दिल्ली हाईकोर्ट से राजपाल यादव को अंतरिम जमानत दे दी गई है। क्या है यह पूरा मामला? हमारे साथ बात करने के लिए मौजूद हैं शिकायत्तकर्ता के वकील अवनीत सिंह सिक्का साहब। सर, यह पूरा मामले की शुरुआत जो है वो कहां से होती है और आज किन परिस्थितियों, किन शर्तों के साथ दिल्ली हाईकोर्ट ने यह जमानत दी है और यह नियमित जमानत नहीं अंतरिम जमानत है। जी देखिए राजपाल यादव जी ने हमारे क्लाइंट से ₹5 करोड़ उधार लिए थे
अपनी फिल्म अता पता लापता के लिए। उसको उन्होंने चुकाया नहीं और मल्टीपल सप्लीमेंट्री एग्रीमेंट किए कि मैं चुका दूंगा चुका दूंगा चुका दूंगा। अल्टीमेटली फाइनली उन्होंने सात चेक डेढ़ डेढ़ करोड़ सातों चेक डेढ़ करोड़ के बाउंस हो गए। करकडुमा कोर्ट से उनको सजा हुई। उस सजा को उन्होंने पहले एपलेट कोर्ट में चैलेंज किया। फिर डिवीजनल कोर्ट में चैलेंज किया और फाइनली आज हम हाई कोर्ट तक आ चुके हैं।
हाई कोर्ट में उन्होंने न्यूमरस अंडरटेिंग दी पैसा डिपॉजिट करने की पर उन्होंने पैसा डिपॉजिट नहीं किया। बीच में उन्होंने ₹75 लाख जमा कराए लेकिन उसके बाद वह गायब हो गए। कोर्ट ने उनको रिपीटेडली बोला कि आपकी अंडरटेिंग है ₹25 करोड़ जमा कराने की। आप वो जमा कराइए। आज उनकी सस्पेंशन की एप्लीकेशन लगी थी ना कि इंटेरिम सस्पेंशन की अंतरिम जमानत। तो कोर्ट ने कहा कि आप सस्पेंशन तो भूल जाइए क्योंकि आपकी भतीजी की शादी है।
इंटेरिम सस्पेंशन पे आर्गुमेंट कर सकते हैं। पिछली डेट पे उन्होंने मेरिट्स पे आर्गुमेंट करना शुरू किया। बट कोर्ट ने कंसीडर किया हमारे आर्गुमेंट्स कि उनकी कंडोनेशन ऑफ़ डिले की एप्लीकेशन है और जब तक कॉडिलेशन पे आर्म नहीं होगा मेरिट्स पे आर्गुमेंट नहीं हो सकते। तो आज उन्होंने मेरिट पे आर्गुमेंट किया ही नहीं। इस चीज की हमें भी उम्मीद नहीं थी। लेकिन वो खुद ही एक ₹1.5 करोड़ का फिक्स्ड डिपॉजिट ले आए।
एफडीआर ले आए और उन्होंने हमें कोर्ट को दिखाया कि यह ₹1.5 करोड़ का फिक्स्ड डिपॉजिट है। ₹75 लाख हम जमा कर चुके हैं। और ₹25 लाख का एक डिमांड ड्राफ्ट भी लिया जो कि रजिस्टर जनरल साहब के नाम का था। कोर्ट को मैंने ऑब्जेक्शन यह उठाया कि यह ₹1.5 करोड़ का फिक्स्ड डिपॉजिट जो है यह राजपाल यादव जी के नाम का है। हमारा कोई फायदा नहीं। ना ही हमारा क्लाइंट इसे एप्रोप्रिएट करा सकता है ना ही इस पैसे का यूज़ कर सकता है,