सिर्फ 9 मिनट दूर रहते थे महामानव ? गूगल ने न्यूयॉर्क का घर पकड़वाया!..

जेफरी एपस्टीन एक ऐसा नाम जिसने दुनिया की सत्ता, धन और प्रतिष्ठा के चमकदार मुखरटे के पीछे छिपे घिनौने सच को उजागर कर दिया। एस्टीन कोई साधारण व्यक्ति नहीं था। वह अमेरिकी अरबपति, फाइनेंसर और तथाकथित पावर ब्रोकर था। लेकिन असल पहचान नाबालिक लड़कियों के यौन शोषण के आरोपों से जुड़ा एक कुख्यात अपराधी। उसके घरों, उसके विमान और उसकी पार्टियों की सूची में राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, अरबपति, राजकुमार और उद्योगपति सबके नाम सामने आए। सफेद कॉलर, सूट पहनने वाले सभ्यता और नैतिकता का पाठ पढ़ाने वाले लोग एक फाइल में एक्सपोज हो गए। अब वही फाइल भारत तक आ गई है और भारत में आते ही मामला सिर्फ कानूनी नहीं बल्कि राजनीतिक तूफान बन गया है।

संसद में विपक्ष लगातार सरकार से सवाल पूछ रहा है। क्या भारतीय नाम भी इस नेटवर्क से जुड़े थे? क्या कोई मंत्री नेता या अधिकारी एप्सन से मिला था? और अगर मिला था तो क्यों? और कैसे? लोकसभा में नेता विपक्ष राहुल गांधी ने जब कुछ नाम लेना शुरू किया तो सत्ता पक्ष में हड़कंप मच गया। आपत्ति शोर विरोध और फिर स्पीकर की चेतावनी यानी नाम लेना भी अपराध बन गया। लेकिन राजनीति की विडंबना देखिए। जो लोग सदन में नाम लेने पर नाराज थे वही लोग शाम को प्रेस कॉन्फ्रेंस में कह रहे थे हां हमारी तीन-चार बार मुलाकात हुई थी। मतलब संसद में नाम लेना गलत। लेकिन प्रेस कॉन्फ्रेंस में नाम कबूल करना सही और यहीं से शुरू होता है सबसे दिलचस्प अध्याय।

बीजेपी के वरिष्ठ नेता और मंत्री हरदीप सिंह पुरी का मामला। पूरी जी ने स्वीकार किया कि उनकी एबस्टीन से तीन-चार बार मुलाकात हुई। अब सवाल यह नहीं है कि मुलाकात हुई या नहीं। सवाल यह है कि किससे? कब और किस संदर्भ में? सोशल मीडिया ने इस मामले को व्यंग का उत्सव बना दिया है। यूज़र्स ने हरदीप सिंह पुरी का 13 मार्च 2017 का पुराना ट्वीट निकाल लिया। उसमें उनकी लोकेशन और एस्टीन के घर की दूरी महज 9 मिनट की ड्राइव पर है। कई यूज़र्स लिख रहे हैं कि एस्टीन का न्यूयॉर्क में 71 स्ट्रीट स्थित आलीशान घर और पूरी का न्यूयॉर्क में 56 स्ट्रीट पर स्थित आवास दोनों के बीच की दूरी मात्र 9 मिनट है और खुद पूरी के अनुसार वे उससे तीन-चार बार मिले थे।

यूज़र्स पूछ रहे हैं कि पूरी जी 9 मिनट की दूरी में तीन-चार बार मुलाकातें तो क्या वह आकस्मिक टकराव था या रेगुलर नेटवर्किंग एक छोटी सी ड्राइव और सीधे उस व्यक्ति के घर जिसे दुनिया अब शैतान पीडिएटर और सेक्स ट्रैफिकर कहती है। यह व्यंग नहीं सवाल है और लोकतंत्र में सवाल पूछना अपराध नहीं होता। सत्ता पक्ष कह रहा है। यह सब बेकार का राजनीतिक मुद्दा है। लेकिन सवाल यह है कि अगर सब बेकार है तो नाम लेने पर इतनी भगदड़ क्यों? अगर सब सामान्य था तो संसद में इतना शोर क्यों? एप्सन कौन था? यह समझना जरूरी है। वह सिर्फ एक अमीर आदमी नहीं था। वह एक ऐसा व्यक्ति था जिसके नेटवर्क में सत्ता, मीडिया, उद्योग और ग्लैमर सब जुड़े थे। उसकी पार्टियों में जाना, उसके जेट में उड़ना, उसके घर में रुकना सिर्फ दोस्ती नहीं बल्कि सत्ता और प्रभाव के नेटवर्क का हिस्सा माना जाता है।

