पायलट शांभवी पाठक ने हादसे से पहले दादी से क्या कहा था?..

महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम अजीत पवार का पुणे के बारामती में एक विमान हादसे में निधन हो गया। इस हादसे में अजीत पवार सहित कुल पांच लोगों की मौत हो गई। अजीत पवार जिस चार्टेड प्लेन में सवार थे उस प्लेन को ग्वालियर की रहने वाली 25 साल की श्यामवी पाठक उड़ा रही थी। श्यामवी पाठक ग्वालियर की रहने वाली थी। उनका जन्म ग्वालियर में ही हुआ और उनका बचपन भी वहीं बीता। उनकी दादी मीरा पाठक को श्याम भबभी ने मुंबई से सुबह 6:36 पर मैसेज भेजा और उसमें लिखा था गुड मॉर्निंग दादा। इसके बाद श्याम भवी अपनी फ्लाइट पर पहुंच गई और 8:46 पर प्लेन क्रैश हो गया। करीब 11:00 बजे मिली क्योंकि मैंने न्यूज़ वगैरह देखी नहीं थी।

मुझे तो नहीं मालूम। मेरे छोटे बेटे ने ऐसे बताया कि यह हो गया है। और वो इन्हीं की कंपनी का चीनी की कंपनी का ही कोई एयरक्राफ्ट था। जरा पता करो भाई से। मेरा छोटा बेटा हैदराबाद में है तो उसने बोला तो फिर पर तभी मुझे थोड़ा एकदम दहशत हुई क्योंकि कल ही रात को श्याम बेबी के पापा ने मैं पूछती रहती थी कहां हो तुम कहां फ्लाई कर रहे हो तुम वो कहां है चीनी कहां है तो उन्होंने कहा वो चीनी कल मुंबई चली गई है आपकी लास्ट मुलाकात कब हुई थी उससे बताया ना 12 अक्टूबर को 12 अक्टूबर आपके साथ कितना समय बताया साहब ने?

अब वो समय मतलब कितने समय आपके साथ रही वो यहां शिक्षा दीक्षा तो शिक्षा नहीं तो वो भैया वो महाराज को रहते थे। हम यहां रहते हम तो 98 में यहां इस घर में मेरे हस्बैंड रिटायर हुए तभी हम आ गए थे यहां पे। उसके बाद उनके मेरे बेटे की पोस्टिंग जब आई तब वो तब से वो यहां फिर वो 200 में उसका बर्थ हुआ तब से वो यहां मतलब कुछ साल रहे फिर वो कारगिल चले गए तब बीच में यहां वो आ गई नहीं तब तो वो पैदा ही नहीं हुई थी कारगिल के समय तो शी वाज़ नॉट बोर्न तो आचार्य साभवी के मातािता साभवी के माता-पिता कहां रहते हैं अभी?

दिल्ली दिल्ली रहते हैं। क्या आपको लगता था कि सुबह से वो पायलट बनना चाहती है? उसकी बड़ी इच्छा रही होगी। ये तो अब इतना बात तो मुझे नहीं मालूम है कि भाई आजकल कहां बच्चे से इतनी बात होती है कितनी होती है फोर्थ और फिफ्थ तक यहां हां फोर्थ फिफ्थ तक यहां पढ़ी फिर दिल्ली लोधी रोड पे बाल भारती स्कूल है ना एयरफोर्स का ही वहां पढ़ते थे कितने भाई बहन है ये लोग दो एक भाई छोटा भाई है छोटा भाई अच्छा ये तो पता होगा कब से ये जॉइ जॉइ किया हुआ था कब से नौकरी कर रही थी ये नौकरी शायद पास वो वहां से न्यूजीलैंड से तो आ गई थी कोविड के समय पर कोविड के समय तो कुछ वो नहीं था ना काम मतलब वही था सर्विस कहां करते थे वो शायद 21 से कर रही थी वहां पांच साल हो गए

क्या एज रही होगी शभवी की भी 25 25 वहीं शंभवी पाठक की मौत की सूचना मिलते ही उनके पड़ोसी भी उनकी दादी के पास पहुंच गए। पड़ोसी महिला ने बताया कि वो बहुत चंचल स्वभाव की थी और वो जब ग्वालियर आई थी तो उनसे मिलनाजुलना होता था और खूब बातें करती थी। हां जी जब आती थी तो मिलती थी देखते थे उसको अभी अंकल नहीं रहे तो अक्टूबर में उनका वार्षिक श्राप था तो उसमें आई थी तो दो दिन रहे वो लोग यहां अभी जब मोहन भागवत जी को लेके आई थी तो फिर उनको छोड़ के फिर यहीं आ गई थी

