फेफडो में पानी भरने से निधन, जानिए क्यों और कैसे होती है ये बीमारी..फेफडो में पानी भरने से निधन..

asrani bimari

बॉलीवुड के जानेमाने अभिनेता और कॉमेडी के लीजेंड गोवर्धन असरानी जिन्हें पूरी दुनिया प्यार से असुरानी के नाम से जानती थी। वह अब इस दुनिया में नहीं रहे। गत 20 अक्टूबर 2025 को उन्होंने मुंबई के जूहू स्थित भारतीय आरोग्य निधि अस्पताल में अंतिम सांस ली। वहीं मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो 84 साल के असुरानी पिछले कुछ दिनों से सांस संबंधी समस्याओं से जूझ रहे थे। तो आइए आज की इस वीडियो में आपको बताते हैं कि आखिर असरानी के मौत की असली वजह क्या है,

और किस बीमारी ने इनकी जान ले ली और यह बीमारी क्यों होता है और किस एज में ज्यादा खतरा रहता है यह सब हम आपको आगे की वीडियो में बताएंगे लेकिन उससे पहले नमस्कार मैं सुतोष और आप बोल्ट स्काई देख रहे हैं। दरअसल असरानी के मैनेजर ने कहा एक्टर पिछले कुछ दिनों से अस्वस्थ चल रहे थे। स्वास लेने में दिक्कत के चलते उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया था। जांच में पता चला था कि उनके फेफड़ों में पानी भर गया था,

ऐसे में 20 अक्टूबर 2025 की दोपहर को करीब 3:00 बजे उन्होंने इस दुनिया को हमेशा के लिए अलविदा कह दिया। तो चलिए आइए अब आपको बताते हैं कि आखिर फेफड़ों में पानी क्यों भरता है और किस एज में ज्यादा खतरा होता है। जब दिल काम नहीं कर पा रहा हो यानी कि कंजेस्टिव हार्ट फेलर हो जाए तो फेफड़ों की रक्त नलिकाओं में दबाव बढ़ जाता है और तरल हवा के थैलों में रूस जाता है,

फेफड़े में सूजन या फिर संक्रमण हो जाना जैसे कि निमोनिया जिससे कोशिकाओं में तरल जमा हो जाता है। वहीं गुर्दे यानी कि लीवर संबंधी बीमारी या फिर अन्य कारण जिनसे शरीर में तरल दबाव का संतुलन बिगड़ जाता है। यह सभी कारण हैं फेफड़ों के अंदर पानी जमा होने के। तो आइए अब आपको बताते हैं कि आखिर किस उम्र में ज्यादा खतरा होता है। क्लेरल डिसऑर्डर किसी भी उम्र में हो सकता है,

लेकिन विश्लेषण के अनुसार 15 से 34 वर्ष के बीच तथा 55 वर्ष के ऊपर के लोगों में अधिक आम माने जाते हैं। वृद्ध लोगों में यानी कि ज्यादा उम्र वाले लोगों में जोखिम और बढ़ जाता है क्योंकि उम्र बढ़ने पर फेफड़े, हृदय और अन्य अंगों की कार्यक्षमता कम होती है और दिल, फेफड़े, गुर्दे की पुरानी बीमारियां होने की संभावना अधिक होती है,

इसलिए अगर आपका या फिर आपके पापा, मम्मा या फिर बुजुर्ग किसी को फेफड़े में पानी जैसे लक्षण दिखे जैसे सांस लेने में दिक्कत हो, छाती में दर्द, अचानक खांसी, उल्टी, हरा खून जैसा बलगम तो 55 प्लस उम्र वालों के विशेष सतर्कता की जरूरत है और आप तुरंत डॉक्टर से सलाह अवश्य लें,

अब ऐसे में जीवन शैली में सुधार, धूम्रपान छोड़ना, शराब सीमित करना, नमक कम लेना, नियमित व्यायाम और एक्टिव रहना लाइफ में बहुत जरूरी है। तो दोस्तों, फिलहाल इस वीडियो में इतना ही। आपको यह जानकारी कैसी लगी हमें कमेंट में लिखकर जरूर बताइएगा।

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