इस अभिनेत्री ने 8 महीने तक अपने ही मू’त्र और म’ल में क्यों सोया?

हम कुंडल गमना बूरी रात मच को मच को पार आज यह दास्ता है भारतीय कन्नड़ फिल्म की मशहूर अभिनेत्री निर्माता और सामाजिक कार्यकर्ता की जिसने अपने दौर में अपनी खूबसूरती और बेहद आकर्षित रंग रूप की बदौलत पूरी दुनिया में व नाम बनाया जिसको आज तक बड़े सम्मान के साथ याद किया जाता है यो नमो हमा मन नदी के तारे इस अभिनेत्री की जिंदगी में ऐसा क्या हुआ था कि हिंदी सिनेमा के 111 सालों के इतिहास में यह एक ऐसी इकलौती अभिनेत्री थी जो देश के लिए शहीद अभिनेत्री कहलाई इस अभिनेत्री को भारत सरकार ने किस जुर्म में गिरफ्तार करके 8 महीने जेल में डाल कर दी दिल दहलाने वाली सजा जेल में इस अभिनेत्री के साथ ऐसा क्या हुआ था कि इनको रहना पड़ा था अपने ही मलम पूत्र में और क्यों इस अभिनेत्री को जेल में किया गया था सबके सामने एकदम नंगा एज अ वुमन कम्स इन शी इज ट्रिप नेकेड इन फ्रंट ऑफ एवरीवन एल्स क्यों भारत की प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने ढाए इस अभिनेत्री पर वो जुल्म जिनको सुनकर पूरी दुनिया की महिलाओं में बैठ गया डर और कैसे इस अभिनेत्री की मौत के लिए लिए आज भी भारतीय इतिहास में काले अक्षरों से लिखा गया इंदिरा गांधी का नाम बताएंगे

आपको और भी बहुत कुछ शर्मनाक और अपमानजनक जिंदगी और मौत की दास्तान आप बने रहिए हमारे साथ वीडियो के अंत तक आज हम अपने शो में बात करने जा रहे हैं एक ऐसी अभिनेत्री की जिंदगी के बारे में जिसे भले ही आज दुनिया ने भुला दिया हो लेकिन भारतीय राजनीति और भारतीय लोकतंत्र में इस अभिनेत्री के नाम को हमेशा याद रखा जाता है इस अभिनेत्री के नाम से आज भी क्यों भारतीय संसद गूंज उठता है क्यों इस अभिनेत्री के नाम पर गांधी परिवार को काले अक्षरों में काला धब्बामाना जाता है क्यों इस अभिनेत्री की जिंदगी से ज्यादा इनकी मौत बन गई पूरी दुनिया में चर्चा का विषय इतनी महान और शहीद कहलाई अभिनेत्री कोई और नहीं बल्कि वो थी

कन्नड़ और हिंदी सिनेमा की एक्ट्रेस स्नेहा लता रेड्डी नमस्कार आप सभी का स्वागत है बॉलीवुड नोवल के इस एपिसोड में स्नेहा लता रेड्डी का जन्म साल 1932 को आंध्र प्रदेश में धर्मांतर ईसाई परिवार में हुआ था स्नेहा का जन्म उस वक्त हुआ था जब इनका परिवार काफी दुख और तकलीफ के बीच जी रहा था लिहाजा स्नेहा लता का भी शुरुआती जीवन काफी दुख तकलीफ के साथ ही गुजरा थोड़ी बड़ी हुई तो अपने आसपास अंग्रेजों का जुल्म देखा जिसकी वजह से यह काफी क्रांतिकारी और बगावती विचारों की लड़की बन गई थी उनका मन पूरी तरह से ब्रिटिश राज के खिलाफ हो गया था और इसी सब को देखते हुए इन्होंने अपना ईसाई नाम बदलकर भारतीय नाम स्नेहा रख लिया था

और हमेशा के लिए भारतीय कपड़े और वेशभूषा अपना लिया यह ब्रिटिश कंपनी के खिलाफ थी यह अपने कॉलेज के समय से ही स्नेहा आजादी पर आधारित ना ट को में बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया करती थी ताकि लोग देश की आजादी के प्रति जागरूक हो सकें वंदे मातरम और इसी वजह से स्नेहा की रुचि नाटकों में दिन प्रतिदिन बढ़ने लगी कॉलेज की पढ़ाई पूरी करने के बाद स्नेहा एक थिएटर ग्रुप मद्रास प्लेयर्स से जुड़ गई थिएटर के दिनों में इनके नाटक को देखने अक्सर कन्नड़ तेलुगु फिल्म निर्देशक पट्टा भी राम रेड्डी आया करते थे वह अक्सर अपनी फिल्म के लिए इन्हीं नाटकों से कलाकारों को पसंद करते थे इन्हीं नाटकों के जरिए स्नेहा और पट्टा भी राम डेटी की मुलाकात हुई बातचीत में दोनों के विचार एक दूसरे से काफी मेल खाते थे लिहाजा इन दोनों की यह दोस्ती कब मोहब्बत में बदल गई

