हर कम अपना करेंगे ऐ वतन भारतीय हिंदी सिनेमा की एक ऐसी अभिनेत्री जिसकी खूबसूरती मुस्कुराहट सादगी ने हर दिल में घर कर दिया था यह फिल्मी जगत का वो नगीना थी जिसकी चमक से आज भी हिंदी सिनेमा रोशन है इस सदाबहार अभिनेत्री के अभिनय का जादू ऐसा था कि यह 30 साल तक लगातार हिंदी सिनेमा में फिल्म फेयर अवार्ड जीतने वाली अभिनेत्री बनी लेकिन इनके इसी अवार्ड को इनके परिवार में किस लड़की ने छीन लिया तुम ही मेरे मंदिर तुम ही मेरी पूजा कैसे यह अभिनेत्री 50 के दशक में मिस इंडिया बन गई,
और गुजरे दौर में जिस वक्त बहू बेटियां पर्दे के अंदर डरी सहमी छुपी रहती थी उस वक्त यह अभिनेत्री स्विम सूट में सबके सामने आ गई ब्लैक एंड वाइट के दौर में भी अपने अभिनय से फिल्मी पर्दे पर रंग भरने वाली इस मशहूर और खूबसूरत अभिनेत्री की जिंदगी में ऐसा क्या हुआ था कि इनको खुद की फिल्म देखने नहीं दिया गया और इनको फिल्म के प्रीमियर में गेट से ही बाहर कर दिया गया जिस पथ पे चला उस पथ पे मुझे जिस एक शानदार फिल्मी सफर और कामयाब शादीशुदा जिंदगी होने के बावजूद यह अभिनेत्री अपनी जिंदगी में कई तकलीफ और दुख दर्द समेटे हुए थी,
अपनी सगी मां के साथ इनके साथ ऐसा क्या हुआ था कि मां बेटी कोर्ट में एक दूसरे के खिलाफ लड़ती रही तो वहीं सगी बहन के साथ बढ़ते झगड़े ने 54 साल की उम्र में इनको वह दिन दिखाए कि यह अभिनेत्री इस दुनिया को छोड़ना चाहती थी अपने आप को धोखा देकर झूठ दिखावा इन सब के सहारे जीने से कहीं अच्छा है इतना नाम इतनी शोहरत होने के बाद भी इस अभिनेत्री की वह कौन सी ख्वाहिश थी जिसको यह अपने अंतिम दिनों में पूरा कर पाई थी और इनके साथ ऐसा क्या हुआ था कि इन्होंने एक दूसरे मशहूर सज्जन अभिनेता को जोरदार तमाचा जड़ दिया था,
इस अभिनेत्री की अदाकारी ऐसी कि भारत सरकार ने इनके नाम पर भारतीय डाक टिकट जारी किया तो वहीं फोब्स ने इनको 25 सबसे सफल अभिनय परफॉर्मेंस की लिस्ट में जगह दी और क्या है राज इनके मरने के बाद इनकी भटकती आत्मा का बताएंगे और भी बहुत कुछ इस अभिनेत्री के बारे में आप बने रहिए हमारे साथ वीडियो के अंत तक फल तुम्हें भेजा है खत में फूल नहीं आज हम एक ऐसी अभिनेत्री के बारे में बात करने जा रहे हैं जो किसी परिचय की मोहताज नहीं है भारतीय हिंदी सिनेमा की सबसे सौम्य अभिनेत्रियों में इनका नाम गिना जाता है,
14 साल की उम्र में बॉलीवुड में डेब्यू तो वहीं 16 साल की उम्र में मिस इंडिया का खिताब इतनी कम उम्र में दोनों उपलब्धियां हासिल करना हर किसी के लिए बस एक सपने जैसा है जब लड़कियों को लेकर लोगों की सोच अलग होती थी तब इस अदाकारा ने बोल्डनेस का वो तड़का लगाया कि जिसके लिए इनको आज तक याद किया जाता है यह अभिनेत्री कोई और नहीं बल्कि पद्मश्री विजयता फिल्म फेयर की क्वीन के ताज से सजी नूतन जी की हम बात कर रहे हैं चंदन सा बदन चंचल चितवन धीरे से हम आपको नूतन जी की जिंदगी और उनके सुख दुख के बारे में बताएं उससे पहले आइए नजर डाल लेते हैं इनके परिवार पढ़ाई लिखाई और इनके शुरुआती फिल्मी सफर के बारे में वो चांद खिला वो तार हसे ये रात अजब मतवारी नमस्कार आप सभी का स्वागत है,