वो दादा दादी को मिलने के लिए तो दो ढाई घंटा यहां आराम करके फिर चली गई थी आप सामने रहती हैं हां मैं बिल्कुल सामने इनके यहां घर में कौन-कौन रहता है यहां पे अभी आंटी आंटी अभी अंकल हां हां अभी अच्छा आपको कुछ वाकई ऐसा याद हो जो साहब अभी यहां आती थी और आपके साथ कुछ समय बिताया हो। नहीं ऐसा नहीं बस केवल मिलने के लिए इतना इतना बच्चे लोग हैं ना बच्चे लोग आजकल कहां हो?

अच्छा इनके फादर भी एयरफोर्स में एयरफोर्स में थे हम वो यही पोस्टिंग की हुई है। हां इधर इधर थी इसके बाद दिल्ली चले गए थे। हां फिर बस फिर तो अच्छा उसकी शिक्षा दीक्षा भी यहां पढ़ाई वगैरह यहां करी है उसने कुछ हां फोर्थ फोर्थ फिफ्थ तक मेरे समझ से महाराजपुरा में करी उसके बाद दिल्ली में अच्छा हां वो दिल्ली चले गए थे तो दिल्ली में बाकी उसने ये इसका कोर्स किया जो अपने इसके जो पायलट का कोर्स वो न्यूजीलैंड से किया उसने फिर एग्जाम देने के लिए हर समय लंदन जाती रहती थी ना वो हर साल तो आपकी मुलाकात भी अक्टूबर में हुई थी?

हां, अभी अक्टूबर में हुई थी हमारी मुलाकात। स्वभाव से कैसी थी कुछ?
बहुत अच्छी थी। बहुत बढ़िया। मिलनसार थी। तो नहीं तो ऐसा कौन आता है मिलने के लिए?
दो घंटे के लिए आ रहा है। तो चलो भाई मिलने के लिए चलो। उनके पास टाइम ही कहां रहता था पर वो आती थी मिलने के लिए। चलो उषा आंटी से मिलने। एक और घटना की सूचना आपको। अभी 11:00 बजे इनके छोटे बेटे का फोन आया। तो उसने बोला मम्मी ऐसीऐसी बात है और वही कंपनी का वो लग रहा है मेरे समस्या चीनी इसी में फिर उन्होंने अपने बड़े बेटे को फोन किया फिर बड़े बेटे ने फिर उस समय तो बिजी रहा होगा पर उसने देखा होगा

फिर उसने फोन किया फिर उसने बताया कि उसका फोन नहीं लग रहा है बार-बार फोन कर रहा हूं रीचेबल रिचेबल आ रहा है उसका फोन अच्छा घर में उसका सब लोग चीनी के नाम से चीनी हां घर में चीनी चीनी बोलते थे उसको ऐसे संभव है उसका नाम पायलट का जो उन्होंने चुना था वो किससे इंस्पायर वो अपने पापा से हुआ होगा ना पापा उसके पायलट ही थे तो उनके दादा जी दादा जी विंग कमांडर थे दादा उनके विंग कमांडर हां हां जी मतलब पूरी फैमिली लग पायलट ही थे हम वो ग्राउंड में थे वो चलाते थे

जो आज हादसा हुआ जिसमें एयर क्रैश में चार लोगों की मौत हो गई जिसमें कि पायलट की भी जान चली गई और साथ में अजीत पवार जी जो कि इतने बड़े नेता रहे हैं और काफी काफी मतलब एकदम से यह हादसा हुआ। सबको चौंका दिया और यह सिर्फ इस बार का हादसा नहीं है। ऐसे पहले भी सर कई लोगों को हमने खोया है इस तरह के एयर क्रैश में। सर इसको किस तरह से आप देखते हैं? क्या टेक्निकल एरर्स हो सकते हैं और क्या सब किया जाए जिससे किस तरह के हादसों को फ्यूचर में टाला जा सके?
देखिए मैं ये बहुत ही दुखद हादसा है और इस एयर क्रश में कैप्टन सुमित कपूर जिनको मैं पिछले 20 सालों से जानता था एयर सहारा के दिनों से और बहुत एक्सपीरियंस्ड पायलट हैं थे और भगवान उनकी आत्मा को शांति दे और जितने लोगों ने अपनी जान गवाई है उनकी आत्मा को शांति दे।

