इस वक्त जैसे कि आप सब जानते हैं धर्मेंद्र देओल हमारे बीच में नहीं है और उनके फैन ah जो है हमारे साथ खड़े हैं। तो आप सबसे पहले तो मुझे अपना नाम बताइए अशोक सैनी हूं मैं। हां और धर्मेंद्र जी कितने बड़े फैन है कभी अगर उनसे कुछ नाता रहा है कुछ भी अगर नहीं साहब ने काफी काफी दुख में साथ दिया और साहब सब दुख में आए थे बॉम्बे आए थे पंजाब से काफी और पिक्चर साहब को पिक्चर देखने का काफी शौक था तो उनके मम्मी पापा मारते थे,
और वो वो रात में ठंडी में चले जाते थे फिर वो साहब भाग के आ गए मम्मी भाग के आ गए फिर मम्मी पापा खर्चा बेचते थे उनको थोड़ा-थोड़ा काम मिला काम और काम में ₹10 मिलते थे उनको उस टाइम पे तो साहब साहब को सब आइसक्रीम आइसक्रीम बहुत पसंद थी और अपने मनोज कुमार सभी आइसक्रीम खाते थे और खुश रहते थे तो साहब हमको अपनी बताते थे परेशानियां परेशानियां फिर सफलता मिली भेदभाव नहीं किसी साथ में मुझे कोई जातपात का किसी से मतलब नहीं है,
प्यार ही प्यार है और सनी साहब भी वो भी सब फैमिली और अपने प्रकाश जी मैम साहब उषा मैम साहब अजी अजीत साहब कल्पना दीदी शीतल सब फैमिली है मुन्नी बहन जी बहन है उनके काफी काफी प्यार वो वो ऐसे लोग हैं अपना अपना खाना नहीं खाएंगे। अपना नहीं खाते पहले वो पहले दूसरों को देते हैं। सर आपने कहा कि आपने उनके घर में काम किया। उनके साथ काम किया। क्या काम किया? कितने सालों के खाना पकाया?
खाना पांच साल पांच साल खाना पकाया। हां। पांच साल खाना पकाया। फिर आना जाना रहा है। कभी तो साहब और साहब कोई मेरा काम होता तो कहीं भी काम रहेगा साहब। तो साहब फ़ फ़ कर देते। मोबाइल कर देते। अपना आदमी है। अपना ही काम करो। हां। खाने के कितने बड़े शौकीन थे? खाने नहीं खाने खाने घर का ही खाना शौक शौकीन बाहर का नहीं है ऐसा क्या फेवरेट क्या था उनका सरसों सा थी मक्कर रोटी थी राजमा था राजमा थे भिंडी थे,
कढ़ी पंजाबी कढ़ी सब ऐसे खाते थे फूल आलू फूल आलू की सब्जी खाते थे पराठे आलू के सभी वही देसी खाना सभी सनी साब वो भी साफ सभी काफी जिंदा दिल इंसान थे ये हम सबको पता है लेकिन कुछ उनके बारे में ऐसा बताना चाहेंगे जो ज्यादातर लोगों को नहीं कि वो वो सबसे सबसे सबसे खुले दिल से मिलते हैं और मान सम्मान देते हैं और और यही जिंदगी में और मतभेद नहीं है। सबको सबको सबको इज्जत देते हैं काफी इज्जत देते हैं,
और कोई रास्ता भी बताते हैं आगे का बिज़नेस का कैसे करना है कैसे करना है लोग और लोग आते हैं लोग आते राय भी लेते थे साहब कि साहब क्या करना है मुझे वो सब राय देते थे बताते थे बिनेस कौन सा करना है कौन सा आगे बढ़ोगे और बस ये बताते थे आखिरी सवाल अब वो हमारे बीच में नहीं रहे क्या याद करेंगे और किस चीज को लेके सबसे ज्यादा उन्हें याद करना है अभी अभी यही अभी यही साहब नहीं है ऐसा अभी नहीं लग रहा है,
और यह लगेगा और मैं और मुंबई से निकल जाऊंगा क्योंकि क्योंकि यहां रहेंगे काफी मुझे दुख होगा। अब कुछ हम अब कुछ अलग जिंदगी अलग जिंदगी गुजारना चाहते हैं राजस्थान जयपुर में क्योंकि हमको यहां दुख ही होगा। काफी काफी दुखी होके अब हमको ऐसा ऐसा लग रहा है कि साहब सब अभी हैं। ये तो ये तो मुझे विश्वास हो रहा है अंदर साहब नहीं है। सब विदा हो गए हैं और काफी काफी एक जादू थे,
कला थी उनको एक टैलेंट था और और पिक्चर में पिक्चर में बहुत पिक्चर में उनके डायलॉग पूरे हरामजादे कुत्ते में तेरा वो मैं तेरा खून पी जाऊंगा कुत्ते काफी काफी साहब वो ऐसा लग रहा है साहब कहीं सब इधर ही खड़े हुए बहुत बहुत ही मतलब जादू था टैलेंट बहुत था हंसने का कैसे मुस्कुराते कैसे थे कैसे चलते थे कैसे बैठते थे कुछ और लोगों में इतना है.