भारत-अमेरिका Trade Deal पर जारी Joint Statement में कृषि पर क्या आया, भारत के लिए क्या चौंकाने वाला?..

ब्रॉट टू यू बाय Itel 

हाल ही में फाइनललाइज हुई इंडिया यूएस ट्रेड डील की जानकारी सामने आ गई है। इसकी बेसिक डिटेल्स को लेकर भारत और अमेरिका ने मिलकर एक जॉइंट स्टेटमेंट जारी किया। यह स्टेटमेंट यूनियन मिनिस्टर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री पीयूष गोयल ने 7 फरवरी की सुबह अपने ऑफिशियल एक्स अकाउंट से पोस्ट किया। इस पोस्ट में उन्होंने इंडिया यूएस ट्रेड डील की जानकारी भी शेयर की। वाणिज्य मंत्री ने इसमें कहा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निर्णायक नेतृत्व में भारत ने अमेरिका के साथ एक इंटरिम एग्रीमेंट का फ्रेमवर्क यानी ढांचा तैयार कर लिया है। इससे इंडियन एक्सपोर्टर्स खासकर एमएसएमईस यानी छोटे उद्योग, किसानों और मछुआरों के लिए 30 ट्रिलियन डॉलर्स यानी 30 लाख करोड़ डॉलर्स का बाजार खुलेगा। एक्सपोर्ट्स बढ़ने से देश के युवा और महिलाओं के लिए लाखों नई जॉब अपॉर्चुनिटीज बनेंगी।

इस फ्रेमवर्क के तहत यूएस भारतीय माल पर रेसिप्रोकल टेरिफ घटाकर 18% करेगा। जिससे कपड़े और टेक्सटाइल, लेदर और फुटवेयर, प्लास्टिक और रबर प्रोडक्ट्स, ऑर्गेनिक केमिकल्स, होम डेकोर, दस्तकारी के प्रोडक्ट्स और कुछ मशीनरी जैसे अहम सेक्टर्स में दुनिया की सबसे बड़ी इकॉनमी में बड़े बाजार का मौका मिलेगा। यूएस से मतलब है उनका। इसके अलावा जेरिक फार्मासटिकल्स और दवाइयां, जेम्स और डायमंड्स और एयरक्राफ्ट के पुरजे सहित कई सामानों पर टेरिफ्स शून्य जीरो तक आ जाएंगे। जिससे इंडिया के एक्सपोर्ट कंपिटिटिवनेस और मेक इन इंडिया नीति को और मजबूती मिलेगी। यह सब मंत्री कह रहे हैं कॉमर्स मिनिस्टर

इंडिया को सेक्शन 232 के तहत एयरक्राफ्ट पार्ट्स पर एक्सेंपशंस, ऑटो पार्ट्स पर, टेरिफ रेट, कोटा और जेनेरिक फार्मासटिकल्स यानी दवाइयों पर भी फायदे मिलेंगे। जिससे इन सेक्टर्स में एक्सपोर्ट करने से ठोस मुनाफा होगा। साथ ही एग्रीमेंट किसानों के हितों की सुरक्षा और ग्रामीण आजीविका को बनाए रखने के लिए संवेदनशील एग्रीकल्चरल और डेयरी प्रोडक्ट्स जैसे मक्का, गेहूं, चावल, सोया, पोल्ट्री, दूध, चीज, एथेनॉल जो फ्यूल में इस्तेमाल होता है। तंबाकू, कुछ सब्जियां, मीट और इन जैसे और भी किसानी और डेयरी वाले प्रोडक्ट्स को पूरी तरह सेफ रखने की इंडिया का कमिटमेंट दिखाता है। सेफ रखने का जो कमिटमेंट है इंडिया का वो भी दिखाता है। हालांकि केंद्रीय वाणिज्य मंत्री के इस दावे पर अब सवाल उठ रहे हैं क्योंकि जॉइंट स्टेटमेंट में इसे लेकर संतुष्टि होती हुई नहीं दिख रही है।

