आप देख सकते हैं ये अमिताभ बच्चन के भाई हैं इनसे बातचीत होगी और ये खास बहुत नाराज हैं इनसे बैक कैमरे के पीछे जब बात किया हूं क्योंकि भाई के इंतजार में भाई से मुलाकात के लिए आपने बहुत कुछ दर्द बया किया है जी हां मुझे इतना दुख है इस बात का हम मैं सेकंड अमिताभ बच्चन बोल रहा हूं हम एक तरह से आप मुझे सेकंड अमिताभ बच्चन मानकर चलिए कि मैं उस तरह से बोल रहा हूं उसी भाषा में बात भी करें भाषा में मैं बात भी करने चल रहा हूं आपसे जी देखिए जब अमिताभ बच्चन जी ने कहा कि एक फिल्म बनाया था उन्होंने कहा यारी है ईमान मेरा यार मेरी जिंदगी यस एक गीत गाया था उन्होंने कि यारी है ईमान मेरा यार मेरी जिंदगी जिंदगी ना तो यारों में ही वो भूले हुए हैं परिवारों को छोड़ दिए परिवारों को छोड़कर यारों में भूले हुए हैं ना प्राण ने हसाने के लिए उनको इस गीत को गाया था
लेकिन इसका अर्थ मैं लगा रहा हूं केवल यारों में ही भूले हुए हैं और बाबू पट्टी को भूल चुके हैं जी हा यारों में भूल गए यारो में बाऊ पट्टी को भूल गए और अपने पिता के पत्रिक संपत्ति को भूल गए जिस संपत्ति से जिस जिस संपति से जहां पर उनके पिताजी रहे काफी समय तक यहां पर अपना जीवन व्यतीत किया लेख लिखते थे य से लेखनी लिखते थे अमिताभ बच्चन जी यहां पैदा तो नहीं हुए लेकिन यहीं से अपनी मां के पेट में थे वो जब हरिवंशराय बच्चन जी इलाहाबाद गए हैं तो उसके बाद और इसके बाद फिर दोबारा जो है हरिवंश राय बच्चन जी ना दिखाई दिए ना ही उनके पुत्र जब बड़े हुए अमिताभ बच्चन जी तो वो तो बिल्कुल ही सन्नाटा खींच लिए कि बाऊ पट्टी है या नहीं है
अग हो सकता है भूल गए हो सुनिए लेकिन के के ब के बनी करोड़पति में तो चर्चा किए थे इस गांव का सु इस गांव की चर्चा तब उन्होंने किया कि हमारे यहां के पत्रकारों ने श्यामलाल पत्रकार जी जो कि मशहूर पत्रकार थे हमारे यहां के प्रतापगढ़ जिले के जी उन्होंने जो है मतलब खोज किया खोज करने के बाद निकाला उन्होंने क्या भूलू क्या याद करूं जब उनकी कहानी को पढ़ा उन्होंने तब इस बात को उछाला गया पेपर में पेपर में जब उछाला गया तो उसकी यह बात जो है अमिताभ बच्चन जी तक पहुंची पहुंची लेकिन फिर भी अमिताभ बच्चन जी ने कोई ध्यान नहीं दिया नहीं दिया तो इसलिए सेकंड अमिताभ बच्चन जी का कहना है कि फर्स्ट अमिताभ बच्चन जी जो कि मेरे बड़े भाई हैं
वो आकर के एक बार यहां के दृश्य को देखें और दृश्य को देखते हुए जैसी भी उनकी इच्छा हो जो भी हो वो करें लेकिन वादा निभाना चाहिए उन्होंने वादा उनकी वाइफ ने वादा किया था जया जी ने वादा किया था कि मैं पूरे परिवार सहित आऊंगी और साथ में बचन जी को भी लेकर आऊंगी हम मैं अपने पति को बच्चन जी को भी लेकर आऊंगी लेकिन वो लेकर आज तक यहां नहीं पधारे नहीं आए ये जया बच्चन जी यहां पर जब आई थी कौन से सन में आई थी कैसे वादा की थी कि आपसे मुलाकात हुआ था सन तो लगभग लगभग आप समझ लीजिए कि हम नहीं बता पाएंगे आपको तब भी आप हो गया कम से कम 2006 में 2006 में हां 2006 में आई थी और 2024 चल रहा है लगभग 18 साल हो गया जी हां 18 साल हो गया 18 साल हो गया अभी नहीं कोई ना वो भी आई ना वो भी आई कोई नहीं आई हां कोई नहीं आया