यह दोनों को ही पता नहीं चला और एक दिन इन दोनों ने परिवार के खिलाफ जाकर शादी कर ली और शादी के बाद स्नेहा लता रेड्डी फिल्मों में काम करने लगी जिसमें ज्यादातर फिल्म फिल्म इनके पति के द्वारा ही बनाई गई स्नेहा उस दौर में उन फिल्मों का हिस्सा होती थी जिन फिल्मों के जरिए समाज में चल रही कुप्रथा हों का जोर होता था इसीलिए नासमझ समाज में इनकी फिल्मों का काफी विरोध भी होता था और इनकी एक ऐसी ही कन्नड़ फिल्म थी जिसे कन्नड़ सिनेमा के इतिहास की आज तक की सबसे मशहूर फिल्म माना जाता है फिल्म का नाम था संस्कार साल 1971 में इस रिलीज को लेकर मद्रास सेंसर बोर्ड में ऐसा बवाल हुआ कि इस फिल्म को 4 साल तक लटका कर रखा लेकिन जब इस फिल्म के रिलीज को लेकर मामला कोर्ट में पहुंचा और कोर्ट की अनुमति मिलने के बाद इस फिल्म को रिलीज किया गया और जब यह फिल्म रिलीज हुई

तो समाज में इस फिल्म ने एक नई क्रांति ला दी इस फिल्म के ऊपर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय अवार्ड्स की मानो झड़ी लग गई थी और इस फिल्म से स्नेहा लता रेड्डी पूरी दुनिया में मशहूर हो गई और वो अब एक राष्ट्रीय फिल्म अभिनेत्री के तौर पर जानी जाने लगी इस फिल्म के बाद स्नेहा ने बैंगलोर और मद्रास के थिएटर की स्थापना की इन थिएटर के जरिए पूरे समाज और देश की महिलाओं के प्रति हो रहे अत्याचार कु प्रथाओं को उजागर किया जाता था और स्नेहा इन सब में सबसे आगे रहती थी और इसी वजह से इनकी इमेज अभिनेत्री के साथ-साथ सामाजिक कार्यकर्ता की भी थी इनके इन्हीं कामों की चर्चा राजनीति के बड़े लोगों के बीच होती थी और इसी राजनीति में एक नाम था जॉर्ज फर्नांडीस जो भारत की राजनीति के एक मशहूर समाजवादी नेता हैं स्नेहा लता रेड्डी और जॉर्ज फर्नांडीस की दोस्ती काफी अच्छी थी

लेकिन स्नेहा लता रेड्डी को क्या पता था कि यह दोस्ती आगे चलकर उनकी जिंदगी को पूरी तरह से बर्बाद और नरक बना देने वाली थी 25 जून 1975 की वह काली रात जिस दिन देश में वह हुआ जिसकी किसी ने भी कल्पना नहीं की थी 25 जून 1975 को देश की पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने रेडियो पर देश को संबोधित करते हुए देश में आपातकाल लगाने की घोषणा की भाइयों और बहनों राष्ट्रपति जी ने आपातकाल की घोषणा की है इससे आतंकित होने का कोई कारण नहीं है इस आपातकाल में देश के सभी नागरिकों पर देश के खिलाफ ने की पाबंदी लग गई देश की राजनीति से जुड़े बड़े छोटे सभी नेताओं अभिनेताओं को जबरदस्ती पकड़कर जेल में डाल दिया गया

कुछ नेता मौके का फायदा उठाकर कहीं अंडरग्राउंड हो गए और उन्हीं में से एक थे जॉर्ज फर्नांडिस दरअसल जॉर्ज फर्नांडीस का पकड़ा जाना इसलिए जरूरी था क्योंकि जॉर्ज फर्नांडीस आपातकाल से पहले ही रेलवे कर्मचारियों के लिए बेहतर काम बेहतर वेतन को लेकर इंदिरा गांधी सरकार के खिलाफ हड़ताल कर चु चुके थे और यह हड़ताल दुनिया की सबसे बड़ी हड़ताल थी जूते मार नों को भाइयों के ग को जूते मार धम इंकला जिंदाबाद आपातकाल के समय स्नेहा लता रेड्डी की बात जॉर्ज फर्नांडिस से हुई थी और उन्होंने बताया कि वह किस तरह से पूरे देश में इंदिरा गांधी के खिलाफ एक मूवमेंट चलाने वाले हैं लेकिन यह स्नेहा लता को जॉर्ज फर्नांडीस का यह प्रस्ताव सही नहीं लगा क्योंकि स्नेहा अहिंसा वादी थी

