इजराइल और ईरान से 90 लाख भारतीयों पर मंडरा रहा खतरा, बहुत कुछ होगा..

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ईरान और इजराइल के बीच छिड़ी जंग अब दो देशों की लड़ाई से आगे निकलकर बड़े क्षेत्रीय युद्ध में तब्दील होने की आशंका पैदा कर रही है। दुनिया की निगाहें अमेरिका पर टिकी हैं। जहां राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अगले दो हफ्तों में यह फैसला ले सकते हैं कि अमेरिका इस युद्ध में सक्रिय भूमिका निभाएगा या नहीं। ईरान ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि अगर अमेरिका युद्ध में शामिल हुआ तो वह सीधे अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाएगा। स्थिति में युद्ध मध्यपूर्व तक सीमित ना रहकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर फैल सकता है। जिसका सबसे बड़ा असर भारत जैसे देशों पर पड़ेगा।

वरिष्ठ पत्रकार स्टैनली जॉनी ने लिखा है इस क्षेत्र में लगभग 90 लाख भारतीय रहते हैं और काम करते हैं। खाड़ी सहयोग परिषद यानी जीसीसी के देशों में रहने वाले भारतीय बड़ी मात्रा में धन भारत भेजते हैं। इसे ऐसे समझा जाता है कि दुनिया से भारत भेजे जाने वाला कुल धन का आधा हिस्सा जीसी देशों में रहने वाले भारतीयों से आता है। साल 2023 में 118 7 अरब डॉलर था। ऐसे में अगर संघर्ष छिड़ता है तो यहां रहने वाले भारतीयों को वापस लाना एक बड़ी मुश्किल खड़ी कर सकता है। जीसीसी एक छह खाड़ी देशों का समूह है जो आपस में मिलकर,

आर्थिक, राजनीतिक और सुरक्षा के मामलों में सहयोग करता है। जीसीसी एक तेल समृद्ध देशों का क्लब है जो मिलकर अपनी सुरक्षा, व्यापार और विकास के लिए काम करते हैं। और भारत के लिए यह देश आर्थिक और रणनीतिक रूप से बहुत अहम है। अब सवाल यह है कि आखिर क्यों बनासी? ये देश तेल और गैस से बहुत अमीर है। इनकी संस्कृति, धर्म और हित एक जैसे हैं। बाहरी खतरों और आंतरिक विकास से निपटने के लिए इन्होंने मिलकर यह संगठन बनाया था। अगर युद्ध तेज होता है तो इन प्रवासी भारतीयों को निकालना भारत के लिए एक बड़ी चुनौती बन सकता है। भारत अपनी कुल,

ऊर्जा जरूरतों को 85% आयात करता है। जिसमें से 50% से अधिक आपूर्ति खाड़ी देशों और इराक से होती है। प्राकृतिक गैस के मामले में भारत की इस क्षेत्र पर निर्भरता और भी ज्यादा है। यदि संघर्ष बढ़ता है तो ईरान होमर्ज जलडमरू मध्य को बंद कर सकता है। जिससे दुनिया के कुल कच्चे तेल का 20% ट्रांजिट हो सकता है। यह आपूर्ति रुकने से तेल की कीमतें आसमान छू सकती हैं। ईरान भारत के लिए मध्य एशिया का प्रवेश द्वार है। भारत ने चाबहार बंदरगाह में भारी निवेश किया है जो उत्तर दक्षिण परिवहन गलियारे का अहम हिस्सा है। इस प्रोजेक्ट की पूरी क्षमता अभी तक सामने,

नहीं आई है। लेकिन यह भारत के आर्थिक और रणनीतिक हितों के लिए बेहद अहम माना जाता है। अगर ईरान में अस्थिरता बढ़ी तो यह निवेश जोखिम में पड़ सकता है और भारत की मध्य एशिया तक पहुंच कमजोर हो सकती है। ईरान इजराइल युद्ध अब पूरे क्षेत्र को खींच सकता है जिसमें भारत को सुरक्षा, आर्थिक और रणनीतिक मोर्चों पर एक साथ सोचने की जरूरत है। भारत को ना सिर्फ अपने प्रवासी नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करनी होगी बल्कि ऊर्जा और व्यापार सुरक्षा के भी सुनियोजित रणनीति बनानी होगी।

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