मतलब मुझे समझ नहीं आता कि आप लोग का झगड़ा है। आप लोग का प्यार है। आप कुछ बोलते नहीं है। कभी तो कुछ बोल दीजिए प्लीज। मुझे ऐसा लगता है ज्यादातर तो लेडीज रॉन्ग नहीं होती हैं और मैं बहुत ही शुरुआत में मेरी माताजी आदरणीय निर्मला देवी जी चाहे मेरी आदरणीय सास हो चाहे मेरे घर परिवार की जो लेडी हो आई नेवर गो अगेंस्ट और थोड़ा विपरीतताओं के अंदर आपके अलग-अलग विचारधारा मतलब के ये ऐसा है वैसा है ये अच्छा है वैसा है ऐसा वो चैनल स्टार्ट की हुई है तो उस पर डिस्कस करती हैं और चैनल के डिस्कस बहुत ही प्रायोगिक और विचारधाराओं से प्रेरित अपने हिसाब से लेडीज लोग डिस्कस किया करती मुझे मुझे मेरे एक मित्र ने कहा था कि गोविंद तुम्हारे साथ अ थोड़ा सा राइट वर्ड्स में कहा जाए तो कांस्परेसी टाइप की जो है ये आज नहीं बहुत वर्षों से चल रही है। तो उससे तुम कैसे बाहर निकलोगे?
तो मैं कहा देखिए एक आध 2 साल 4 साल 5 साल 9 10 साल या फिर 14 15 साल योग होते हैं हम पूजा प्रार्थना किया करते हैं यज्ञ करवाते हैं पर जब 1415 साल से वार्तालाप आगे निकलता है तो फिर वो योग नहीं फिर वो प्रयोग होता है तो किसी की सोची समझी साजिश में घर परिवार आ जाता है। डर जाते हैं लोग। वो सभी गोविंदा नहीं है और फिर थोड़ा सा अलगाव नजर आ जाता है। पर मुझे ऐसा लगता है कि ऐसे तो बहुत ही जहीन है। वो पढ़ी लिखी हैं। भाषा में गलत नहीं होता है। और परंतु पिछले दिनों में मैं जो देख रहा हूं कभी-कभी हम मुंह नहीं खोलते हैं तो या हम कमजोर नजर आते हैं या ऐसा लगता है कि हां ये दुष्ट होंगे बोलते कैसे नहीं है तो मैं आज उत्तर दे रहा हूं
मुझे यह कहा गया था कि इसमें आपके परिवार का घर का जो लोग हैं वो यूज़ हो सकते हैं उन्हें इसका पता नहीं चलेगा कि वह एक बड़ी कास्परेसी के अंदर शुरुआती तौर पे इस्तेमाल हो रहे हैं। हम जिसमें आदमी को पहले परिवार से तोड़ा जाता है। फिर समाज से तो थो तोड़ा ही हुआ है। मुझे इतने साल काम से तोड़ा हुआ है। मुझे मेरी फिल्मों के लिए मार्केट नहीं मिली। और मैं इसका रोना ऐसा नहीं समझेगा। अब रो रहा हूं। कृपया नहीं सोचिएगा। मैं भी बहुत सारी फिल्में छोड़ चुका हूं। इसलिए मैं रोना नहीं रोता हूं। क्योंकि मुझे वो जो चाहिए जो मुझे चाहिए तो वो कहां करती हैं कि आपको जो चाहिए वो मिलता नहीं है और जो मिलता है वो आपको चाहिए नहीं तो फिर घर कैसे चलेगा?