बॉलीवुड नोवल के इस एपिसोड में जिंदगी हर कदम इत नई जंग है नूतन का जन्म 4 जून 1936 को मुंबई में एक पढ़े-लिखे संपन्न फिल्मी परिवार में हुआ इनके पिता श्री कुमार सेन समर्थ थे जो हिंदी सिनेमा में फिल्म निर्देशक और कवि हुआ करते करते थे तो वहीं इनकी मां का नाम था शोभना समर्थ शोभना भी 40 के दशक में हिंदी सिनेमा की एक मशहूर उम्दा अभिनेत्री रही हैं तेरे संग संग संग पिया खेल के मैं रंग हाय हाय हाय हुई बदना तो वही नूतन की नानी रतनबाई भी अभिनेत्री और भजन गायिका रही थी नूतन की दो छोटी बहने थी,
तनुजा और चतुरा तो वहीं इनका भाई जयदेव भी है नूतन बचपन में सांवली लंबी और पतली दुबली लड़की थी इसीलिए उनके आसपास के लोग उनको खूबसूरत नहीं मानते थे जिसकी वजह से नूतन अक्सर बचपन में भद्दे भद्दे तानों को सुनती थी नूतन जब मात्र 9 साल की थी तो पहली बार इन्होंने एक फिल्म में बाल कलाकार के रूप में काम किया था फिल्म का नाम था नल दमयंती जिसको खुद इनके पिता ही बना रहे थे नूतन के घर में सभी लोग फिल्मी दुनिया से जुड़े रहे हैं तो लिहाजा इनके उज्जवल भविष्य की जिम्मेदारी इनकी मां शोभना के ऊपर आ गई थी,
नूतन तो एक गायिका बनना चाहती थी इसीलिए वह अक्सर स्टेज पर सिंगिंग करती रहती थी लेकिन इनकी मां इनको एक सफल अभिनेत्री बनाना चाहती थी इसीलिए इनकी मां ने साल 1950 में खुद की निर्देशित फिल्म हमारी बेटी से 14 साल की नूतन को दुनिया से रूबरू कराया हालांकि यह फिल्म चल तो नहीं पाई लेकिन लेकिन नूतन ने इस फिल्म से सबका ध्यान अपनी तरफ जरूर खींचा छोटी सी गुड़िया की लंबी कहानी सुनो छोटी सी इसके बाद नूतन बैक टू बैक तीन फिल्में शबाब हम लोग नगीना में काम किया लेकिन यह तीनों फिल्में भी फ्लॉप हो गई थी,
आपको बता दें कि नूतन की फिल्म नगीना का जब प्रीमियर हुआ तो नूतन भी इसको देखने वहां पहुंची थी नगीना फिल्म को उस दौर में एडल्ट फिल्म का दर्जा मिला था लिहाजा जब नूतन गेट के अंदर जाने लगी तो वहां खड़े चौकीदार ने नूतन को रोक दिया यह कहकर कि यह फिल्म 18 साल के लोगों के लिए है लेकिन नूतन चौकीदार से कहने लगी कि वह भी इस फिल्म की हीरोइन है चौकीदार ने उनकी इस बात पर यकीन नहीं किया और इनका हाथ पकड़कर उस हॉल से बाहर कर दिया मैं खुद गई थी अकेली और इस प्रकार नूतन खुद की फिल्म के प्रीमियर से बाहर हो गई,
मुझे इसकी कोई परवाह नहीं शुरुआती फिल्म के फ्लॉप होने के बाद इनकी मां ने इनको भारत देश के बाहर स्विटजरलैंड में फिनिशिंग स्कूल चैटन में पढ़ाई के लिए भेज दिया यहां रहकर नूतन ने पढ़ाई की और अपने लुक्स पर काम किया और ठीक एक साल के बाद वह फिर से भारत वापस लौट कर आई और आते ही अपनी मां की मदद से इनको एक फिल्म सीमा के लिए साइन कर लिया गया इस फिल्म में इनके साथ फिल्म एक्टर बलराज साहनी थे साल 1955 में यह फिल्म रिलीज हुई और यह फिल्म उस दौर की सुपर डुपर हिट फिल्म साबित हुई तू प्यार का सागर है
तेरी एक इस फिल्म से नूतन को दिल खोलकर तारीफ मिली और अब वही लोग वही रिश्तेदार वही दोस्त जो नूतन को खूबसूरत नहीं मानते थे वह अब नूतन को अपनी पलकों पर बैठा रहे थे सीमा फिल्म के लिए नूतन को पहली बार फिल्म फेयर का बेस्ट एक्ट्रेस का अवार्ड भी मिला इसके बाद तो की जिंदगी दौड़ पड़ी और इन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा वो चांद खिला वो तार हसे ये रात अजब मतवारी और हीर बारिश लाइट हाउस बसंत छबीली कभी अंधेरा कभी उजाला अनाड़ी जैसी कई फिल्मों में काम किया और अपने दम से हिंदी सिनेमा का मान बढ़ाया दिल की नजर से नजरों की दिल से ये बा क्या है नूतन एक जबरदस्त अभिनेत्री तो थी
