव गोपाल अग्रवाल मुरली प्रोजेक्ट्स चलाते हैं और राजपाल यादव से उनकी पुरानी जान पहचान थी। क्योंकि पुरानी जान पहचान थी तो माधव ने भी राजपाल यादव को उनकी फिल्म में मदद करने के लिए हामी भर दी और इस प्रकार से फिल्म के लिए माधव गोपाल की कंपनी राजपाल यादव को ₹5 करोड़ देती है।

लेकिन इस दौरान डॉक्यूमेंटेशन भी किया गया और राजपाल यादव ने उन डॉक्यूमेंट्स को साइन कर दिया। उन डॉक्यूमेंट्स को साइन करने से पहले कुछ पॉइंट्स थे जिन पर राजपाल यादव ने ध्यान नहीं दिया। उन पॉइंट्स में लिखा हुआ था कि यह जो पैसा ₹5 करोड़ है यह लोन के तौर पर राजपाल यादव को दिया जा रहा है और राजपाल यादव इस पैसे को अपनी फिल्म की पहली रीपेमेंट से देंगे। पैसे को इंटरेस्ट के साथ राजपाल यादव चुकाएंगे।

जबकि राजपाल यादव यह मानकर चल रहे थे कि माधव गोपाल ने उनके प्रोजेक्ट में इन्वेस्ट किया है और जब कोई एज अ इन्वेस्टर आपसे जुड़ता है तो प्रॉफिट के अंदर आपका बंटवारा होता है और लॉस हुआ तो फिर कुछ नहीं मिलता है। तो राजपाल यादव इसे एक इन्वेस्टमेंट मानकर चल रहे थे और डॉक्यूमेंट्स भी उन्होंने बिना पढ़े साइन कर लिए क्योंकि माधव गोपाल उनके गांव के ही थे। पुरानी जान पहचान थी इसीलिए उन्होंने विश्वास के तौर पर साइन कर दिए। उन्हें नहीं पता था कि यह पैसा लोन का था। बाद में जब राजपाल यादव की फिल्म रिलीज हुई,

फिल्म बुरी तरह पिट गई। फिल्म से एक पैसा भी नहीं आया और तो और राजपाल यादव को पर्सनली ₹17 करोड़ का नुकसान हुआ और वो माधव गोपाल को पैसा नहीं चुका पाए। तो माधव गोपाल ने राजपाल यादव द्वारा दिए गए चेकक्स जो सिक्योरिटी के तौर पर उन्होंने माधव गोपाल की कंपनी को दिए थे। उन चेकक्स को एक के बाद एक बैंक में डिपॉजिट करवाए जो धड़ल्ले से बाउंस हो गए इनसफिशिएंट फंड्स की वजह से और राजपाल यादव के खिलाफ माधव गोपाल की तरफ से सात एफआईआर दर्ज करवाई गई। यह मामला लंबे समय से कोर्ट में चल रहा था।

अकॉर्डिंग टू राजपाल यादव वो ऑलरेडी ₹ करोड़ तो चुका चुके थे और उन्हें कुछ और समय की जरूरत थी। लेकिन कोर्ट ने ₹ करोड़ देने के बावजूद उन्हें फिर से ₹5 करोड़ देने का आर्डर दिया। राजपाल यादव का यही सवाल था कि आखिर जब ₹2 करोड़ वह दे चुके हैं तो फिर ₹5 करोड़ उन्हें और क्यों देने पड़ रहे हैं? यह पूरा मामला लंबे समय से कोर्ट में चल रहा था। राजपाल यादव कोर्ट की हियरिंग्स मिस कर रहे थे। कोर्ट में मौजूद नहीं रहे।

यही वजह है कि उन्हें कोर्ट ने जेल में जाने के आदेश दिए। कंटेंप्ट ऑफ कोर्ट के तहत उन्हें जेल जाना पड़ा है। पैसा तो उन्हें जेल में रहते हुए भी उतना ही चुकाना पड़ेगा जितना कि कोर्ट ने कहा है। यह पूरा किस्सा राजपाल यादव ने अपने कई इंटरव्यूज में शेयर किया

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