तो लेडीज का थॉट अलग होता है। परंतु वो कभी यह नहीं सोच सकती कि एक बहुत बड़ी कांस्परेसी के ओपनिंग बैटमैन में आपको मैदान में उतार दिया गया है। फिर उसके बाद में समाज में बदनाम कर देना। फिर समाज से बदनाम करके कुछ ऐसी चीज़ थोप देना जैसे मेरे पे पहले शुरुआती तौर के अंदर एक बहुत ही भयंकर टाइप के एक आदमी ने मेरे पे आरोप लगाने चाहे थे लगाने चाहे थे और वो एक्सपोज हो गया था तो फिल्म लाइन में जिस वक्त आपकी प्रचलितता एक हद से बाहर निकलती है तो विचलितताओं के साथ बहुत सारे लोग आगे आते हैं जो अपेक्षित नहीं होते वो भी सक्सेस की कॉस्ट है ये शोहरत और दौलत यह बखशती नहीं है।
और इसमें इस तरह के सामाजिक वर्ल्ड लेवल के प्रयोग बहुत सारे लोगों के साथ जल्दी से होते नहीं है। खासतौर पे ये मैं मेरे अपने एक वरिष्ठ कलाकार के साथ मैंने होते हुए देखा और उसके सेकंड मैं हुआ हूं। जबकि मैं वो कलाकार जैसा बड़ा कलाकार नहीं हूं। मैं मतलब जो मुझे काम मिल गया कर दिया वो टाइप का हूं। प्लानिंग वाइनिंग तो मैं कभी करता नहीं। परंतु मुझे ऐसा लगता है कि ईश्वर मुझे निकाले इस प्रॉब्लम से और ऐसी मैं प्रार्थना करता हूं और बच्चों के लिए कल्याण की प्रार्थना करता हूं। बहुत ज्यादा स्ट्रगल हो गया है। हम लोग जो है
सहज सरल और मम्मी के आशीर्वाद की वजह से इतनी पूजा प्रार्थना किए हुए लोग हैं। हमें विचलितता नहीं आती है। बच्चे तो बल्कि उस दिन मैं जब बहुत अच्छे लग रहे हैं। सुंदर लग रहे हैं। ईश्वर से प्रार्थना करता हूं कि काम अच्छा हो और किसी प्रकार के प्रयोग के और कष्ट के तकलीफ ना आए। मैं ऐसी माई से प्रार्थना करता हूं और मैं ऐसी उददंडताएं मैं करता ही नहीं के वो लोगों का कष्ट उस पे आप लोगों पे आपने सुना नहीं सुना बकायदा कहा जा रहा है आप सुधर जाओ और गोविंदा सिर्फ मेरा है तो कभी नहीं रहा है अच्छा मुझे ये बताइए कितने मैंने शादी कर ली है नहीं नहीं बिल्कुल ऐसा कुछ नहीं 40 साल हो गया है कुछ चार पांच शादी करके बैठा होंगे मैंने अभी तो जिन लोगों की हो गई है
उनकी बीवियां तो कुछ बोलती नहीं है वो आराम से घूमते फिरते मजा ले रहे हैं लाइफ के अंदर सोशली फिल्म लाइन के लोग ऐसी चीजें डिस्कस नहीं करते हैं। अ शायद ही दूध के धुले लोग इस वर्ग में मैंने देखे हैं जो किसी और पे आरोप लगा पाए। मुझे ऐसा लगता भी नहीं है। और ऐसा है भी नहीं। अ हां जिस वक्त हम बहुत ज्यादा कॉर्नर्ड हो जाते हैं। ऐसा लगता है कि भाई इस इस योग से हम निकले कैसे हैं? तो हम अपना विचारधारा में चला करते हैं। अभी हाल ही में जब आप हॉस्टलाइज हुए थे तब भी मैं उस दिन घर पे था। दोनों बच्चे आपको देखने आए थे।
प्यार तो आपके परिवार में पूरा है। हम बस ये ठीक है कि अब जब हम चाहता था कि फोटो जब तब आएगी इसी शुभकामना के साथ हम आपको बहुत-बहुत धन्यवाद। मैं स्वयं ईश्वर से प्रार्थना करता हूं कि लोग समझे। हम क्या है कि अब चाहे कृष्णा के आप टेलीविजन के आप देखिए प्रोग्राम्स हो उसे भी राइटर्स लोग जो हैं उसे भी राइटर लोग ऐसे नहीं ऐसे वार्तालाप करवाते थे जिससे मेरी इंसल्ट होती थी तो मैं कृष्णा से कहा कि कृष्णा बेटा तुम्हारा यूज़ हो रहा है मेरी इंसल्ट के लिए तो थोड़ा सा तुम एहतियात रखना के मेरे विषय में जैसे तुम अपना अपना घर परिवार के लिए सोचा करते हो
ऐसे मेरे लिए भी सोचना। तो ये नाराज होती थी सुनीता। अच्छा ये लोग कब नाराज होंगे किससे और कब मिल जाएंगे कुछ पता नहीं चलता है। मैं थोड़ा स्थिरता रखने वाला आदमी हूं। मैं जल्दी से तो पहले किसी से रूठता नहीं हूं। और मैं अगर किसी से नाराज हो गया तो फिर 14 15 साल के लिए तो फिर मैं प्रणाम कर देता हूं। मैं उन्हें पूरा समय दे देता हूं कि भैया आप थोड़ा अपना मनस्थिति बना लीजिए पूरी ताकि किसी प्रकार का सामाजिक क्रियाओं में हम प्रॉब्लम में ना आए मैं देश काल परिस्थिति में किसी प्रकार की तकलीफ ना आए। ऐसे माई से प्रार्थना करता हूं। और बहुत थोड़े-थोड़े में मैं काम मेरी अपनी औकात में मैं कर रहा हूं। ऐसे में मैं ज्यादा बच्चे लोगों के लिए प्रोड्यूसर से डायरेक्टर से डिस्कस नहीं करता हूं।