ही साथ में यह संगीत में भी अपनी रुचि रखती थी इसलिए नूतन ने अपनी खुद की कुछ फिल्म जैसे हमारी बेटी छबीली पंग गेस्ट में खुद की आवाज में गाने भी गाए हैं आप अभी इश्क की तहजीब से नूतन जिस दौर में फिल्मों में काम कर रही थी उस समय बहू बेटियों को पर्दे में रहना पड़ता था उनको अपने अंग प्रदर्शन की इजाजत कतई नहीं थी तो ऐसे में नूतन ने साल 1958 में दिल्ली का ठक फिल्म में पहली बार स्विम सूट पहन डाला बेहद बोल्ड अंदाज में दिखी नूतन सबको हैरान कर रही थी वह ऐसा करने वाली भारत की पहली अभिनेत्री थी
जहां एक तरफ इनके इस बोल्ड कदम की तारीफ हो रही थी तो समाज के कुछ लोग नूतन का विरोध और आलोचना भी कर रहे थे इसकी कोई परवाह नहीं स्विम सूट का रोश अभी शांत भी नहीं हुआ था कि नूतन फिल्म बारिश में एक बार फिर से बोल्ड सीन देकर पहले से लगी आग को उन्होंने और भड़का दिया जिसके बाद नूतन काफी चर्चाओं में रहने लगी थी इसके बाद नूतन की गिनती टॉप एक्ट्रेसेस में होने लगी मधुबाला मीना कुमारी माला सिन्हा नर्गिस वै जंती माला वहीदा रहमान यह सभी अभिनेत्री भी उस समय नूतन से पीछे हो गई थी
ए मेडी मैड मैड माने पागल ओ वाय बॉय बॉय माने लड़का अरे मतलब इसका तुमका नूतन ने सोने की चिड़िया और सुजाता फिल्म में बेहद शालीनता वाला किरदार निभाकर अपनी बोल्डनेस वाली छवि को तोड़कर सभी के दिलों में जगह बनाई नूतन कामयाबी के शिखर पर थी और नूतन ने धर्मेंद्र बलरा सहनी राजेंद्र कुमार शमी कपूर राज कपूर देवानंद सुनील ल दत्त मनोज कुमार और अमिताभ बच्चन जैसे बड़े सभी सुपरस्टार्स के साथ काम किया माना जनाब ने पुकारा नहीं क्या मेरा साथ भी हम आपको यहां पर यह बता दें कि शमी कपूर और नूतन बचपन से ही अच्छे दोस्त थे
शमी कपूर और नूतन की बचपन की दोस्ती प्यार में बदल गई और यह दोनों शादी करना चाहते थे लेकिन नूतन की मां को यह रिश्ता पसंद नहीं था इसीलिए यह कहानी अधूरी रह गई मैं जिसे चाहती हूं शायद आप उसे पसंद ना करें तो वहीं दूसरे सुपरस्टार राजेंद्र कुमार भी नूतन के प्यार में पागल थे व भी नूतन से शादी करना चाहते थे तो तुम एक एक्ट्रेस से शादी करोगे बाबू जी वो एक अच्छी और शरीफ लड़की है
और इसी उम्मीद में वह नूतन की मां से उनका हाथ मांगने पहुंच गए लेकिन नूतन की मां ने उनका हाथ तो नहीं दिया बल्कि राजेंद्र कुमार को काफी भला बुरा बोलकर जलील किया और घर से निकाल दिया मैं कहती हूं मेहरबानी करके आप यहां से चले जाइए नूतन की मां को फिल्म एक्टरों का यूं नूतन की तरफ आकर्षित होना नहीं भाया और साल 1959 में इनकी शादी भारतीय नौसेना के लेफ्टिनेंट कमांडर रजनीश बहल से कर दी गई शादी के कुछ दिन पहले ही नूतन की फिल्म सुजाता रिलीज हुई थी जो एक जबरदस्त हिट फिल्म थी और इस फिल्म के लिए नूतन को अपना दूसरा बेस्ट एक्ट्रेस का फिल्म फेयर अवार्ड भी मिला था शादी के बाद नूतन फिल्मों में काम नहीं करना चाहती थी
साल 1960 में फिल्म निर्माता विमल रॉय नूतन के पास एक फिल्म बंदनी का ऑफर लेकर गए लेकिन नूतन ने इस फिल्म को करने से मना कर दिया क्योंकि वह गर्भवती थी और फिल्मों से दूर रहना चाहती थी लेकिन पति के कहने पर नूतन ने हां कर दी फिर साल 1961 में नूतन ने एक बेटे को यानी मोहनीश बहल को जन्म दिया और साल 1963 में इनकी फिल्म बंदिनी रिलीज हुई यह फिल्म सुपर डुपर बंपर हिट हुई बॉलीवुड की ऑल टाइम क्लासिक बुक में इस फिल्म को शुमार किया गया फोब्स बीबीसी आउटलुक जैसी सभी मीडिया नेटवर्क नूतन की इस एक्टिंग को वर्ल्ड की बेस्ट एक्टिंग परफॉर्मेंस मानते हैं