दिन में 10–12 घंटे सीमेंट, अनाज और खाद की भारी बोरियां उठाना…
एक दिन में करीब 700 बोरे, जो आम इंसान की कमर तोड़ दें।
लेकिन महाराष्ट्र का रोशन भजंकर यहीं नहीं रुका।
दिन की मजदूरी उसके लिए बोझ नहीं, ट्रेनिंग थी।
रात को, थके शरीर के बावजूद, वो जिम जाता था—
ना महंगे सप्लीमेंट, ना शॉर्टकट… सिर्फ घर का खाना और अनुशासन।
हर पसीने की बूंद उसके परिवार के लिए एक वादा थी।
और आज वही मजदूर Bigg Boss के घर में कदम रख चुका है।
जहां से आप शुरू करते हैं वो मजबूरी हो सकती है,
लेकिन आप कहां तक पहुंचते हैं—वो आपका फैसला होता है। ![]()