वेदांता के चेयरमैन अनिल अग्रवाल के बेटे अग्निवेश का निधन, हादसे के बाद अस्पताल में हुई मौत..

Vedता ग्रुप के मालिक अनिल अग्रवाल के बेटे का निधन हो गया। दरअसल, एक एक्सीडेंट हुआ न्यूयॉर्क में जहां पर उनकी मौत हो गई और इसकी जानकारी खुद अनिल अग्रवाल ने ट्वीट के जरिए दी। आपको बता दूं वेदांता ग्रुप के चेयरमैन हैं और उनके बेटे जो थे 49 इयर्स उनकी एज थी। अग्निवेश उनका नाम था। अग्निवेश अग्रवाल आज एक हादसा हुआ जिसके दौरान उनका निधन हो गया। न्यूयॉर्क में इलाज के दौरान उन्होंने अंतिम सांस ली। 49 इयर्स उनकी एज थी। वह दरअसल माउंट अ सिनाई हॉस्पिटल में एडमिट थे,

यह पता चला है कि वो एक स्कीम के दौरान हादसा हो गया था। जिस वजह से उनका इलाज चल रहा था। गंभीर चोटें आई थी उनको और उनकी मौत हो गई। इसको लेकर अनिल अग्रवाल ने यह भी कहा है कि वह अब अपनी जो इनकम है उसका 75% समाज को देंगे और समाज के हितों की रक्षा करेंगे। लेकिन सबसे बड़ी बात है कि ये जो घटना हुई इसने कई सवाल खड़े कर दिए। आपको बता दूं अग्निवेश एक स्पोर्ट्समैन थे,

ये बताते हैं एक म्यूजिशियन थे और एक अच्छे लीडर उन्होंने अपने उनको बताया गया है। उनके जो फादर हैं अनिल अग्रवाल इस बात की जानकारी उन्होंने दी है। दरअसल वो पटना में जन्मे इसके बाद अजमेर में उन्होंने पढ़ाई की थी और वेदता ग्रुप की जो तमाम कंपनीज़ है उसमें अह प्राइम पोस्ट पर वो रहे थे और उनके बारे में आपको बताता हूं। दरअसल कौन थे अग्निवेश अग्रवाल? इसके बारे में आपको बताता हूं। लेकिन जिस तरह से ये वाक्या हुआ स्कीम उसको लेकर अब तमाम सवाल खड़े हुए हैं। दरअसल 3 जून 1976 को बिहार के पटना में उनका जन्म हुआ था और अजमेर के ये बताते हैं,

मायो कॉलेज से वो ग्रेजुएट हुए उसके बाद वेदता ग्रुप में उन्होंने एंट्री की और हिंदुस्तान जिंक के वो गैर कार्यकारी अध्यक्ष भी रहे थे। 19 2019 में उन्होंने अपना पद छोड़ने के बाद वेदता से जुड़ी एक कंपनी है तलवंडी साबो पावर लिमिटेड उसमें वो डायरेक्टर्स में शामिल थे। इन्होंने अनिल अग्रवाल ने एक भावुक पोस्ट किया जिसमें उन्होंने कहा कि अग्निवेश बहुत कुछ थे। उन्होंने सबसे अच्छी कंपनियों में से एक फज़रा गोल्ड शुरू की। हिंदुस्तान जिंक के चेयरमैन बने और अपने साथ काम करने वालों और दोस्तों का सम्मान पाया। उन्होंने आगे लिखा वो मेरा बेटा नहीं था। मेरे दोस्त थे। मेरा गर्व और मेरी दुनिया थी,

दरअसल अग्निवेश की शादी पूजा के साथ हुई थी जो पश्चिम बंगाल के सबसे अमीर कारोबारी घराने से ताल्लुक रखती है। यह जानकारी आपको बता दूं। वह श्री सीमेंट के मैनेजिंग डायरेक्टर हरी मोहन बांगुर की बेटी है। उनके दादा बेनू गोपाल बांगुर देश के सबसे अमीर लोगों में शामिल थे। उनकी नेटवर्थ की बात करें तो करीब 55,000 करोड़ से ज्यादा है। 1992 से 2000 तक श्री सीमेंट के वह चेयरमैन रहे थे। अनिल अग्रवाल के बारे में भी अगर मैं आपको बताऊं कि उनकी जो नेटवर्थ है करीब 3.3 अरब डॉलर है और कंपनी का मार्केट कैपिटलाइजेशन 2.36 लाख करोड़ से भी ज्यादा है,

