बॉर्डर टू फिल्म को लेकर रिसेंटली जावेद अख्तर साहब ने एक स्टेटमेंट दिया था जिसमें उन्होंने कहा कि बॉर्डर टू फिल्म वालों ने मुझे संदेश आते हैं गाने के कुछ एडिशनल लिरिक्स लिखने के लिए अप्रोच किया था। लेकिन मैंने उन्हें मना कर दिया। मैंने उनसे कहा कि सेम गाने को वापस लिखना या सेम गाने को ही फिल्म में रखना यह एक इंटेलेक्चुअल बैंकप्सी है। आपके पास क्रिएटिविटी की कमी है। इसीलिए तो आपके पास एक पुराना गाना है।
आप नई फिल्म बना रहे हैं तो भी उस पुराने गाने को ही फिल्म में रख रहे हैं। या तो नया गाना बना लो या फिर एक्सेप्ट कर लो कि आपके पास क्रिएटिव और नए आइडियाज है ही नहीं। जावेद अख्तर का यह स्ट्रांग क्रिटिसिज्म हर तरफ चर्चा का विषय बना हुआ है। इधर बात करें बॉर्डर टू के प्रोड्यूसर यानी कि भूषण कुमार की तो उन्होंने जावेद अख्तर के इस बयान पर जवाब देते हुए कहा है कि बॉर्डर टू फिल्म जब हम बना रहे थे तो तीन चीजें बिल्कुल क्लियर थी कि टाइटल जो है वो बॉर्डर ही रहेगा। फिल्म में सनी देओल होंगे ही होंगे और संदे आते हैं।
इस गाने को तो रखना ही है। लेकिन इसी बीच जावेद अख्तर के इस स्टेटमेंट को कई लोग सेल्फ कंट्राडिक्टरी स्टेटमेंट बता रहे हैं। क्योंकि जहां एक तरफ संदेश आते हैं सॉन्ग को बॉर्डर टू में यूज करने का जावेद अख्तर विरोध कर रहे हैं। वहीं दूसरी तरफ जावेद अख्तर ने अपने बेटे फरहान अख्तर की डॉन फिल्म को सपोर्ट किया था। जो अमिताभ बच्चन की डॉन से इंस्पायर्ड थी। ना सिर्फ जावेद अख्तर ने इस फिल्म को सपोर्ट किया बल्कि डॉन के गाने भी वापस लिखे गए जिसमें यह मेरा दिल और खाई के पान बनारस वाला गाना शामिल है।
और हां टाइटल ट्रैक मैं हूं डॉन को कैसे भूल सकते हैं। अब जावेद अख्तर साहब से लोग यही सवाल पूछ रहे हैं कि जिस वक्त आप अपने बेटे फरहान अख्तर की फिल्म के लिए उन्हीं पुराने गानों को रीाइट कर रहे थे तब आपको इंटेलेक्चुअल और क्रिएटिव बैंककरपसी महसूस नहीं हुई। तब आपको नहीं लगा कि फिल्म के अंदर आपके पास कुछ नया करने को नहीं है तो आप पुराने गाने डालने के बजाय एक्सेप्ट कर लो कि आपके पास भी लिखने के लिए कुछ नया नहीं था।
जैसा कि आपने बॉर्डर टू के लिए कहा। खैर लोगों का मानना है कि जावेद अख्तर का बॉर्डर 2 के लिए इस तरह का स्टेटमेंट इस टाइम में आना इसके पीछे एक बड़ी वजह है। वजह है एक बार फिर से फरान अख्तर। एक्चुअली बॉर्डर 2 के रिलीज के एक ही हफ्ते पहले फरहान अख्तर की फिल्म 120 बहादुर ओटीटी पर रिलीज हुई।
यह फिल्म भी वॉर बेस्ड फिल्म थी। यह फिल्म थिएटर में नहीं चली और उसके बाद ओटीटी पर भी इस फिल्म ने कुछ खास माहौल नहीं बनाया। शायद उसी से परेशान होकर अख्तर साहब ने मीडिया में यह स्टेटमेंट दे दिया। यह सोचे बिना कि यह स्टेटमेंट देकर वो अपनी ही ट्रोलिंग का मौका लोगों को दे रहे हैं। खैर ऐसा पहली बार नहीं हुआ है
जब अख्तर साहब के स्टेटमेंट कंट्राडिक्टरी रहे हो। इससे पहले उन्होंने एनिमल फिल्म को क्रिटिसाइज किया था और बताया था कि बहुत ही ज्यादा वायलेंस है फिल्म के अंदर मिसोजनी है और तो और फिल्म के अंदर गाली गलौज भी है। सब लोगों ने उन्हें फरहान अख्तर की मिर्जापुर याद दिला दी थी और कहा था कि अगर एनिमल फिल्म में यह सब है.