हम कोई आया नहीं तो ये वादा क्या करके गई थी वादा करके गई थी कि मैं पूरे परिवार सहित यहां आऊंगी और यहां पर कक वो राज्यसभा सांसद भी है हां जी हां पहले जब आई थी तब भी सांसद थी वो तब भी सांसद थी और यहां से गई तो उसके बाद फिर क्या हुआ क्या नहीं हुआ वो उसको वही आप जान सकती है क्योंकि भाई वो पॉलिटिकल लाइन में थी उसको वही जान सकती है लेकिन फिर भी उन्होंने जो वादा किया था अपने वादा को निभाई नहीं लेकिन वो गाना गाए थे खईके पान बनारस वाला गंगा किनारे वाला तो य गंगा जी तो नहीं है व तो बनारस में वहा प पहले प्रतापगढ़ भी इलाहाबाद में था जब हरिवंशराय बच्चन जी थे तो प्रतापगढ़ इलाहाबाद ही में था अलग से फिर कट के फिर बाद में कट करके ये जो है मतलब की प्रतापगढ़ प्रतापगढ़ जिला बना है आप समझ लीजिए तो अमिताभ बच्चन जी अगर कहते हैं
कि मैं इलाहाबाद का रहने वाला हूं तो वह भी याद करें कि जब हरवंश राय बच्चन जी यहां रहते थे तो बाऊ पट्टी भी इलाहाबाद के अंतर्गत आता था मतलब बच नहीं सकते आप घेर लेंगे क्योंकि आप हकीकत भाई है तो भाई भाई तो झूठ नहीं बोलेगा लेकिन एक भाई करोड़ों करोड़ों रुपए कमाया कोई मतलब नहीं लेकिन एक भाई का हुलिया देख लीजिए एक उनके याद में उनके लिए एक तरफ रहे हैं कि एक भाई का दर्शन हो जाए और आप मुंबई गए थे जी हां तो मुंबई गए थे तो पर्सनल उन्हीं के लिए गया था पर्सनल व्यक्तिगत उन्हीं के लिए गया था कि मैं एक बार उनसे मुलाकात हो जाए मैं दो घंटे वहीं पर बैठा रहा मैंने आपको पहले भी बताया कि जौनपुर का इनके यहां वो वचमन था वचमन के पास दो घंटे बैठ कर के हमने बात किया क्योंकि मेरा भाई भी मेरे साथ था हां मेरा भाई वहीं रह रहा था
बम्बे में उसी के पास मैं गया था उसके बाद दो घंटे तक वहां बैठ कर के हमने बात किया बात करने के उपरांत तमाम गाड़ियां खड़ी थी बिछी हुई थी समझ लीजिए बंडी थी बड़ी सी और उसके बाद जो है कालीन बिछी हुई थी और कालीन थी कि वो कालीन हमारी आपकी औकात नहीं है कि खरीद ले उसको हम आप इतनी महंगी कालीन इतनी महंगी कालीन थी आप समझ लीजिए और उसके बाद मैंने उस दिश को देखा जब तो दिश को देखने के बाद तमाम गाड़ियां खड़ी थी एंबुलेंस खड़ी थी जी उसके बाद जो है मतलब की उनके साथ एंबुलेंस भी चलती है जबकि पीएम के साथ एंबुलेंस चलती है लेकिन एंबुलेंस उनके साथ चला करती थी ये तो खुशी होना चाहिए भाई और देख करके देख कर के मुझे इतनी खुशी हुई केवल ये देख कर के खुशी हुई कि हम हमारे भाई साहब इतने ऊंचे जो है पद पर है और ये एक फिल्म स्टार है बॉलीवुड के फिल्म स्टार हैं अभिनेता है सब कुछ है मतलब सारी दुनिया उनको मानती है उनकी फिल्म को के लिए जो है