मेरा ही घर परिवार है ये। जी और जिस इंडस्ट्री से मैं इतने साल पैसा कमाया हूं नाम इज्जत शोहरत ऊपर वाले ने दी है। मैं उसमें कभी दाग नहीं लगाता। और मैं चाहूंगा भी नहीं कि दाग लगे। परंतु सतर्कता और अलर्ट इसमें किसी प्रकार की चूक ना हो। यह बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि फिल्म लाइन तो फेम लाइन है और ऐसा नहीं है कि जो वार्तालाप हो रही है वो ए बिना किसी बात के हो रही है। कुछ तो कहीं विपरीतताएं अ नोशंस क्रिएट अह करें। ऐसे लोगों ने प्रयास किए हैं। पर उससे आगे निकल के कई उसमें शुक्र की मांओं की फिल्म लाइन के उस वर्ग की जो वर्षानुवर्ष चलाते आ रहे हैं काम करते आ रहे हैं। वो लोगों की कृपाएं रही हैं और वह रहे हम पे किसी प्रकार की गलतफहमी ना हो।
ऐसे माई से प्रार्थना करता हूं और बहुत ज्यादा मुझे सफोकेट हो जाऊं मैं ऐसी मेरी लाइफ में परिस्थिति नहीं तैयार करें प्लीज ऐसी मैं सब लोगों से विनती करता हूं खासतौर पे मेरे ही परिवार से विनती करता हूं को क्योंकि मैं किसी के ऊपर नहीं कहता कि तुम यहां क्या थे तुम वहां क्यों खड़े हो तुम उससे क्या वार्तालाप कर रहे हो और मैं तो हीरो हूं फिल्म लाइन में हूं मुझे ऐसे लोग सवाल पूछे ना तो मुझे बड़ा वो भी खास तौर पे जब फिल्में शुरू हुई मैंने तीन पिक्चर अनाउंस की है और मेरे बाप की तौबा कि कैसे हिम्मत की इस आदमी ने कि ये फिल्में अनाउंस कर दे। ऐसा ये लोगों ने किया। फिर मैं शिवसेना में आया हूं और प्रचारक अभी बना ही हूं कि ये शुरू हो गया। कि ये कैसे आया?
अब 1920 साल में मैं घर में रहा हूं। ये टाइम और 1920 साल बहुत टाइम होता है भैया। मैं मेरा अपना पूरा जीवन आपके सब लोगों के चरणों में मैं बिताया है। ऐसे में मेरे साथ इतने ज्यादा योग प्रयोग हो ये किसी की शोभा नहीं देता। तो भैया प्रार्थना है सब लोगों से। अब क्योंकि समक्ष सब लोग आते नहीं है। इधर-उधर से जब मैं सब लोगों के इंटरव्यूज देखता हूं तो मुझे पता लगता है कि इसके हृदय में क्या हो रहा है। तो मैंने कहीं किसी के ठेस लगाई है तो क्षमा प्रार्थना है और मुझे वीक या कमजोर ना समझा जाए और आप लोग इसे वर्षानुवर्ष मैंने जो सेवा प्रदान की है थोड़ा पीछे पलट के देखें। मुंह खोलने से पहले कर्म भी तो देखने चाहिए। अपने भी देखने चाहिए। और ऐसा नहीं है कि मैं किसी से गलत कह रहा हूं।
परंतु यह जो हो रहा है यह सही नहीं है किसी भी प्रकार से। तो मैं प्रार्थना करता हूं कि सब लोग शोष नहीं करें। हम ही शोर मचाएंगे कि यह गलत है, वह गलत है, ऐसा गलत है, वैसा गलत है। और फिर हम यह कहें कि यह सही हो जाए तो फिर वो शोभा नहीं देता है। क्योंकि क्या सही और क्या सही नहीं है। यह किसी ऐसे वर्ग से डिस्कस कर रहे हैं आप जो उसका हिस्सा ही नहीं है। मतलब कहीं है ही नहीं वो। जी जी तो मैंने सोचा कि यह जिस जिनके साथ यह वार्तालाप चल रही है, यह कौन है? आदरणीय दिलीप साहब के साथ चल रहा हो। चलो पिता तुल्य व्यक्ति हैं। अह आप उनके साथ विचार विमर्श कर रहे हैं। चलो आदरणीय अमिताभ बच्चन जी के साथ चल रहा हो।
तो सोचने वाला विषय है। पर मेरा तो किसी से ऐसा नहीं रहा है। मेरा तो सिर्फ मेरी अपनी मेरी माताजी जो हैं। उसके सिवा मैं कभी किसी से कुछ भी पूछा नहीं। माता-पिता गुरु और यह जो समाज है जो मुझ पर कृपा वर्षानुवर्ष रही है यही आशीर्वाद की वजह से मैं गोविंद से गोविंदा हो पाया और मेरी प्रार्थना है कि जुड़ा रहे भैया किसी प्रकार का कष्ट ना आए। भैया कभी जानने की कोशिश नहीं कि कौन है ये लोग जो आपके पीछे पड़े कभी व्यर्थ है ना देखिए क्या है जो समर्थ होगा वो व्यर्थ चीजों के पीछे नहीं पड़ेगा जो काम से आगे निकला है वो इस तरह के विवाद में नहीं पड़ेगा ये आप मेरे घर परिवार जैसे हो तो मैं आज आपके साथ डिस्कस कर रहा हूं