अमेरिका के बाद इटली ने किया चौंकाने वाला खुलासा! जानबूझकर किया था प्लेन हादसा?..

अहमदाबाद से लंदन जा रही एयर इंडिया की फ्लाइट, एक भीषण हादसा, सैकड़ों जिंदगियां और अब एक चौंकाने वाला दावा। इटली की एक मीडिया रिपोर्ट के अनुसार जांच में अब तक किसी तकनीकी खराबी के सबूत नहीं मिले हैं और कॉकपेट वॉइस रिकॉर्डिंग में फ्यूल स्विच बंद करने की बात सामने आई है। लेकिन इसका क्या मतलब है कि पायलट ने जानबूझकर ऐसा किया? आज हम इस पूरे मामले पर आपको बताते हैं तथ्य और संभावनाओं के साथ। बने रहिए आप वीडियो के अंत तक। अहमदाबाद की उस भयावह सुबह को देश कभी नहीं भूल सकता।

एयर इंडिया की फ्लाइट 171 बोइंग 787 ड्रीम लाइनर उड़ान भरते ही आग का गोला बन गया। 260 जिंदगियां पल भर में खत्म। एक हॉस्टल पर गिरा विमान, छात्र, यात्री, परिवार सब कुछ राख। और अब एक चौंकाने वाला दावा इटली के अखबार के मुताबिक कोरियर डेला सेरा के मुताबिक भारतीय जांचकर्ता अपने रिपोर्ट में यह कह सकते हैं कि यह कोई तकनीकी खराबी नहीं थी बल्कि जानबूझकर किया गया कांड था। सवाल उठता है अगर यह सच है तो सच अब तक क्यों छुपा रहा है? यानी क्यों छुपाया गया? सरकार ने पहले कहा तकनीकी गड़बड़ी। फिर कहा जांच जारी है।

अब विदेशी मीडिया कह रहा है कि इंजन का फ्यूल जानबूझ करके बंद किया गया। ऐसा कहा जा सकता है रिपोर्ट में। तो क्या देश को सच बताने का जिम्मा विदेशी अखबारों का है। कॉकपेट की वह रिकॉर्डिंग ब्लैक बॉक्स में दर्ज आवाज एक पायलट पूछता है तुमने फ्यूल क्यों बंद किया? दूसरा कहता है मैंने नहीं किया तो फिर किसने किया? हवा ने, ऑटो पायलट ने या फिर कोई ऐसा सच जिसे सिस्टम बोलना नहीं चाहता। अगर रिपोर्ट में कहा जा रहा है कि कमांडर कैप्टन सुमित सवरवाल पर शक है। ऐसा हो सकता है। उनके डिप्रेशन की बातें फैलाई गई। उनके निजी जीवन की खबरें उछाली गई। लेकिन सवाल यह है कि क्या यह किसी व्यक्ति पर दोष डालकर सिस्टम को बचाने की कोशिश है? अगर पायलट मानसिक रूप से अस्थिर था अगर डिप्रेशन में था तो उसे उड़ान की अनुमति किसने दी? मेडिकल क्लीयरेंस किसने दी?

एयरलाइन, डीजीसीए या मंत्रालय? यह केवल पायलट की जिम्मेदारी थी या पूरे सिस्टम की? 260 यात्री? सोचिए क्या यह सिर्फ एक पायलट के भरोसे वहां पर बैठे थे? क्या डीजीसीए के भरोसे नहीं था?
अगर अब हम एक पायलट के ऊपर दोषारोपण करें तो यह सिस्टम की नाकामी नहीं तो और क्या है? और अब आते हैं एक और रिपोर्ट पर जो लंदन के अखबार द इंडिपेंडेंट की एक एयर इंडिया रिपोर्ट आती है। जी हां, आपको बताते हैं कि एक और अखबार है लंदन की द इंडिपेंडेंट। उसने खुलासा किया है। उसमें लिखा गया है कि Air इंडिया ने हादसे में जान गवाने वालों के परिजनों को अतिरिक्त मुआवजे के बदले केस करने का अधिकार छोड़ने का प्रस्ताव दिया है। एयरलाइन परिवारों को अतिरिक्त ₹1 लाख की अंतिम राशि देकर समझौते की पेशकश कर रही है।

