ईरान ने इजराइल को लेकर भारत के सामने रखी मांग, पाकिस्तान से क्या कह दिया?..

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ईरान और इजराइल के बीच जारी युद्ध की पृष्ठभूमि में अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में जबरदस्त हलचल देखने को मिल रही है। इसी क्रम में ईरान ने भारत और अपने अन्य मित्र देशों से खुलकर अपील की है कि वे इजराइल की सैन्य कारवाइयों की निंदा करें जिन्हें ईरान ने अंतरराष्ट्रीय कानून का स्पष्ट उल्लंघन बताया है। नई दिल्ली स्थित ईरानी दूतावास के वरिष्ठ अधिकारी मोहम्मद जावेद हुसैनी ने यह बयान एक प्रेस वार्ता में दिया। उन्होंने कहा भारत ना केवल क्षेत्रीय महाशक्ति बल्कि ग्लोबल साउथ का नैतिक अगवा भी है और ऐसे में उसे ना केवल,

ईरान के साथ मित्रता के नाते बल्कि अंतरराष्ट्रीय कानून और मानवता के अधिकार पर इस आक्रमण की आलोचना करनी चाहिए। उनका यह बयान तब आया है जब इजराइल और ईरान के बीच एक हफ्ते से अधिक समय से भयंकर मिसाइल और ड्रोन हमले जारी हैं। प्रेस वार्ता में जब हुसैनी से पूछा गया कि क्या अमेरिका पाकिस्तान के सैन्य ठिकानों का इस्तेमाल ईरान पर हमले के लिए कर सकता है? तो उन्होंने सीधा जवाब देने से इंकार कर दिया। लेकिन आशा जताई है कि पाकिस्तान ऐसा कोई कदम नहीं उठाएगा जिससे ईरान के हितों को नुकसान पहुंचे। यह टिप्पणी उस संदर्भ,

में आई है जब पाकिस्तान की सेना प्रमुख जनरल असिम मुनीर हाल ही में वाशिंगटन में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से मिले थे। इस मुलाकात को रणनीतिक रूप से बेहद संवेदनशील माना जा रहा है। आपको बता दें कि इस संघर्ष में अब तक दर्जनों जाने जा चुकी हैं। ईरानी स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार इजराइली हमलों में कम से कम 224 नागरिक मारे गए हैं। जिनमें अधिकांश आम लोग थे। दूसरी ओर इजराइल ने दावा किया है कि ईरानी हमलों में उनके 24 लोगों की मौत हुई है। दोनों ही देश एक दूसरे के सैन्य और शहरी ठिकानों को लगातार निशाना बना रहे,

हैं जिससे क्षेत्रीय अस्थिरता चरम पर पहुंच गई है। आपको बता दें कि भारत ने इस पूरी स्थिति में अब तक संतुलित रुख अपनाया है। विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि भारत दोनों देशों के साथ मैत्रीपूर्ण संबंध रखता है और युद्ध विराम की वकालत करता है। भारत ने शंघाई सहयोग संगठन के उस सामूहिक बयान से खुद को अलग रखा जिसमें इजराइल के हमलों की आलोचना की गई थी। वहीं आपको बता दें कि सबसे बड़ा वैश्विक डर इस समय हॉर्मोस जलडमरू मध्य को लेकर है। जहां से दुनिया के कुल तेल का करीब 30% गुजरता है। अगर यह मार्ग बाधित हुआ तो वैश्विक,

तेल आपूर्ति और कीमतों पर गंभीर असर पड़ सकता है। ईरानी अधिकारी हुसैनी ने इस बारे में स्पष्ट कुछ नहीं कहा लेकिन संकेत दिया कि ईरान के पास कई विकल्प हैं और परिस्थिति के आधार पर फैसले लिए जाएंगे। ईरान की भारत से अपील केवल कूटनीतिक समर्थन की मांग नहीं थी बल्कि यह एक रणनीतिक संदेश भी है कि क्षेत्रीय संतुलन और वैश्विक शांति के लिए भारत को अब सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए। वहीं भारत फिलहाल तटस्थता बनाए रखने की कोशिश कर रहा है ताकि वे पश्चिम और मध्य एशिया दोनों पक्षों के साथ संतुलन बनाए रख सके। स्थिति जितनी संवेदनशील है, उतनी ही जटिल भी है।,

अगले कुछ दिन यह तय करेंगे कि क्या मध्य पूर्व में यह टकराव सीमित रहेगा या कोई बड़ा संकट बनकर उभर सकता है। इस वीडियो पर आपका क्या कहना है? कमेंट सेक्शन में जरूर बताएं.

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