क्यों? ये समझने के लिए अब इंडिया यूएस के जारी किए जॉइंट स्टेटमेंट का रुख करते हैं। बयान 7 फरवरी की सुबह जारी किया गया जो काफी लंबा है। हम संक्षेप में उसकी जानकारी आपको यहां दे रहे हैं। बयान में कहा गया यूनाइटेड स्टेट्स ऑफ अमेरिका और इंडिया ने घोषणा की है कि दोनों देशों ने रेसिप्रोकल और दोनों को फायदा पहुंचाने वाले ट्रेड से जुड़े एक इंटरिम एग्रीमेंट के ढांचे पर सहमति बना ली है। यह फ्रेमवर्क 13 फरवरी 2025 को प्रेसिडेंट डोनाल्ड जे ट्रंप और प्राइम मिनिस्टर नरेंद्र मोदी की शुरू की गई बड़े लेवल की यूएस इंडिया बीटीए यानी द्विपक्षीय व्यापार समझौते की बातचीत के प्रति कमिटमेंट को दोहराता है। इससे बाजार तक एडिशनल पहुंच और मजबूत सप्लाई चेस को सपोर्ट करना शामिल होगा।

इसमें यह इंट्रिम एग्रीमेंट दोनों देशों की पार्टनरशिप में एक ऐतिहासिक मील का पत्थर होगा और दोनों देशों के हितों और ठोस नतीजों पर आधारित एक बैलेंस्ड ट्रेड के लिए शेयरर्ड कमिटमेंट दिखाएगी संतुलित ट्रेड होगा इसमें। ये इस जॉइंट स्टेटमेंट की भूमिका थी। इसके बाद जिस इंट्रिम एग्रीमेंट की बात हो रही है, उसकी 12 पॉइंट्स में प्रमुख शर्तें बताई गई। उनका सारांश आपको बताते हैं। पहली शर्त भारत सभी अमेरिकी इंडस्ट्रियल सामानों और कई अमेरिकी फूड और एग्रीकल्चरल प्रोडक्ट्स जैसे रेड्स और गम जो पशु आहार में इस्तेमाल होने वाला अनाज है वो ट्री नट्स, फ्रेश और प्रोसेस्ड फल, सोयाबीन का तेल, वाइन और स्पिरिट्स पर टेरिफ्स बिल्कुल खत्म या कम कर देगा।

यही वो पॉइंट है जिस पर गौर किया जा रहा है। क्योंकि ट्रेड डील से जुड़ी बातचीत में इंडिया ने हमेशा कृषि और डेरी के क्षेत्र को अपनी रेड लाइन बताया। यानी यहां पर हम नहीं जाने दे सकते। ये लाइन आप क्रॉस नहीं कर सकते मार्केट के लिए अमेरिका के लिए। वजह साफ है भारत कृषि प्रधान देश और भारत के कृषि बाजार में अमेरिका के शामिल होने से साइड इफेक्ट्स हो सकते हैं गंभीर साइड इफेक्ट्स। अब अगली शर्त की बात करते हैं। अमेरिका 2 अप्रैल 2025 को जारी किए एग्जीक्यूटिव ऑर्डर 14257 के तहत इंडिया से आने वाले टेक्सटाइल, कपड़े, लेदर, फुटवेयर, प्लास्टिक, रबर, ऑर्गेनिक, केमिकल्स, होम डेकोर, दस्तकारी वाले प्रोडक्ट्स और कुछ मशीनरी पर 18% रेसिप्रोकल टेरिफ लगाएगा। इंट्रिम एग्रीमेंट कामयाब होने पर जेनेरिक दवाओं यानी फार्मासटिकल्स, रत्न और हीरे और एयरक्राफ्ट पार्ट सहित कई सामानों पर रेसिप्रोकल टेरिफ हटा देगा।

अमेरिका। ये अमेरिका करने वाला है। अपने प्रोक्लेमेशन 9704, 9705 और 10,962 के तहत लगाए गए कुछ एयरक्राफ्ट और एयरक्राफ्ट पार्ट्स पर यूनाइटेड स्टेट्स अपने टेरिफ हटाएगा। इसी तरह इंडिया को ऑटोमोटिव पार्ट्स पर टेरिफ रेट का कोटा मिलेगा। यूएस सेक्शन 232 इन्वेस्टिगेशन के नतीजों के मुताबिक जेनेरिक दवाइयों पर बातचीत के फायदे भी मिलेंगे। इंडिया की बात हो रही है। दोनों देश एक दूसरे को प्राथमिकता के साथ बाजार में पहुंच देंगे। ये चौथा पॉइंट था। पांचवी शर्त है कुछ नियम तय किए जाएंगे ताकि एग्रीमेंट का फायदा खासतौर पर अमेरिका और भारत को मिले। छठी शर्त नॉन टेरिफ बैरियर्स को दूर किया जाएगा। यानी टेरिफ के अलावा भी जो अलग तरह की बाधाएं होती हैं जो इस तरह के ट्रेड्स और बाजारों में पहुंच को रोकती हैं उनको बैरियर्स कहा जाता है नॉन टेरिफ बैरियर्स तो उनको भी दूर किया जाएगा। यूएस मेडिकल डिवाइसेस के व्यापार में इंडिया अपने पुराने बैरियर्स को कम करेगा।

