सामने आई अजित पवार प्लेन हादसे की असली वजह?..

डबल इंजन वाला यह विमान था। अगर एक इंजन भी अगर फेल हो जाए तो एक इंजन के दम पर वो लैंड कर सकता है। जी बिलकुल बिलकुल दो इंजन का मतलब और अगर नोज़ के बल पर नोज़ के बल पर सीधे प्लेन अगर नीचे गिर रहा है तो इसका क्या संकेत है?

देखिए नोज़ देखिए मैं जब कह रहा हूं कि इसका नोज़ पार्ट जो है वोस हो गया। इसका मतलब नहीं कि नोज़ के बल्ब सीधा गिरा है वो वो साइड ऐसे भी आ सकता है तिरछा भी आ सकता है जिसकी संभावना बहुत ज्यादा है क्योंकि रनवे पास में है जहाज जो है वो डिसेंड करता है ताकि रनवे को देख सके जब तक रनवे दिखता नहीं है कोई भी पायलट लैंड नहीं करता है ये ये सामान्य प्रक्रिया आप लोग भी ये तस्वीर देख पा रहे होंगे ये ये टेल पोर्शन है

उस विमान का तो ये तस्वीर आपको दिखा रहे हैं ये जो लेयर जेट विमान है लेयर जेट 45 ये विमान सिक्स सीटर विमान डबल इंजन वाला ये विमान मुंबई से ये उड़ान भरता है और यह बारामती में इसे लैंड करना होता है। लेकिन बारामती में रनवे पहुंचने से पहले 4 कि.मी. दूर यह विमान क्रैश कर जाता है और इस विमान में सवार सभी यात्रियों की जान चली जाती है। अब ये सिर्फ इस प्लेन का यह टेल पोर्शन ही बचा है।

जांच टीम मौके पर मौजूद है। रेस्क्यू टीम वहां पर मौजूद है। ब्लैक बॉक्स की तलाश की जा रही है। उसके बाद ही साफ हो पाएगा क्योंकि डीजीसी ने कहा है कि हम ब्लैक बॉक्स को तलाशेंगे और जल्द ही जांच करके पता लगाएंगे कि आखिर यह विमान हादसे का शिकार कैसे हुआ। यूके देवनाथ सर इस प्लेन से राजनेता इंडस्ट्रियलिस्ट सभी इस प्लेन से चार्टर्ड प्लेन का इस्तेमाल करते हैं। इसकी मेंटेनेंस तो बराबर दुरुस्त होती होगी और जब ये मुंबई से उड़ान भर रहा होगा।

कम से कम दो बार इसकी तकनीकी रूप से जांच तो जरूर हुई होगी। इसमें कोई शक नहीं है कि जब भी कोई वीआईपी प्लेन उड़ता है, चार्टेड प्लेन उड़ता है इस तरह से एक वीआईपी के साथ तो जो चार्टर कंपनी है वो अपना बेस्ट पायलट, बेस्ट इंजीनियर, बेस्ट मेंटेनेंस क्रू को वहां पर लगाता है। डीजीसीए रूल्स भी बहुत क्लियर हैं कि टेक ऑफ के पहले हम बोलते हैं एफएफएस फर्स्ट फ्लाइट इंस्पेक्शन क्या-क्या किए जाएंगे। जिसमें इसके इंजन, हाइड्रोलिक सिस्टम, न्यूमेटिक सिस्टम, इलेक्ट्रिकल सिस्टम, लैंडिंग सिस्टम सबसे बड़ी बात है जो एयनिक्स है

जो कि लैंडिंग में मदद करते हैं उनकी टेस्टिंग की जाती है। एक और चीज जो मैं बताना चाहता हूं कि इस तरह का विमान अह क्योंकि डिप्टी चीफ मिनिस्टर थे तो आमतौर पे वह टेक ऑफ तभी करेगा जबकि अह डेस्टिनेशन एयरपोर्ट जो है अह वहां से ये रिपोर्ट आ जाती है लैंडलाइन पर या मोबाइल पर या सरकारी चैनल से कि डेस्टिनेशन एयरपोर्ट में सारे लैंडिंग एड्स सर्विसेबल हैं। सारे इंजीनियरिंग सर्विज काम कर रहे हैं। एयर ट्रैफिक कंट्रोल और रेडार दुरुस्त है। विजिबिलिटी दुरुस्त है। क्या होता है यह सारे जो पायलट हैं इनको अच्छी तरह से ट्रेन किया जाता है कि ये हर तरह के सर अभी तो इन संभावनाओं पर ही बात कर रहे हैं सर,

ये भी एक संभावना कुछ लोग ये आशंका जाहिर कर रहे हैं कि हो सकता है कि कोई बड़ा पक्षी आकर टकरा गया हो। लेकिन क्या अगर कोई बड़ा पक्षी आकर लेयर जेट 45 से टकराएगा तो क्या ये स्थिति हो सकती है?
देखिए जेट इंजन में अगर एक बड़ा पक्षी आकर टकराता है तो ऐसा हो सकता है। अह लेकिन lear jet 45 की संरचना ऐसी होती है कि अगर बर्ड हिट की वजह से एक इंजन शट डाउन होता है तो दूसरा इंजन चलता रहता है और पायलट को हमेशा बहुत अच्छी ट्रेनिंग दी जाती है

