देव आनंद को बिग बी ने अपने घर के बहार आधे घंटे तक इंतज़ार करवाया..

जिस वक्त अमिताभ बच्चन फिल्म इंडस्ट्री में नए-नए आए थे और स्ट्रगल कर रहे थे, काम मांग रहे थे, उस वक्त देवानंद साहब फिल्म इंडस्ट्री के सुपरस्टार थे। लेकिन फिर जब अमिताभ बच्चन खुद सुपरस्टार बने, अपना नाम बना लिया, प्रॉपर्टीज बना ली। फिल्म इंडस्ट्री में महान एक्टर के रूप में जाने गए। तब उन्होंने समय-समय पर अपने साथ वालों को या तो इग्नोर किया है, साइडलाइन किया है या फिर उन्हें छोटा आंका है।

ऐसे कई इंसिडेंट्स आपके सामने हैं। फिर चाहे अपने घनिष्ठ मित्र शत्रुघन सिन्हा को अपने बेटे की शादी में नहीं बुलाना। सिर्फ शादी के बाद एक मिठाई का डिब्बा भिजवाना हो या फिर देवानंद जैसे सीनियर लेजेंड को अपने घर के बाहर आधा घंटा इंतजार करवाना हो। जी हां, यह किस्सा रिसेंटली खोला है देवानंद के साथ काम कर चुके मोहन चूरीवाला ने। उन्होंने एक इंटरव्यू के दौरान बताया कि 2007 में देवांद साहब अपनी ऑटोबायोग्राफी ल्च करना चाहते थे

और उसके लिए वो एक अच्छा इवेंट प्लान कर रहे थे। तब मोहन अमर सिंह के कांटेक्ट में थे और पॉलिटिशियन अमर सिंह उस दौरान अमिताभ बच्चन के बेस्ट फ्रेंड थे। मुंबई जब भी वह आते थे तो अमिताभ के जलसा बंगलों में ही रहा करते थे। उनके परिवार के साथ। जब अमर सिंह को मोहन ने बताया कि देवांद साहब अपनी ऑटोबायोग्राफी वाली बुक ल्च कर रहे हैं तो अमर सिंह ने कहा कि अमिताभ को भी बुलाना चाहिए

मेरी जिम्मेदारी है अमिताभ को इस इवेंट में मैं लेकर आऊंगा। बस फिर क्या था? एक तरफ देवांद साहब की ऑटोबायोग्राफी वाली किताब आ रही है और उसके चीफ गेस्ट अमिताभ बच्चन होंगे और जब अमिताभ बच्चन अपनी आवाज में किसी भी किताब की दो लाइनें नरेट कर देते हैं तो वो भी उस इवेंट का सबसे हाईलाइट पॉइंट होता है। तो देवांद जी यही उम्मीद कर रहे थे कि अमिताभ जी आएंगे उनके साथ किताब ल्च की जाएगी और उसके बाद देवानंद साहब अपने हाथ से अमिताभ को अपनी किताब की एक कॉपी देंगे जो अमिताभ पढ़ सके और साथ में डिनर करेंगे।

यह पूरा प्लान था इवेंट का। अमर सिंह अमिताभ को वादे मुताबिक उस इवेंट में ले तो आए लेकिन इवेंट खत्म होने से पहले ही अमिताभ और अमर सिंह वहां से खिसक गए। ना उन्होंने इवेंट पूरा अटेंड किया ना ही किताब की कॉपी लेकर गए और ना ही देव साहब के साथ उन्होंने डिनर किया। देव साहब और उनकी टीम यही सोचती रह गई कि कहां गड़बड़ हुई। कहीं वो हर्ट तो नहीं हो गई किसी चीज से कि इस तरह से इवेंट को आधे में ही छोड़कर चले गए। खैर रीजन जो भी था लेकिन देवानंद के जो एसोसिएट है मोहन वो इस इवेंट को इसी नोट पर खत्म नहीं करना चाहते थे।

यही वजह है कि उन्होंने अमर सिंह जी को कहा कि मैं किताब देने आपके पास आऊंगा और अमिताभ जी की कॉपी भी मैं आप ही को हैंडओवर करूंगा। एक दिन तय हुआ था जब अमर सिंह मुंबई में ही थे और अमिताभ के घर पर ठहरे हुए थे और उस दिन मोहन जो है अमर सिंह को देवानंद की किताब देने जा रहे थे। जब देव साहब को पता चला कि मोहन जा रहे हैं अमिताभ के घर पर तो देव साहब ने इंसिस्ट किया कि मैं भी साथ चलता हूं। देव साहब और मोहन मुंबई में अमिताभ के जलसा बंगलों के बाहर पहुंचे। वहां पर हॉर्न बजाया। वॉचमैन बाहर आया।

