श!रा’ब पीकर उड़ाया विमान, 3 साल सस्पेंड क्यों पायलट सुमित कपूर?..

महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम अजीत पवार के विमान हादसे के बाद कई राज परत दर परत खुल रही हैं। दरअसल जिस पायलट के हाथों विमान की कमान थी सुमित कपूर अब उनके ट्रैक रिकॉर्ड की जानकारी संदेहात्मक प्रतीत हो रही है। सुमित कपूर 3 साल तक के लिए सस्पेंडेड थे, और सस्पेंशन का कारण था फ्लाई से पहले अल्कोहल कंजम्पशन। महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम और मजबूत जमीनी नेता अजीत पवार को हम खो चुके हैं। अजीत पवार जिस प्लेन में सवार थे, वह क्रैश हो गया, और अजीत पवार समेत पांच लोगों की मौत हो गई। इस प्लेन की कमान संभाल रहे पायलट सुमित कपूर को लेकर अब बड़ा खुलासा हुआ है।

कैप्टन सुमित कपूर का अतीत शराब और सुरक्षा नियमों के उल्लंघनों से भरा है। शराब के चक्कर में कैप्टन सुमित को पहले भी 3 साल के लिए सस्पेंड किया जा चुका है। ये बहुत ही दुखद हादसा है और इस एयर कैश में कैप्टन सुमित कपूर जिनको मैं पिछले 20 सालों से जानता था। एयर सहारा के दिनों से और बहुत एक्सपीरियंस्ड पायलट हैं थे और भगवान उनकी आत्मा को शांति दे और जितने लोगों ने अपनी जान गवाई है उनकी आत्मा को शांति दे। ये एक्सीडेंट क्यों हुआ? यह तो जांच का विषय है। लेकिन जो रिपोर्ट हमारे पास है उससे यह पता चलता है कि यह जहाज बॉम्बे से बारामती जब जा रहा था और पहली बार जब ये बारामती में उतरने की कोशिश कर रहा था

तो किसी कारणवश उस प्रयास को रोक कर करके एयरक्राफ्ट वापस उड़ा। अ बताते हैं रिपोर्ट ये है कि विजिबिलिटी कंडीशंस बहुत मार्जिनल थी। मतलब कि क्लाउड्स और फग और रेन का थोड़ा वहां पे शायद इंपैक्ट रहा होगा। जिसकी वजह से वहां की विजिबिलिटी जो है वो कम थी। दूसरे बार जब ये अप्रोच कर रहा था और रनवे से पहलेयह टच डाउन करके क्षतिग्रस्त हो गया। क्या यह सिर्फ खराब मौसम के कारण हुआ या खराब मौसम के साथ पायलट एरर हुआ या खराब मौसम के साथ किसी टेक्निकल एरर की वजह से यह हुआ। यह सीबीआर और एफडीआर को जांच करने के बाद ही हम किसी नतीजे पर पहुंचेंगे। बिना वेतन सुमित कपूर को ड्यूटी से अलग रखा गया था।

वह दो बार उड़ान से पहले शराब टेस्ट में फेल हुए थे। राज्यसभा में तब पीयूष गोयल के सवाल के जवाब में तत्कालीन नागरिक उड्डनयन मंत्री ने जो जवाब दिया था उसमें सुमित कपूर के खिलाफ की गई कार्यवाही भी शामिल है। कैप्टन सुमित कपूर के पास 15,000 से अधिक घंटों की उड़ान का अनुभव था, लेकिन हालिया खुलासों ने उनकी पेशेवर ईमानदारी पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए। अब कैप्टन सुमित कपूर के दो रिकॉर्ड की बात कर लेते हैं। सबसे पहला 13 मार्च 2010 दिल्ली एयरपोर्ट पर उड़ान संख्या एस2231 दिल्ली बेंगलुरु के संचालन से ठीक पहले वो ब्रीथ एनालाइजर यानी बीए टेस्ट में श!रा!ब पॉजिटिव पाए गए थे।