और जॉर्ज फर्नांडीस उस समय हिंसा की बात कर रहे थे लिहाजा स्नेहा उनसे अलग हो गई लेकिन इन दोनों की इस दोस्ती की खबर उस वक्त इंदिरा गांधी को भी थी इसीलिए इंदिरा गांधी जॉर्ज फर्नांडीस को पकड़ने के लिए शिकंजा कसते हुए स्नेहा लता रेडी के पीछे लग गई 27 अप्रैल 1976 की वो शाम जब स्नेहा लता और उनके पति पट्टा भी बेंगलोर से मद्रास के लिए एक जरूरी काम से निकले और यही वह वक्त था जब मुसीबत स्नेहा लता रेड्डी के जीवन में घुस गई थी उनकी जिंदगी दुख तकलीफ के सागर में डूबने वाली थी दरअसल इधर स्नेहा लता और पट्टा भी मद्रास आए और उधर बेंगलर में उनके घर पुलिस पहुंची और उन्होंने स्नेहा लता के बारे में उनके बेटे और बेटी के साथ-साथ बूढ़े माता-पिता को कठोरता के साथ पूछताछ की और पूरे घर के एक-एक सामान को तोड़फोड़ दिया उनके घर में हो रहे इस तांडव से स्नेहा लता बेखबर थी तो ऐसे में उनके एक पड़ोसी ने स्नेहा लता रेड्डी के बेंगलर वाले घर पर फोन करके उनको सारी सूचना दी सूचना मिलते ही दोनों पति-पत्नी मद्रास से बैंगलोर के लिए निकल गए

और जैसे ही स्नेहा लता रेड्डी घर पहुंची तो देखा उनके परिवार को पुलिस बेबुनियाद तरीके से उठाकर ले गई लेकिन जैसे ही स्नेहा लता रेड्डी पुलिस के पास अपने परिवार को छुड़ाने पहुंची तो पुलिस वालों ने परिवार को छोड़ दिया और स्नेहा लता रेड्डी को पूछताछ के नाम पर वहीं रोक लिया तीन दिन के मानसिक तनाव को झेलते हुए परिवार और खुद स्नेहा लता रेड्डी को कुछ पता ही नहीं चल रहा था कि आखिर यह सब क्या और क्यों हो रहा है पट्टा भी रेडी ने जब स्नेहा लता के बारे में पता किया तो उनको पता चला कि उनकी पत्नी को पुलिस ने बड़ोदरा डायनामाइट केस में आरोपी बनाया है पुलिस के मुताबिक स्नेहा लता संसद भवन कुछ मंत्रालयों और दिल्ली की कुछ प्रमुख इमारतों को बम से उड़ाने की साजिश रच रही थी और इसके साथ-साथ इनके ऊपर मीसा एक्ट भी लगा दिया मीसा एक्ट वो एक्ट था

जिसमें इमरजेंसी के समय सरकार के खिलाफ बोलने वाले किसी भी इंसान को पकड़कर जेल में डाल दिया जाता था लेकिन अभी तक स्नेहा के साथ जो हो रहा था वह सिर्फ एक दिखावा था असल में तो इंदिरा गांधी स्नेह लता के जरिए जॉर्ज फर्नांडीस का पता लगाना चाहती थी लेकिन स्नेहा लता जॉज फर्नांडीस के बारे में कुछ भी नहीं जानती थी लिहाजा उनसे जॉर्ज फर्नांडीस के बारे में जानकारी जुटाने के लिए सरकार ने उनके साथ जुल्म का वो खेल रचा कि किसी की भी रूह कांप जाए सबसे पहले स्नेहा लता रेड्डी को बैंगलोर की सेंट्रल जेल में ले जाया गया जहां इनको सभी और लोगों से अलग कालकोठरी में बंद कर दिया गया इस कालकोठरी में हमेशा अंधेरा रहता था और इसमें एक इंसान का शरीर पूरी तरह से आता भी नहीं था और इसी छोटे से बैरक में ही इंसान को मल मूत्र के लिए सिर्फ एक छे होता था