यानी एक बड़े घराने से वो ताल्लुक ताल्लुक रखते थे। और सबसे बड़ी बात है स्किंग के दौरान उनकी मौत हो गई। इससे पहले आपको बताऊं स्कीम होती क्या है? अनिल अग्रवाल ने एक बात और बोली थी। उन्होंने कहा था कि अग्निवेश का यह सपना था कि जो इनकम होगी उसका 75% वो समाज को देंगे और वो उनका उनके पिता अनिल अग्रवाल का कहना है कि वो इस सपने को जरूर पूरा करेंगे। उन्होंने कहा कि मैंने अपने बेटे अग्निवेश से वादा किया था हम जो भी कमाएंगे उसका 75% से ज्यादा समाज को देंगे। आज मैं उस वादे को दोहराता हूं और सादा जीवन जीने का संकल्प लेता हूं। इस तरह की बात उन्होंने कही है,

ये अपने आप में बहुत बड़ी बात है और जिस तरह से ये अब घटना हुई है इसकी भी जांच होनी चाहिए ईमानदारी से। हालांकि ये हादसा है। इस तरह की जानकारी अभी निकल कर सामने आ रही है। आपको बता दूं क्या होता है स्किंग? इसके बारे में भी आपको थोड़ी जानकारी देता हूं। आपको बता दें जो स्किंग है वो एक शीतकालीन खेल और मनोरंजक गतिविधि। आपको आपको पता होगा। आपने कई वीडियोस देखी होंगी जिसमें कई लोग जो स्नो जहां पर होती है वहां पर यह गेम को खेलते हैं। जिसमें व्यक्ति अपने पैरों में बंधी लंबी पतली तख्तियों की मदद से बर्फ पर फिसलते हैं। बर्फ पर फिसलते हैं,

तख्तियां पैरों में लगी होती है। अक्सर अक्सर संतुलन बनाने और दिशा बदलने के लिए हाथों में छड़ी का इस्तेमाल करते हैं। हमने देखा है कि छड़ी का भी इस्तेमाल किया जाता है स्कीम के लिए। यह परिवहन का एक प्राचीन साधन था जो अब लोकप्रिय ओलंपिक खेल और एडवेंचरस एक्टिविटी बन गया है। जिसके कई रूप है जैसे अल्पाइन नोडिक फ्री स्टाइल होते हैं। आपको बता दें इसमें विशेष जूते होते हैं जो स्की से जुड़े होते हैं और अक्सर छड़ी का इस्तेमाल इसमें किया जाता है। स्की स्की की मदद से बर्फ में आगे की ओर फिसल फिसलना फिसलते हैं,

ढलान पर नीचे उतरते हैं और समतल जमीन पर चलते हैं। यह इस तरह की यह किस तरह से काम करता है आपको बता दूं। तकनीक क्या है? शुरुआती लोग वी आकार में इसकी का उपयोग करते हैं। जबकि अनुभवी लोग समानांतर टर्न और अधिक जटिल तकनीकें अपनाते हैं। अब इसके कई सारे प्रकार भी हैं। अल्पाइन है। डाउन हिल में होती है ये। क्रॉस कंट्री फ्री स्टाइल कूदना घूमना और कलाबाजी करना कहा जाता है। बैक कंट्री बिना ढले रास्तों और अनजान इलाकों में स्कीम करना ये सबसे ज्यादा चुनौतीपूर्ण होता है। तो आपने देखा कि ये दरअसल बर्फ में फिसलने का एक मजेदार तरीका है जो परिवहन से लेकर एक उच्च स्तरीय प्रतिस्पर्धी खेल तक के रूप में विकसित हुआ है,

यानी कि हर उम्र और क्षमता के लोगों के लिए कुछ ना कुछ इसमें एक तरह से गेम बनाई गई है। और इसी दौरान वह न्यूयॉर्क में ये स्कीम कर रहे थे तभी एक हादसा हुआ जिसमें उनकी मौत हो गई। हालांकि जो इस तरह के प्रोफेशनल्स होते हैं वो ट्रेनिंग भी लेते हैं। इसकी बकायदा प्रैक्टिस करते हैं। और इसमें बैलेंस बना के रखना होता है। उबड़ खाबड़ रास्ते होते हैं। वहां आपको बैलेंस मेंटेन रखना होता है। कई बार ऐसा होता है कि इसमें हादसे हो जाते हैं। ठीक वैसा ही हादसा हुआ। अनिल अग्रवाल के बेटे के साथ जिससे उनकी मौत हो गई।

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