कि अगर उसका एक इंजन शट डाउन हो गया है बड हीट की वजह से या किसी भी कारण से तो वो तुरंत महज आधे सेकंड के अंदर दूसरे इंजन का जो आरपीएम है यानी थ्रोटलल है थोड़ा बड़ा आपने बहुत इंपॉर्टेंट बात बताई कि अगर एक इंजन बंद भी हो जाए तो दूसरे इंजन के साथ लैंडिंग की जा सकती है लेकिन पांडे साह सर, मैं आपसे एक यह बात ज़रा समझना चाह रही हूं। यह जो तस्वीरें आप देख पा रहे हैं, आपने इतने साल एिएशन में बिताए हैं। आपको ये तस्वीरें देखकर क्या समझ आ रहा है?
क्या खामी रही होगी कि यह प्लेन जो है

वो लैंड नहीं कर पाया और क्योंकि जो हम देख पा रहे हैं वो खेतों में लैंड हुआ है। यह पूरी तरीके से क्रैश हुआ जिसके बाद जो है यह हादसा हुआ। आपको क्या समझ आ रहा है सर ये तस्वीरें देखकर?
देखिए जो तीन एलिमेंट है जिसके आधार पर मेरा जो आंकलन आधारित है वो पहली बात जो तीन फैक्टर है वो ये कि मैंने जैसे कहा कि उस समय विजिबिलिटी इतनी नहीं थी। यानी कि लो क्लाउड की संभावना बहुत रही होगी। देखिए एग्जैक्ट एग्जैक्ट वेदर तो अभी थोड़ी देर बाद जब रिपोर्ट्स आएंगे तो मालूम पड़ेगा

तो जब जैसे मैंने पहला भी जिक्र किया कि जब भी लैंड करता है तो रनवे को जब तक स्पॉट नहीं कर लेता तब तक नहीं होता और लेकिन वो धीरे-धीरे डिसेंड कर रहा होता है। तो मुझे जो लगता है कि शायद विजिबिलिटी लो होने की वजह से नहीं देख पाए और वो डिसेंड करते रहे लेकिन वहां पहाड़ियां भी है उस क्षेत्र में देखें तो रिपोर्ट्स भी बता रही है वहां पर जो गए हैं वो बता भी रहे हैं कि वहां पर पहाड़ी इलाका है तो हो सकता है कि वो इतना डिसेंड कर गए हो कि वो पहाड़ी के पास डी के पांडे सर मुंबई से बारामती की दूरी एयर डिस्टेंस अगर आप देखें तो बहुत ज्यादा नहीं है

और जैसा कि यूके देवनाथ सर ने कहा कि पहले उस जहां पर इनको डेस्टिनेशन पर लैंड करना था वहां से पूरी मालूमात एक-एक चीज कर ली गई होगी तो सडन में अचानक से मौसम खराब होगा देर से जानकारी मिली ये शायद इसकी पॉसिबिलिटी कम है मैं देवराज सर आपके पास लौटूंगी एक बार ना दर्शकों को ये देखिए एआई जनरेटेड हम ये वीडियो दिखा रहे हैं हम आपको बता दें कि रियल वीडियो नहीं है एआई जनरेटेड है

ताकि आप आसानी से समझ सके कि आखिर क्या हुआ था। जिस तरीके से यह प्लेन मुंबई से टेक ऑफ करता है और बारमती में आके खेत में जाकर जो है क्रैश कर जाता है और उसमें मौजूद थे महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम अजीत पवार। अब ये दोनों तस्वीर देख लीजिए। एक तरफ एआई जनरेटेड है और दूसरी तरफ ये लाइव तस्वीरें जो असल में विमान क्रैश हुआ है उसका मलबा बिखरा हुआ है और वहां पर फॉरेंसिक की टीम पहुंच चुकी है। और ये देखिए ये है आपको हादसे वाली जगह की तस्वीर। अब आप प्लेन के उस हिस्से को देख रहे हैं जो आपको नजर आ रहा है

यह प्लेन का सिर्फ पिछला हिस्सा ही बचा हुआ दिख रहा है थोड़ा बहुत और बाकी सारा कुछ जलकर खाख हो चुका है। वहां पर जांच टीम वहां पर मौके पर मौजूद है। पुलिस की टीम वहां पर मौके पर मौजूद है। सबसे पहले जब ये बीमार हादसे का शिकार हुआ। आसपास के ग्रामीण वहां पर पहुंचे और उसके बाद वहां पर दमकल विभाग की टीम पहुंची। प्रशासनिक अमला वहां पर पहुंचा। वी के पांडे सर ये जो मौसम के बारे में जानकारी क्योंकि मैं डिस्टेंस की बात कर रहा था कि मुंबई से बारामती बहुत ज्यादा दूर नहीं है

अगर मैं एयर डिस्टेंस की बात करूं तो सारी मालूमात उनको पहले से थी कि मौसम कैसा है और वहां लैंडिंग का वक्त क्या होगा और उस वक्त रनवे खाली था। बिल्कुल ना बिल्कुल सही कह रहे हैं। देखिए ये ये फैक्टर इतने इंपॉर्टेंट नहीं है क्योंकि जहाज दो हनीबल के इंजन है। पावरफुल इंजन है। कोई दिक्कत नहीं है। जहाज में कैपेबिलिटी है। कैपेसिटी है लॉन्ग डिस्टेंस तक जाने की। मतलब ये ढाई 3000 कि.मी. तक जा सकता है

ऐसा कोई दिक्कत नहीं है। तो जहां तक कैपिटी वो कोई दिक्कत नहीं है। पॉइंट ये है कि अगर मैं ये कह रहा हूं कि मुंबई से टेक ऑफ करके दोबारा मौसम की वजह से नीचे लैंड कर तब भी एक्सीडेंट होने की संभावना रहती है। अगर बाकी फैक्टर्स को आपने कंट्रोल नहीं किया तो पायलट का दिग्भ्रमित होना एक कारण हो सकता है।

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