यह एक्सीडेंट क्यों हुआ? यह तो जांच का विषय है। लेकिन जो रिपोर्ट हमारे पास है उससे यह पता चलता है कि ये जहाज बॉम्बे से बारामती जब जा रहा था और पहली बार जब ये बारामती में उतरने की कोशिश कर रहा था तो किसी कारणवश उस प्रयास को रोक कर करके एयरक्राफ्ट वापस उड़ा। बताते हैं रिपोर्ट यह है कि विजिबिलिटी कंडीशंस बहुत मार्जिनल थी। मतलब कि क्लाउड्स और फग और रेन का थोड़ा वहां पे शायद इंपैक्ट रहा होगा। जिसकी वजह से वहां की विजिबिलिटी जो है वो कम थी। दूसरे बार जब ये अप्रोच कर रहा था और रनवे से पहले ये टच डाउन करके क्षतिग्रस्त हो गया। क्या यह सिर्फ खराब मौसम के कारण हुआ या खराब मौसम के साथ पायलट एरर हुआ या खराब मौसम के साथ किसी टेक्निकल एरर की वजह से यह हुआ यह सीबीआर और एफडीआर को जांच करने के बाद ही हम किसी नतीजे पर पहुंचेंगे।

जो बातें हमें मालूम है वह यह है कि पायलट ने किसी तरह का इमरजेंसी डिक्लेअ नहीं किया हुआ था लेकिन उससे यह प्रमाणित नहीं होता है कि कोई टेक्निकल डिफेक्ट्स को वो से वो जूझ नहीं रहा था। ऐसे जो इलेक्शन के माहौल में प्रेशर तो पायलट्स के ऊपर बहुत होता है क्योंकि हजारों की तादाद में लोग अपने प्रिय नेता को देखने के लिए खड़े होते हैं तो एक माहौल बन जाता है। एक प्रेशर बन जाता है कि साहब इस पर्टिकुलर एयरपोर्ट पे लैंड करना है। और कभी-कभी यह व्यवस्था की तरफ से भी बहुत प्रेशर बनता है। तो ये दोनों ही चीज को हमें समझना होगा कि फ्लाइंग जो है यह बहुत ही नॉन फॉरगिविंग मतलब के इसमें जो गलतियां होती हैं या जो हम इसके साथ हम खिलवाड़ नहीं कर सकते हैं।

उड़ान की सुरक्षा के साथ हम किसी भी तरह का खिलवाड़ नहीं कर सकते हैं। और व्यवस्था को भी यह चाहिए कि यह ये जो प्रेशर पायलट के ऊपर इलेक्शन के दौरान बनता है उस चीज को कम रखें और अगर जो वेदर या विजिबिलिटी या मौसम अगर मार्जिनल हो तो यह चीज पायलट को पॉलिटिकल लीडरशिप ही यह बता दे कि जाना कोई बहुत जरूरी नहीं है। अगर मौसम खराब होगा तो वापस आ जाइएगा। इससे क्या होता है कि पायलट के ऊपर से प्रेशर भी कम हो जाता है। यहां पे ऐसा हुआ या नहीं हुआ मुझे नहीं मालूम। लेकिन छोटा एयरपोर्ट है।

वहां पर किसी तरह के इंस्ट्रूमेंट लैंडिंग सिस्टम की व्यवस्था नहीं है। मौसम भी खराब था। तो इन सब चीज को मिलाकर करके इस तरह का हादसा हुआ है। आइंदा ना हो इसके लिए ज्यादा जागरूक रहने की की जरूरत है और खास करके इलेक्शन माहौल में सारे बहुत इंपॉर्टेंट नेता बहुत इंपॉर्टेंट काम पर जाते हैं। लेकिन सबको ये ध्यान रखना चाहिए कि सबसे इंपॉर्टेंट है हमारे लिए सुरक्षा और उसको कभी कोई भी लांघने की प्रया का प्रयास ना सॉरी।

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