वॉचमैन ने जानकारी ली कि कौन हैं? आप किस काम से आए हैं? वो जानकारी लेकर वॉचमैन अंदर गया। उसके बाद वॉचमैन 15 मिनट तक बाहर नहीं आया। वो 15 मिनट देव साहब और मोहन ने अमिताभ के घर के बाहर कार में खड़े होकर ही बिताए। इस दौरान मोहन ने अमर सिंह को कॉल करके बात करने की कोशिश की कि मैं देव साहब के साथ हूं। अमिताभ के घर के बाहर खड़ा हूं। लेकिन अमर सिंह ने भी 10 मिनट लगाए फोन उठाने में।

और जब अमर सिंह से बात हुई कि मैं और देव साहब जलसा के बाहर खड़े हैं तो अमर सिंह ने अंदर एंट्री दिलवाने में अगले 15 मिनट लगा दिए। यानी कि 15 मिनट तो घर के बाहर ही इंतजार किया। खैर आधे घंटे बाद अमिताभ बच्चन के घर में देव साहब को एंट्री मिलती है और मुलाकात होती है अमर सिंह से। अमर सिंह से वो बात करते हैं, कॉपीज हैंडओवर करते हैं और पूछते हैं कि क्या अमिताभ घर पर नहीं है?

तो वो कहते हैं कि अमिताभ घर पर ही है। अमिताभ से मिलने के लिए देव साहब बैठते हैं। लेकिन अमिताभ आने में अगले और 15 मिनट लगाते हैं। उन्हें बताया गया कि अमिताभ हेल्थ क्लब में हैं और इसीलिए उन्हें आने में लेट हुआ। 45 मिनट इंतजार करने के बाद अपने सीनियर एक्टर देव साहब से अमिताभ बच्चन ने मुलाकात की। इनफैक्ट इस किस्से के बारे में एक बार अमर सिंह ने भी अपने एक इंटरव्यू में खुलासा किया था और कहा था कि मैं उस दिन अमिताभ के घर पे ही था और मुझे पता था कि देव साहब 15 मिनट से बाहर वेट कर रहे हैं

लेकिन उसके बावजूद मैं देव साहब को घर के अंदर एंट्री नहीं दिलवा पाया क्योंकि बच्चनस की तरफ से इंस्ट्रक्शन था मुझे स्ट्रिक्ट कि कोई भी आए आपको हमसे परमिशन लेनी होगी। तो देव साहब को घर के अंदर बुलाने के लिए मुझे बच्चन से परमिशन लेनी पड़ी और जब तक उनकी परमिशन का जवाब नहीं आया तब तक देव साहब को बाहर ही इंतजार करना पड़ा। वेल अगर यूं देखा जाए तो हर एक घर का एक सिस्टम होता है

और उसे फॉलो करना सिक्योरिटी पर्पस से बहुत जरूरी है। लेकिन यह सिस्टम अनजान लोगों के लिए होता है। बाहरी लोगों के लिए। देव साहब अमिताभ बच्चन की इंडस्ट्री से बिलोंग करते थे। उनके सीनियर थे। सुपरस्टार डम तब देख चुके थे जब अमिताभ इंडस्ट्री में स्ट्रगल कर रहे थे। यह जानने के बावजूद कि देव साहब गेट के बाहर खड़े हैं। उन्हें इतना इंतजार कराना यह बेहद अजीब है

नाम सुनते ही एंट्री दे देनी चाहिए थी कि देव साहब को अंदर बिठाइए। मुझे आने में टाइम लग रहा है। तब तक उन्हें चाय नाश्ता दीजिए। लेकिन हां बच्चन फैमिली के ऐसे किस्से बार-बार मीडिया में आए हैं और उनके इसी नेचर के लिए पब्लिक कई बार उन्हें कटघरे में खड़ी करती है और उनकी तरफ उंगलियां उठाती है कि इतना बड़ा फिल्म फैमिली है उसके बावजूद इंडस्ट्री वालों के लिए यह कुछ नहीं करते हैं।

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