कुछ मामलों में यह रकम ₹ लाख तक है। परिवारों को यह शर्त माननी होगी कि भविष्य में हादसे से जुड़ा दावा नहीं करेंगे और सभी कानूनी जिम्मेदारियों से कंपनी को मुक्त करेंगे। यह छूट किसी भी देश या कोर्ट में लागू रहेगी। हालांकि 130 पीड़ितों के परिवारों की लीगल टीम ने इसका विरोध किया है। अब आते हैं एक रहस्यमय सवाल पर। देश ने देखा कि कैसे कुछ संवेदनशील मामलों में अचानक मौतें, संदिग्ध परिस्थितियां और फाइलों की खामोशी सामने आती है। जब भी कोई बड़ा सच उजागर होने वाला होता है तो कोई ना कोई क्लोज केस बन जाता है।

तो क्या इस हादसे में भी कोई ऐसा सच था जो सिस्टम के लिए असहज था? क्या किसी दबाव, किसी लापरवाही, किसी नीति की विफलता को ढकने के लिए कहानी को मानवीय भूल की फाइल में डाल दिया गया। सरकार हर बार कहती है जांच चल रही है, रिपोर्ट आएगी, सब कुछ पारदर्शी है। लेकिन सवाल यह है कि पारदर्शिता में इतना धुआं क्यों है? और धुएं में इतना राज क्यों है?
यह केवल विमान दुर्घटना नहीं है। यह सिस्टम की दुर्घटना है। यह जवाबदेही की दुर्घटना है। यह सत्ता की संवेदनहीनता की दुर्घटना है। और सबसे बड़ा सवाल अगर यह जानबूझकर किया गया कृत था तो क्या किसी व्यक्ति को बलि का बकरा बनाकर मामला बंद कर दिया जाएगा? क्या असली जिम्मेदार कभी सामने आएंगे या फिर फाइलों में लिखा जाएगा मानवीय भूल और कहानी खत्म। अजीत पवार जैसे मामलों में भी देश ने देखा है कि कैसे सवाल उठते हैं और फिर खामोशी छा जाती है।

कैसे सच की जगह नैरेटिव बनाया जाता है? तो क्या इस विमान हादसे में भी वही हो रहा है? क्या जनता को एक तैयार कहानी सुनाई जा रही है या सुनाई जाएगी? आज सवाल पायलट पर नहीं है। सवाल सरकार पर है। सवाल सिस्टम पर है। सवाल जवाबदेही पर है। क्योंकि जब 260 व्यक्ति मरते हैं तो दोष केवल एक स्विच का नहीं होता है। एक आदमी का नहीं होता है। दोष उस सिस्टम का होता है जिसने उस स्विच को चलाने की अनुमति दी। सरकार कहेगी यह संवेदनशील मामला है। लेकिन संवेदनशीलता का मामला चुप्पी नहीं होता। संवेदनशीलता का माम मतलब होता है सच, जवाब और न्याय। देश जानना चाहता है कि क्या यह हादसा था या त्रासदी के पीछे कोई अनकही कहानी?

क्या यह मानवीय भूल थी या सिस्टम की चूक? और सबसे अहम क्या कभी सरकार सच पूरी तरह बताएगी? क्योंकि सवाल सिर्फ विमान के गिरने का नहीं है। सवाल लोकतंत्र के भरोसे के गिरने का है। फिलहाल इस खबर में इतना ही है। आपको क्या लगता है इस खबर पर और आपको क्या लगता है इटली के अखबार ने जो खुलासा किया है उस पर आप क्या सोचते हैं? जो उसने खबर छापी है उस पर आपकी क्या राय है? अपनी राय हमें कमेंट्स में कमेंट्स के जरिए जरूर बताएं.

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