दूसरी घटना की बात करें तो 7 अप्रैल 2017 कैप्टन सुमित ने 7 साल बाद फिर वही गलती दोहराई। दिल्ली से गुवाहाटी जाने वाली उड़ान संख्या एस24721 के दौरान वह शराब के नशे में ड्यूटी पर पहुंचे और पकड़े गए। वहीं डीजीसीए ने कड़ा रुख अपनाते हुए 24 अप्रैल 2017 को एक आधिकारिक आदेश जारी किया और सुमित को 3 साल के लिए सस्पेंड कर दिया था। इसके बाद उन्होंने वापसी की और वीएसआर वेंचर जैसे ऑपरेटर के साथ जुड़कर वीआईपी प्लेन उड़ाने लगे। लेकिन यह जो हादसा हुआ है उस पर यकीन करना मुश्किल था।

अब उस प्राइवेट ऑपरेटर पर भी सवाल उठ रहे हैं जिसने एक ऐसे पायलट को डिप्टी सीएम की सुरक्षा सौंपी जिसका ट्रैक रिकॉर्ड पहले से ही संदिग्ध था। अब सुनिए कि हादसे के आखिरी 10 मिनट में क्या कुछ हुआ। अजीत पवार जिस विमान से सफर कर रहे थे उसके मालिक वी के सिंह ने हादसे को लेकर कई जानकारियां दी है। उन्होंने कहा कि पायलट शायद रनवे देख नहीं पाया और उनसे मिस्ड अप्रोच किया। मिस्ड अप्रोच का मतलब है कि पहली बार में पायलट लैंडिंग नहीं कर सका और विमान को फिर से ऊपर ले गया। लेकिन बड़ा सवाल यह है

कि बारामती में घटना के वक्त विजिबिलिटी 3 किलोमीटर तक थी। जो बातें हमें मालूम है वो यह है कि पायलट ने किसी तरह का इमरजेंसी डिक्लेअ नहीं किया हुआ था। लेकिन उससे यह प्रमाणित नहीं होता है कि कोई टेक्निकल डिफेक्ट्स को से वो जूझ नहीं रहा था। ऐसे जो इलेक्शन के माहौल में प्रेशर तो पायलट्स के ऊपर बहुत होता है क्योंकि हजारों की तादाद में लोग अपने प्रिय नेता को देखने के लिए खड़े होते हैं तो एक माहौल बन जाता है। एक प्रेशर बन जाता है कि साहब इस पर्टिकुलर एयरपोर्ट पे लैंड करना है। और कभी-कभी ये व्यवस्था की तरफ से भी बहुत प्रेशर बनता है।

तो यह दोनों ही चीज को हमें समझना होगा कि फ्लाइंग जो है यह बहुत ही नॉन फॉरगिविंग मतलब के इसमें जो गलतियां होती हैं या जो हम इसके साथ हम खिलवाड़ नहीं कर सकते हैं। उड़ान के सुरक्षा के साथ हम किसी भी तरह का खिलवाड़ नहीं कर सकते हैं। और व्यवस्था को भी ये चाहिए कि ये ये जो प्रेशर पायलट के ऊपर इलेक्शन के दौरान बनता है उस चीज को कम रखें और अगर जो वेदर या विजिबिलिटी या मौसम अगर मार्जिनल हो तो यह चीज पायलट को पॉलिटिकल लीडरशिप ही ये बता दे कि जाना कोई बहुत जरूरी नहीं है।

अगर मौसम खराब होगा तो वापस आ जाइएगा। इससे क्या होता है कि पायलट के ऊपर से प्रेशर भी कम हो जाता है। यहां पर ऐसा हुआ या नहीं हुआ मुझे नहीं मालूम। लेकिन छोटा एयरपोर्ट है। वहां पर किसी तरह के इंस्ट्रूमेंट लैंडिंग सिस्टम की व्यवस्था नहीं है। मौसम भी खराब था। तो इन सब चीज को मिलाकर करके इस तरह का हादसा हुआ है। आइंदा ना हो इसके लिए ज्यादा जागरूक रहने की जरूरत है.

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