आलीशान घर! अरबों के मालिक हैं ईरान के नए सुप्रीम लीडर..

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सोनामुखी, हरड़, मुलेठी जैसी [संगीत] अनेक जड़ी बूटियां और हजारों वर्षों का प्राचीन आयुर्वेदिक ज्ञान इस एक बोतल में समाया हुआ है। कायम टैबलेट आपकी खुशियों का साथी। तेहरान से उठे धुएं के गुबार के बीच अब ईरान की सत्ता की नई कहानी लिखी जा रही है। अयातुल्लाह अली खामने की मौत के बाद ईरान में सिर्फ शोक नहीं बल्कि सत्ता का बड़ा फेरबदल शुरू हो चुका है। दावा किया जा रहा है कि उनके बेटे मुस्तफा खामने को देश की कमान सौंपी जा रही है। लेकिन सवाल है क्या यह सत्ता का शांत ट्रांसफर है

या फिर रिवोल्यूशनरी गार्ड के दबाव में लिया गया फैसला? और आखिर कौन है मुस्तफा खामिनी एक साधारण मौलवी या अरबों की संपत्ति वाले पावर ब्रोकर? देखिए हमारी यह खास रिपोर्ट। तेहरान जहां 40 दिनों का राष्ट्रीय शोक घोषित किया गया है। ईरान की कैबिनेट ने देश भर में झंडे झुका दिए हैं। बताया जा रहा है कि अमेरिका और इजराइल के संयुक्त हमले में सुप्रीम लीडर की मौत हो गई।

लंदन से प्रसारित चैनल ईरान इंटरनेशनल ने दावा किया है कि ईरान की 28 सदस्य संस्था असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स ने मुस्तबा खामने के नाम पर मुर लगा दी है। रिपोर्ट के मुताबिक यह फैसला दो वर्चुअल बैठकों में हुआ और इसमें इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉप्स यानी आईआरजीसी का भारी दबाव था। अब बात करते हैं कि कौन है मुस्तबा खामरी। 56 साल के मुस्तबा ईरान के पूर्व सुप्रीम लीडर के दूसरे सबसे बड़े बेटे।

वह कोई बड़े आया नहीं ना ही उन्होंने सरकार में कोई आधिकारिक पद संभाला। लेकिन जानकार कहते हैं पर्दे के पीछे उनकी पकड़ बेहद मजबूत है। ईरान इराक युद्ध के दौरान उन्होंने सशस्त्र बलों में सेवा दी। पिछले कुछ सालों में उन्होंने आईआरजीसी के बड़े अधिकारियों से करीबी रिश्ते बनाए। यही वजह है कि धार्मिक और सैन्य ताकतों के बीच उन्हें एक पावर ब्रिज माना जाता है। अब बात उस पहलू की जिसने पूरी दुनिया को चौंकाया है।

अब बात करेंगे ईरान के नए सुप्रीम लीडर के अरबों के साम्राज्य के बारे में। ब्लूमबर की एक रिपोर्ट के मुताबिक मुस्तफा खान ने यूरोप और मिडिल ईस्ट में फैले एक बड़े रियलस्टेट नेटवर्क से जुड़े हैं। दावा है कि लंदन के पौश इलाके बिशप्स एवन्यू में उनके 138 मिलियन से ज्यादा की प्रॉपर्टी है। दुबई में आलीशान विला, फ्रैंकफर्ट और मेजरका में होटल और स्विस बैंक अकाउंट की भी चर्चा। हालांकि इन दावों की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। लेकिन सवाल उठ रहे हैं क्या एक मध्यम स्तर का धर्म गुरु इतनी बड़ी संपत्ति का मालिक हो सकता है?

अब आगे बढ़ते हैं मुस्तफा खामई के परिवार और विवाद की तरफ। मुस्तफा की शादी ज़हरा हद्दाद अदेल से हुई थी जो ईरान के पूर्व संसद अध्यक्ष गुलाम अली हद्दाद अदेल की बेटी है। रिपोर्ट्स के मुताबिक हमले में उनकी पत्नी और परिवार के कुछ सदस्य भी मारे गए। 2019 में अमेरिका ने मुस्तफा पर प्रतिबंध लगाए थे। उन्हें सत्ता के गलियारों में एक प्रभावशाली लेकिन रहस्यमई चेहरा माना जाता है।

बता दें कि ईरान के इस्लामिक क्रांति के बाद देश ने हमेशा वंशवाद का विरोध किया है। 1989 में जब अली खामई को चुना गया था तब भी यह फैसला ऐतिहासिक था। लेकिन अब अगर बेटे को गद्दी मिलती है तो क्या यह ईरान में परिवारवाद की शुरुआत होगी या फिर मौजूदा संकट में आईआरजीसी एक भरोसेमंद चेहरा चाहती है। इस वक्त ईरान चार मोर्चों पर दबाव झेल रहा है।

पहला बाहरी हमला, दूसरा आर्थिक प्रतिबंध, तीसरा आंतरिक असंतोष और चौथा और सत्ता का संक्रमण। अगर मुस्तफा खामने सुप्रीम लीडर बनते हैं तो उनकी सबसे बड़ी चुनौती होगी क्या वह अपने पिता जैसी पकड़ बना पाएंगे? या फिर ईरान की सत्ता में दरारें और गहरी होंगी। तो क्या ईरान में सत्ता का नया अध्याय शुरू हो चुका है?

क्या मुस्तबा खामने संकट के दौर में देश को संभाल पाएंगे या फिर यह फैसला आने वाले दिनों में नई राजनीतिक उथल-पुथल की वजह बनेगा। इन सवालों के जवाब आने वाला वक्त देगा। लेकिन इतना तय है तेहरान की गद्दी पर बैठने वाले मुस्तफा खाम अब पूरे मिडिल ईस्ट की सियासत की दिशा तय करेंगे

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