और जहां कीड़े मकड़े और मच्छरों की भरमार थी अब आप खुद ही कल्पना कीजिए कि इतनी भयावह सजा में स्नेहा लता ने कैसे रखा होगा अपने आप को जबकि स्नेहा लता रेड्डी को सांस लेने में दिक्कत होती थी क्योंकि वो अस्थमा की मरीज थी स्नेहा लता रेड्डी उसी कालकोठरी में थी और उसी में वह मलम पूत्र भी कर रही थी बदबू और मल मूत्र में सनी होने के कारण स्नेहा लता रेड्डी बेगुनाह होकर भी नरक से बदतर सजा भुगत रही थी उनकी यह सजा यहीं खत्म नहीं हुई इसी जेल में एक टॉर्चर रूम भी था जहां स्नेहा लता रेड्डी को ले जाया जाता था जहां पूछताछ के नाम पर उनसे उनके बदन से कपड़े उतरवाए जाते मना करने पर उनको मारा पीटा [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] जाता और जबरदस्ती उनको सबके सामने बिना कपड़ों के रखा जाता था स्नेहा लता रेड्डी उस तकलीफ से से गुजर रही थी जो शायद उन्होंने कभी भी अपने सपने में भी नहीं सोची थी स्नेहा लता को जेल में बद से बदतर खाना दिया जाता था उनको आए दिन नई-नई सजाएं दी जाती और जॉर्ज फर्नांडीस के बारे में पूछा जाता लेकिन जब उनको कुछ पता ही नहीं था तो आखिर वह जवाब क्या देती

लेकिन स्नेहा की किसी ने भी एक ना सुने और सरकार ने उनके ऊपर हर वो जुल्म और यातना की जिसका कोई अंत नहीं था [संगीत] ज इनकी इसी जेल में अटल बिहारी वाजपेई लाल कृष्ण आडवाणी जैसे बड़े नेता भी बंद थे और वह लोग अभी अक्सर दूर कहीं जेल में आधी रात को एक महिला के दर्द में चीखले दहाड़ में की आवाज सुनते थे जो उनको बाद में पता चला था कि वो आवाज स्नेहा लता रेड्डी की होती थी इतना जुल्म और यातना झेल करर स्नेहा मानसिक और शारीरिक रूप से कमजोर हो गई थी उनको अस्थमा की वजह से काफी तकलीफ झेलनी पड़ रही थी वो इतने दर्द में थी कि उनको अस्थमा के अटैक आने लगे जिसकी वजह से वह तड़पने लगी बिलख नहीं लगी लेकिन जेल के अधिकारी इतने निर्दय और जल्लाद थे कि वह स्नेहा को कोई भी स्वास्थ्य संबंधी दवाएं नहीं देते थे

उधर स्नेहा लता रेड्डी का पूरा परिवार परेशान था किसी को कुछ पता नहीं था कि स्नेहा के साथ जेल में आखिर क्या हो रहा है लेकिन आठ महीने बीत जाने के बाद एक दिन स्नेहा लता रेड्डी के घर में एक अनजान फोन बजा जो उनकी बेटी नंदा रेड्डी ने उठाया फोन से आवाज आई कि उनकी मां स्नेहा लता रेड्डी को विक्टोरिया हॉस्पिटल लाया गया है आप लोग उनसे मिलने आ सकते हैं जिसके बाद पूरा परिवार तुरंत हॉस्पिटल पहुंचा और वहां स्नेहा लता रेड्डी की हालत देखकर सबके होश फाख्ता हो गए उन्होंने देखा कि स्नेहा लता रेड्डी बिल्कुल कमजोर हो गई थी उनकी हड्डियां निकल आई थी जगह-जगह चेहरे और शरीर पर चोटों के निशान थे यह सब देख उनकी बेटी नंदा अपनी मां को गले लगाकर जोर-जोर से रोने लगी और स्नेहलता भी फूट-फूट कर रोने लगी हॉस्पिटल में छोटा सा इलाज कराने के बाद फिर से बैंगलर जेल में स्नेहा को डाल दिया गया बीमार लाचार स्नेहा दिन प्रतिदिन टूटती चली गई उनको फेफड़ों में भी संक्रमण हो चला था

