52 साल की उम्र में गीता कपूर ने समाज की दोहरी सोच पर खुलकर सवाल खड़े कर दिए हैं।
‘गीता मां’ कहलाने वाली कोरियोग्राफर ने साफ कहा कि यह पहचान उनकी प्रोफेशनल इमेज है, उनकी निजी ज़िंदगी की दीवार नहीं।
गीता कपूर ने बिना झिझक कहा— “मैं भी सं’बंध बनाती हूं और मैं फि’जिकली सैटिस्फाइड हूं।”
उनका कहना है कि भावनाएं, जुड़ाव और संबंध किसी भी उम्र या टैग से बंधे नहीं होते।
उन्होंने यह भी कहा कि शादी न करने का मतलब यह नहीं कि इंसान की ज़िंदगी अधूरी या खाली होती है।
हर व्यक्ति को अपनी ज़िंदगी अपने तरीके से जीने का हक़ है, चाहे समाज उसे किसी भी नाम से बुलाए।
गीता कपूर का बयान सनसनी नहीं, बल्कि आत्मविश्वास और आत्म-सचेत सोच का उदाहरण है।
यह कहानी उस आज़ादी की है, जहाँ एक महिला खुद तय करती है कि उसे कैसे और किस शर्त पर जीना है।