वहीं इस मामले पर सीनियर जर्नलिस्ट रवश कुमार सोशल मीडिया एक्स पर पोस्ट करते हुए लिखते हैं। इतनी दूरी तो उस शहर में लोग सुबह की कॉफी के लिए टहल लेते हैं। क्या पता नुक्कड़ पर भी रोज मिलना होता हो। एपस्टीन महापापी है। यह उस लेवल का अपराधी नहीं है जिसका फोटो चुनावों से पहले एयरपोर्ट पर या मंच पर प्रधानमंत्री के साथ वायरल हो जाता है और कुछ नहीं होता। राहुल गांधी के भाषण को ईगो पर लेने की आदत के कारण ही फंस गए हैं। नहीं तो इतने दिनों से प्रेस में कहां आ रहे थे?


गोयल और जयशंकर ने कितना अच्छा कवर किया था। पीयूष गोयल और जयशंकर ने कितना अच्छा कवर किया था हरदीप सिंह पुरी को। आपस में ही दोनों इनसे पूछो उनसे पूछो करते रहे। जबकि रूस से तेल का सवाल तो पेट्रोलियम मंत्री का था। अब राहुल के कारण वे खुद मैदान में आ गए। तो इसमें गोयल और जयशंकर का क्या कसूर? वहीं विपक्ष इस पूरे मुद्दे पर सरकार को घेर रहा है। राहुल गांधी सवाल पूछ रहे हैं। कांग्रेस, वामपंथी दल और अन्य विपक्षीय नेता जवाब मांग रहे हैं और सत्ता पक्ष में भगदड़ मची हुई है। कोई कह रहा है नाम मत लो। कोई कह रहा है यह निजी मामला है।

कोई कह रहा है विपक्ष राजनीति कर रहा है। संसद में विपक्ष की मांग यही है कि मंत्री हरदीप सिंह पुरी को इस्तीफा दे देना चाहिए। फिलहाल आपको बता दें कि सोशल मीडिया का व्यंग अपनी जगह है लेकिन असली मुद्दा गंभीर है। यह पारदर्शिता का मामला है। यह सत्ता की जवाबदेही का मामला है। अगर कोई मंत्री कहता है कि वह तीन से चार बार एब्सस्टीन से मिला है तो जनता को यह जानने का अधिकार है कि किस संदर्भ में किस उद्देश्य से और किस परिणाम के साथ यह मामला सिर्फ हरदीप सिंह पुरी का नहीं है। यह उस सिस्टम का है जहां सत्ता से जुड़े लोग सवालों से बचते हैं

और सवाल पूछने वालों को देशद्रोही या राजनीति बताते हैं। फिलहाल इस खबर में इतना ही है और सोशल मीडिया पे जिस तरह से यह बताया जा रहा है कि एस्टीन का जो घर था और जहां पे हरदीप सिंह पुरी जब जाते थे रुकते थे वो बस महज 9 मिनट की ही दूरी पर था। उसको लेकर के जो सवाल हैं वह सोशल मीडिया पर अब पूछे जा रहे हैं। फिलहाल लगातार एब्सस्टीन मामले में नए-नए खुलासे सामने आ रहे हैं

और अब खुद हरदीप सिंह पुरी जी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस करके यह बता दिया कि हां हमारी मुलाकात हुई थी और हम कई मेल जो है वो सार्वजनिक हैं। इसके बाद और यह मामला अब खुलासा आ चुका है जो कि उन्होंने खुद ट्वीट किया था। पुराना ट्वीट है। अब लोग उस ट्वीट को रीट्वीट करके सवाल कर रहे हैं। फिलहाल इस खबर में इतना ही है। आपको क्या लगता है इस तमाम खबर पर? आप क्या सोचते हैं? आपकी क्या राय है? आप अपनी राय हमें कमेंट्स बॉक्स के जरिए जरूर बताएं.

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