अली खामेनेई को इस हथियार से इजराइल ने मारा, क्यों कहा जाता है इसे आसमानी तूफान?..

ali khamenai

इस हथियार से हुई थी खामने की हत्या। खामने पर आसमान से बरसी मौत। शनिवार को ईरान के सर्वोच्च नेता आयातुल्ला अली खामने की हत्या ने मध्यपूर्व में तनाव को और बढ़ा दिया। रिपोर्ट के मुताबिक इजराइल ने तेहरान में उनके सुरक्षित परिसर पर एक अत्याधुनिक मिसाइल से हमला किया जिसमें 86 साल के खामोई की मौत हो गई। न्यूयॉर्क पोस्ट के मुताबिक यह हमला एक लड़ाकू विमान से दागी गई ब्लू स्पेरो मिसाइल से किया गया।

यह मिसाइल अर्धबैलेस्टिक प्रक्षेप पथ पर उड़ती है और कुछ समय के लिए पृथ्वी के वायुमंडल से बाहर चली जाती है। इसी वजह से यह पारंपरिक वायु रक्षण प्रणालियों को चकमा देकर बेहद कम चेतावनी के साथ लक्ष्य पर हमला करने में सक्षम मानी जाती है। इजराइली अधिकारियों का कहना है कि यह हमला तेहरान में ईरानी नेतृत्व के ठिकानों पर चलाए जा रहे एक बड़े सैन्य अभियान का हिस्सा था।

मिसाइल को पोस्टर स्ट्रीट स्थित खामनई के कड़ी सुरक्षा वाले परिसर को निशाना बनाकर दागा गया। जहां उस समय कई वरिष्ठ सैन्य अधिकारी और राजनीतिक नेता मौजूद थे। अगली सुबह ईरान के सरकारी मीडिया ने पुष्टि की कि इस हमले में खामने की मौत हो गई। इजराइल लंबे समय से खामनई को ईरान की क्षेत्रीय सैन्य रणनीति और परमाणु कार्यक्रम के पीछे सबसे अहम व्यक्ति मानता रहा है।

अगर ब्लू स्परो मिसाइल की बात करें तो ब्लू स्परो इजराइल के स्पेरो मिसाइल परिवार का हिस्सा है। इसमें ब्लैक स्पेरो और सिल्वर स्पेरो भी शामिल है। शुरुआत में इसे बैलस्टिक मिसाइल की नकल करने के लिए बनाया गया था। बाद में इसे ऑपरेशनल हमलों के लिए भी तैयार किया गया। इसकी लंबाई लगभग 6.5 मीटर और वजन करीब 1.9 टन होता है। इसे F15 ईगल जैसे लड़ाकू विमान से लॉन्च किया जाता है।

लॉन्च के बाद बूस्टर इसे वायुमंडल के ऊपरी हिस्से तक ले जाता है। फिर यह तेज रफ्तार से लक्ष्य की ओर नीचे गिरती है। असामान्य उड़ान पथ के कारण इसे रोकना बेहद मुश्किल होता है। मिसाइल का मलवा पश्चिमी इराक में मिलने की रिपोर्ट सामने आई है। आपको बता दें यह हमला केवल उन्नत हथियारों का नतीजा नहीं था बल्कि इसके पीछे इजरायली खुफिया एजेंसी मोसाद की सालों की निगरानी और योजना थी।

अधिकारियों के अनुसार इजरायली एजेंसियां लंबे वक्त से खामदेने की सुरक्षा व्यवस्था और गतिविधियों पर नजर रख रही थी। खुफिया जानकारी जुटाने के लिए परिसर के आसपास के ट्रैफिक कैमरों, संचार नेटवर्क और अन्य डिजिटल स्रोतों की निगरानी की जाती थी। अंतिम हमला तब किया गया जब यह जानकारी सामने आई कि खामनई अपने खास लोगों के साथ आमने-सामने बैठकर बैठक करने वाले हैं।

रिपोर्ट्स के अनुसार खामनई अक्सर अपने आवास के नीचे बने एक गहरे भूमिगत बंकर में रात बिताते थे। जिसे ईरान सबसे सुरक्षित मानता था। इसी वजह से इजराइली योजनाकारों ने रात में हमला करने की बजाय उस समय का इंतजार किया जब वह और उनके कमांडर जमीन के ऊपर मौजूद हो।

बताया जाता है कि हमले के ठीक पहले इजराइल की साइबर इकाइयों ने इलाके के मोबाइल फोन नेटवर्क को भी बाधित कर दिया था ताकि किसी प्रकार की कोई चेतावनी परिसर तक पहुंच ही ना पाए। इस घटना ने इजराइल और ईरान के बीच चल रहे टकराव को और अधिक गंभीर मोड़ पर लाकर खड़ा कर दिया है। अब लगातार सैन्य टकराव हो रहा है और आसपास के कई देश इन धमाकों से ढहल रहे हैं।

Post Comment

You May Have Missed