लोग लाठी खा खा करके जो है मतलब कि आप समझ लीजिए कि टिकट लेने के लिए जाते थे सिनेमा घरों में लेकिन आज वह बिल्कुल बाउ पट्टी पर ध्यान नहीं दे रहे हैं इसी बात की मुझे बहुत तकलीफ है अब थोड़ा सा चर्चा करेंगे जब आप वचमन से थोड़ा सा हम लोग भटक गए हैं वचमन से जब बातचीत हुआ तो क्या हुआ उस बात मैंने बताया है कहा कि ऐसा है कि अगर आपके पास कोई आई कार्ड होता या उनका कोड नंबर होता है कोड नंबर में अगर आप जो है मतलब की देते तो हम उन तक जो है पहुंचा देते लेकिन उस समय मेरे पास कोई आई कार्ड नहीं था इसलिए हम उनसे मुलाकात नहीं तो आपने कहा कि मैं आपके भाई है हम आपके गांव से आए पत्र आवाज से तो वामन संदेश वामन की हिम्मत नहीं थी जाने की वहां तक जाकर के उनसे मिल ले वामन खुद कह रहा था कि हम लोग खुद नहीं जान पाते किस गाड़ी में बैठते हैं कैसे चले जाते हैं आज तक हम लोग कुछ दिन से बातचीत नहीं कर पाते उसके बाद कोई ईमेल कोई संदेश किसी तरीके से पए कु कोई ना ईमेल ना कोई संदेश कोई चीजें यहां तक नहीं पहुंच पाई मीडिया के माध्यम से आप क्या कहना चाहेंगे अमिताभ बच्चन को और अजय बच्चन जी से क्योंकि ये दोनों एक तो राजनीति में है एक तो फिल्म वगैरह में मैं मेरा लास्ट है
ये इस मैं अपनी वाणी को विराम दूंगा कारण यह है कि अंता बच्चन जी अभी आपने क्या सवाल पूछा हमसे उनके बारे में पूछा हूं एक तो राजनीति में है और दूसरे एक तो फिल् फिल्मों में है जो सदी के महानायक है भारत ही नहीं विश्व में समझ लीजिए उनको मानने वाले चाहने वाले लोग हैं क्योंकि जब एक बार कहीं कदम रख देते हैं तो समझ लीजिए वहां प धती जो है सम लीजिए पवित्र हो जाती है जहां एक बार कदम रख देते वहा एक भाई एक भाई के लिए कैसे गुहार लगाए किस कैसा बिनती करेगा ज्यादा गुहार क्या लगाए अगर मान लीजिए कोई ऐसा शब्द बोलते हैं तो वो भी जो अच्छा नहीं लगेगा ना हमको अच्छा लगेगा ना उनको अच्छा लगेगा क्योंकि हम लोग यहां तड़प रहे हैं और उस तड़प को वो स्वीकार नहीं कर पा रहे हैं कि हमारे गांव के लोग कितना तड़प रहे हैं कि हम हमारे चाचा भाई जो भी जिसके लगते हैं हम हमारे ग्रामवासी पूरे मिलकर के सभी तड़प रहे हैं कि एक बार आ जाए यहां पर वो अपना दर्शन दे दें सभी को करोड़पति बना रहे हैं
यहां के लोगों को भिखारी बना के छोड़कर चले गए हैं कुल मिलाकर के मैं टीवी पर देखता हूं जब तो मुझे यही याद आता है आखों में आंसू आ जाता होगा एक भाई एक भाई को एक गांव के लोगों को जब उनके बारे में मैं सोचने लगता हूं तो मेरा ड जो है एकदम आप समझ लीजिए कि वो हो जाता है और आंखों में आंसू आ जाते हैं इस प्रकार से जो है मतलब सोचता हूं कि मेरा एक भाई जो है मतलब इतने ऐ आराम से रह रहा है और उसके ग्राम उसके गांव के लोग उसके भाई पट्टी दार जो है और बेचारे जो है वो मत परेशान पैसे एक एक पैसे के लिए तरस रहे हैं