इंफॉर्मेशनेशन एंड कम्युनिकेशन टेक्नोलॉजी से जुड़े सामानों पर भारत इंपोर्ट लाइसेंसिंग हटाएगा और 6 महीनों के अंदर स्टैंडर्ड्स और टेस्टिंग रिक्वायरमेंट्स पर फैसला लेगा। टेक्निकल रेगुलेशंस के पालन को आसान बनाने के लिए दोनों देश स्टैंडर्ड्स और अनुरूपता निर्धारण की प्रक्रियाओं पर चर्चा करेंगे। ये सातवीं शर्त है। समझौते के बाद यदि कोई देश इन सहमति वाले टेरिफ्स को बदलता है तो दूसरा देश भी अपने कमिटमेंट बदल सकता है। बीटीए बातचीत के जरिए मार्केट एक्सेस और बढ़ाया जाएगा और यूनाइटेड स्टेट्स भारतीय सामानों पर टेरिफ्स घटाने की भारत की दरख्वास्त पर विचार करेगा। इस शर्त पर भी गौर कीजिएगा। फिर से पढ़कर बता देता हूं। बीटीए बातचीत यानी जो द्विपक्षीय ट्रेड के एग्रीमेंट है उसकी जो बातचीत है उसके जरिए मार्केट एक्सेस और बढ़ाया जाएगा। यूनाइटेड स्टेट्स कह रहा है और यूनाइटेड स्टेट्स भारतीय सामानों पर टेरिफ्स घटाने की भारत की दरख्वास्त पर विचार करेगा। ये शर्त है। अब अगली शर्त पर चलते हैं। नौवीं शर्त थी। दसवीं शर्त पर आते हैं। दोनों देश अर्थव्यवस्था की सुरक्षा के लिए तालमेल मजबूत करेंगे। सप्लाई चेन के लिए लचीलापन लाएंगे। इनोवेशन, इन्वेस्टमेंट का रिव्यु, एक्सपोर्ट के कंट्रोल और थर्ड पार्टी गैर बाजार पॉलिसीज से जुड़े मुद्दों पर सहयोग करेंगे।

भारत अगले 5 सालों में यूएस से 500 बिलियन डॉलर के एनर्जी प्रोडक्ट्स, एयरक्राफ्ट, कीमती धातु टेक्नोलॉजी के प्रोडक्ट्स और कोककारी वाला कोयला खरीदेगा। दोनों देश जीपीयूस और डाटा सेंटर से जुड़े टेक्नोलॉजी ट्रेड और जॉइंट कोऑपरेशन को बढ़ाएंगे। ये 11वीं शर्त थी। 12वीं और आखिरी शर्त है डिजिटल ट्रेड में भेदभावपूर्ण या बोझिल प्रक्रियाओं को खत्म कर मजबूत और फायदेमंद डिजिटल ट्रेड नियम बनाने पर सहमति बनी है दोनों देशों के बीच यूनाइटेड स्टेट्स और इंडिया के बीच। आखिर में यूनाइटेड स्टेट्स और इंडिया स्टेटमेंट में जॉइंट स्टेटमेंट जो है उसमें लिखा गया कि दोनों देश इस फ्रेमवर्क को तुरंत लागू करेंगे और दोनों को फायदा पहुंचाने वाले बीटीए यानी बटरल ट्रेड एग्रीमेंट या विपक्षी व्यापार समझौते को फाइनल रूप देने की दिशा में काम करेंगे। जैसा टर्म्स ऑफ रेफरेंस में तय रोड मैप के मुताबिक होगा। स्ट्रेट डील और जॉइंट स्टेटमेंट के अलग-अलग पहलुओं और रिएशंस पर अन्य कुछ वीडियोस में हम बात करेंगे। मगर इस पूरी जानकारी और सहमति के पॉइंट्स पर आप क्या सोचते हैं? हमें कमेंट बॉक्स में लिखकर जरूर बताएं.

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