उनकी हालत इतनी खराब हो गई कि लगने लगा कि कब मौत हो जाए लिहाजा जेल प्रशा शन ने डरते हुए उनको कुछ दिन के लिए पैरोल पर छोड़ दिया और 15 जनवरी 1977 को स्नेहा जेल से बाहर आ गई एमेटिक कोमा में जाते-जाते जब उनकी हालत बिगड़ी तो पेरोल पर उनको 15 जनवरी 77 में छोड़ा लेकिन स्नेहा लता बाहर आने के बाद भी जेल में उनके साथ हुए जुल्म के कहर के बारे में सोचती रहती और दोबारा जेल जाना पड़ेगा इस बात से ही वह पूरी तरह से कांप उठती और इसी सब सोच और कशमकश में 20 जनवरी 1977 को जेल से छूटने के पा दिन बाद ही उनकी मौत हो गई और स्नेहा हमेशा हमेशा के लिए उस जुल्म और नर्क की दुनिया से अलविदा कह गई वह जिंदगी की जंग को हार गई थी पुलिस के पास नेहा लता के खिलाफ कोई सबूत नहीं था फिर भी उनको इमरजेंसी काल में महीने तक जेल में रखा था चार्जशीट में इस औरत का नाम नहीं था और पाच दिन बाद उनका देहांत हो गया एक महान अभिनेत्री लेखिका सामाजिक कार्यकर्ता होने के बाद भी इस अभिनेत्री को जेल में वो दिन और सजा दी गई जो जेल में किसी आतंकवादी को भी नहीं दी जाती

स्नेहा को उस जुर्म की सजा दी गई जिसमें उनका हाथ या दोष कतई नहीं था स्नेहा लता की बेटी नंदा आज भी अपनी मां के साथ हुई इस ब वता को सोचकर सिहर उठती हैं और वह इंदिरा गांधी को अपनी मां का कातिल मानती हैं और उनके नाम को इतिहास के पन्नों में काले अक्षरों से लिखा देखती हैं जेल के वक्त स्नेहा ने एक लेटर भी लिखा था जिस पर उन्होंने अपने ऊपर हुए जुल्म को पूरी तरह से लिखा था जिसे उनके मरने के बाद अप्रेस डायरी के नाम से पब्लिश किया गया था स्नेहा लता रेड्डी की बेटी एक पत्रकार हैं और सामाजिक कार्यकर्ता भी हैं वो आए दिन जुल्म और सितम पर एक से एक एक आर्टिकल लिखती हैं वह अपनी मां की मौत को हत्या के रूप में देखती हैं वह हमेशा गांधी परिवार को इसका जिम्मेदार ठहरा हैं

और इसीलिए वह अपनी मां को आपातकाल का पहला शहीद मानती हैं और पाच दिन बाद उनका देहांत हो गया इनका इतिहास खून से सना है लेकिन आज भी भारतीय राजनीति और संसद में इनका नाम गूंजता है स्नेहलता रेड्डी की आज बात करना जरूरी है बेंगलुरु की जेल में बंद किया गया आज तत्कालीन सरकार गांधी परिवार और कांग्रेस सरकार को स्नेहा लता के ऊपर किए गए जुल्मों के लिए घेर द है जिसका जवाब कांग्रेस सरकार नहीं दे पाती है सत्ता और राज गद्दी के लालच में देश में इमरजेंसी लगाई गई जिसके नाम पर देश में 1 लाख लोगों को जेल में डाला गया लोगों की जबरदस्ती नसबंदी कराई गई लोगों से सरकार के खिलाफ बोलने की आजादी छीन ली गई और इस सब के चलते न जाने कित इतने ही लोग सरकार की बर्बरता के चलते बिना कसूर के दुनिया से अलविदा हो गए स्नेहा लता रेड्डी आज भले ही हमारे बीच नहीं हूं

लेकिन साउथ इंडस्ट्री में बड़े सम्मान के साथ उनको पूजा जाता है याद किया जाता है उनको लोग शहीद का दर्जा देते हैं दोस्तों आपको क्या लगता है कि इंदिरा गांधी ने देश में आपातकाल क्यों लगाया था स्नेहा लता रेड्डी की क्या गलती थी जिसकी वजह से यह महान अभिनेत्री दुनिया से चली गई अपने जवाब हमें कमेंट कट करके जरूर बताएं और आपको आज का हमारा यह शो कैसा लगा वह भी हमें कमेंट करके जरूर बताएं आपके पास नेहा लता रेड्डी से जुड़ा कोई भी सच हो तो हमारे साथ जरूर शेयर करें आपका और हमारा रिश्ता यूं ही बना रहे उसके लिए चैनल को सब्सक्राइब लाइक करना बिल्कुल ना भूलें बहुत जल्दी एक और सच्ची बायोग्राफी और कहानी के साथ फिर से हाजिर होंगे तब तक के लिए आप अपना और अपने परिवार का ख्याल रखें सुरक्षित रहे धन्यवाद ये स्नेहलता रेड्डी के शब्द जो उन्होंने इमरजेंसी के कालखंड में जेल में लिखे,

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