परेशान है और उनका मकान भी आप देख रहे हैं पत्रकार जी कि उनका मकान भी जो है आपके सामने है और उनका मकान जरजर होता चला जा रहा है एक दिन यह बैठ जाएगा और उनका नाम भी यहां से खत्म हो क्योंकि एक दो पीढ़ी तो खत्म हो गया यहां पर नहीं आया और ये भी एक अभिषेक बच्चन है दूसरी पीढ़ चल रही उनके भी बच्चे हो गए हैं जी जब वो नहीं याद कर रहे हैं तो उनका लड़का अभिषेक बच्चन क्या याद करेगा वो तो इलाहाबाद में भी भूल जाएंगे इलाहाबाद भूल जाएगा तो तीनों मकान भूल जाएगा अपना मेरा मकान किसने कब्जा किया है इलाहाबाद में वकील साहब ने आनंद भवन में के पास जो इनका मकान बना हुआ है वकील साहब रहते हैं एक पूरे मकान में आनंद भवन के बगल में ही है में ही है तो इस प्रकार जो है मतलब कि हम ये चाहते हैं हम ग्रामवासी स अच्छा उनकी आप मूवी वगैरह देखते हैं जी मूवी वगैरह उनकी देखते हैं फिल्में देखते हैं उकी कोई कविता कोई मूवी उनका याद हो जो अपना भाई का एक मूवी के अनुसार अभी तो हम उस अंदाज में थोड़ा सा अभी थोड़ा माइंड थका हुआ है क्योंकि अभी हम कोचिंग से आ रहे हैं कारण ये है नहीं तो आपको फिर दोबारा आप जब आएंगे तो उनकी एक कविता मैं आपको सुनाऊंगा जैसे हाई स्कूल में उन्होंने लिखा है
पथ के राही लिखा है ना उन्होंने जब जब पथिक थक कर आता है हम तो मधु साले में जाता है हम ना हम पैक लेने के लिए मधु साले में जा जब राही थक कर आता है तो मधु साले में जाता है ना तो उन्होंने लिखा है पद के राही एक हाई स्कूल में लिखा है उन्होंने इस कविता को मैं पूरी तरह से आपको सुनाऊंगा अगली बार आएंगे अगली बार आएंगे तो पूरी तरह से मैं सुनाऊंगा मुझे बड़ा अच्छा लगा कि जो हरिवंश राय बच्चन जी ने इसको लिखा है मुझे इसलिए पसंद आया कि वास्तव में मजदूर व्यक्ति जब मेहनत करके थक जाता है तो उसके बाद वो कहां जाता है सीधा उसको मसाला दिखाई देता है दौड़ कर जाता है और जब वहां जाता है तो अपनी थकावट को दूर करने के लिए उमर चाले में प्रवेश करके अपना थकावट दूर करता है
अब ज्यादा खुल करके तो नहीं कर सकते चलिए बहुत सुंदर लगा हमारे साथ अमिताभ बच्चन के भाई अमिताभ बच्चन के टू कॉपी और उन्हीं के अंदाज में सेकंड अमिताभ बच्चन समझ लीजिए भाई अमिताभ बच्चन टू नहीं अम सेकंड अमिताभ बच्चन है और जो ये शिक्षक हैं स्कूलों में पढ़ाते हैं तमाम उनके कविताओं को याद रखा है अगले एपिसोड में लेकर आएंगे और तमाम कहानियों को बताएंगे हरिवंश राय बच्चन से लेकर अभिषेक बच्चन तक की कहानी को बताएंगे और जय बच्चन से लेके ऐश्वर्या राय तक के कहानियों को दर्शाए उस एपिसोड में फिलहाल आप लोगों को यह वीडियो कैसा लगा अमिताभ बच्चन के पत्रिक आवाज से खड़े होकर एक खबर दिखाया आप लोग लोग बताइएगा