आमिर खान ने पिता ताहिर हुसैन के गुस्से, यूपी की पुश्तैनी ज़मीन पर क्या बताया..
कहानियों में हम सबकी मां का खूब जिक्र आता है। पर मैं इंटरव्यू की शुरुआत पिता के जिक्र से करना चाहता हूं। हम बताइए हमें उनके बारे में। ताहिर हुसैन खान साहब हम अब्बा जान बहुत ही बहुत ही मोहब्बती थे। लेकिन उसके साथ-साथ वो बहुत ही उनको गुस्सा बड़ा आता था और किस बात पे कब गुस्सा आ जाए कुछ मतलब समझ में नहीं आता था उनके साथ और उनका गुस्सा बड़ा तेज था ही वास नोन फॉर हिज एंगर किसी को भी डांट देते थे आई एम वेरी स्ट्रिक्ट अबाउट थिंग्स शबाना जी ने बताया तो वो तो वो ही हम बहुत डरते थे,
अब्बाजान तो जब घंटी बजती थी घर पे जब वो आते थे उनकी घंटी हम पहचान लेते थे और जैसे चूहेव हुए भागते नहीं है अपने बिलों में तो हम लोग ऐसे कमरे में भाग जाते थे कि अब्बा जान आएंगे तो पता नहीं किस बात पे गुस्सा आ जाए डांट दें तो वी वर अ लिटिल स्केर्ड ऑफ़ अब्बा जान चारों बच्चे और बट ही गव अस अ वेरी गुड लाइफ आई थिंक दैट ही हमको बड़ा अच्छी परवरिश दी और उनसे तो बहुत कुछ सीखने को भी मिला बट ही वास अ टफ फादर टफ फादर ही हैड एंगर इश्यूज आई आई वुड अस्यूम अब मतलब आज हम उस वक्त तो हम छोटे थे,
तो और उस वक्त साइकोलॉजी के बारे में इतना जानते भी नहीं थे हम तो अब हमें समझ में आता है कि ही डिड हैव एंगर इश्यूज ही टू गेट वेरी एंग्री एट टाइम्स अ हां एंगर इश्यूज तो थे उनको जब आप और आपका परिवार बैठता है तो आप अपनी जड़े कहां तलाशते हैं क्योंकि आप बड़ी समृद्ध परंपरा से आते हैं एक तरफ मौलाना अबुल कलाम आजाद जी जी तो हरदोई कनेक्शन माना जाएगा फर्रुखाबाद कनेक्शन हैदराबाद कनेक्शन कहां से कोई पूछे अगर आजाद आपसे पूछे कि आपके अब्बू के अब्बू के अब्बू कहीं भी आप पीछे तक चले जाइए तो कहां कौन सी जमीन फर्रुखाबाद यूपी का हरदोई बनारस शाहबाद एक जगह है,
जहां पे हरदोई के पास हरदोई के पास जहां हमारे अभी भी वहां जमीन है जो इस वक्त मेरे नाम पे है एक्चुअली जी आप उत्तर प्रदेश के किसान हैं भाई साहब। वाह क्योंकि वो आम के बाग थे अ मेरे दादा के और जब जब कुछ साल पहले करीब आई थिंक 10 साल पहले की बात है जब अम्मी ने मुझे बताया कि वो शाहबाद की जो प्रॉपर्टी है वो फैमिली बेचना चाह रही है। तो उसमें अब्बा जान, चाचा, उनके बहन बहनें, बड़े चाचा पांच भाई-बहन थे,
तो मैंने कहा अब बेच रहे हैं तो फिर वो फैमिली से बाहर चली जाएगी। कोई और खरीद लेगा। तो उन्होंने कहा हां तो ऐसे मैं ही खरीद देता हूं। तो मैंने ही फैमिली से वो जमीन खरीदी बिकॉज़ मैं चाहता था कि अब इतनी परिवार की जो जमीन है एक वो परिवार में ही रहे। आप कभी गए उस जमीन पे? मैं गया नहीं हूं अभी तक। मुझे मौका नहीं मिला है। जाना चाहता हूं मैं। भाई तहसीलदार साहब जरा इनको नोटिस भेजिए। हैं। इनका दाखिल खारिज हो गया और ये अभी तक गए नहीं है,
हां। पर आपको पता है ना कि जमीन के पक्के कागज के लिए आपको एक बार वहां जाना होगा एसडीएम। आपकी फोटो खींचेगी वहां पे। उसके बाद ही ये पूरा ट्रांसफर माना जाएगा। तो शायद मैं रजिस्ट्रेशन के लिए गया नहीं हूं रजिस्ट्रेशन के लिए। हां लीजिए। करवा लेता हूं मैं। सही कहा आपने। अच्छा लगेगा कि बोले साहब आमिर खान की मेड का झगड़ा हो गया। किसी ने पानी काट लिया। उनके खेत में पानी नहीं जा रहा है,
हां। तो आई थिंक ओरिजिनली हम किसान थे। आई सपोज हां उसके बाद अब्बा जान एक्चुअली चाचा जान बंबई आए। नासिर साहब नासिर साहब मुंबई आए पहले और उनको बनना था राइटर। उनको लिखने का बड़ा शौक था। तो आई थिंक कॉलेज के जमाने में उन्होंने कुछ इनाम भी जीता था अपनी कहानी के लिए। जो बाद में फिल्म बनी बाहरों के सपने। हम्म। तो वो शॉर्ट स्टोरी के लिए उन्हें इनाम भी मिला था,
फिर वो मुंबई आए। बड़ा स्ट्रगल किया उन्होंने। फैमिली का सपोर्ट इतना नहीं मिला उनको क्योंकि उस वक्त अ फिल्मों में आना अच्छा नहीं समझा जाता था। तो फैमिली में सभी लोग उसके खिलाफ थे। और मुझे याद है चाचा ने मुझे बताया कि सब ने कहा कि भाई वो सब ने कहा कि इसको मौलाना के पास भेजो। मौलाना इनको समझाएंगे,
तो मौलाना अबुल कलाम आजाद। अबुल कलाम आजाद। वाह। तो वो मौलाना से मिलने गए। और उन्होंने बताया कि सब यह कह रहे हैं कि भ मुझे लिखना है फिल्मों में और सब मुझे कह रहे हैं आप फिल्मों में ना आए। तो मौलाना ने उसे कहा देखो जो तुम्हारा दिल कहे वो करो और किसी की मत सुनो.



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