गलती किसी और की, करोड़पति बन गया कोई और, 20 मिनट में बना करोड़ पति..

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सोचिए अगर आपके ट्रेडिंग अकाउंट में अचानक ₹40 करोड़ आ जाए तो आपकी पहली प्रतिक्रिया क्या होगी? घबराहट, हैरानी या खुशी? लेकिन मुंबई के एक ट्रेडर ने इस स्थिति में ऐसा फैसला लिया जिसकी चर्चा पिछले 3 साल से हो रही है और मामला मुंबई हाईकोर्ट तक पहुंच गया है। यह कहानी किसी फिल्म स्क्रिप्ट जैसी लगती है लेकिन यह पूरी तरह से सच्ची है। आमतौर पर हम सुनते हैं कि एक छोटी सी गलती से शेयर बाजार में लोग लाखों करोड़ों गवा देते हैं,

लेकिन यहां कहानी ठीक उल्टी है। गलती किसी और की हुई कोई और करोड़पति बन गया। कोई और वह भी सिर्फ 20 मिनट में। बता दें कि यह मामला साल 2022 का है। मुंबई के रहने वाले गजानन राजगुरु का Kotak सिक्योरिटी में डीमेट अकाउंट था। वह फ्यूचर एंड ऑप्शन में ट्रेडिंग करते थे। एक दिन अचानक Kotak सिक्योरिटीज की एक तकनीकी गलती की वजह से उनके अकाउंट में करीब ₹40 करोड़ क्रेडिट हो गए,

वहीं शुरुआत में राजगुरु भी हैरान रह गए। लेकिन इसके बाद उन्होंने इस फंड का इस्तेमाल करते हुए एफएओ सेगमेंट में ट्रेडिंग की। करीब 20 मिनट के भीतर उन्होंने कई सौदे किए। ट्रेडिंग के दौरान पहले उन्हें करीब ₹54 लाख का नुकसान हुआ। लेकिन उन्होंने तुरंत अपनी रणनीति बदली। जो सौदा घाटे में चल रहा था, वही कुछ ही मिनटों में बड़े मुनाफे में बदल गया। वहीं इस पूरे ट्रेड के बाद राजगुरु ने कुल 2.38 करोड़ का प्रॉफिट कमाया। सभी टैक्स और चार्जर काटने के बाद उन्हें करीब 1.75 करोड़ का नेट प्रॉफिट हुआ। यहां तक कहानी सीधी लगती है,

लेकिन इसके बाद मामला पलट गया। कोटक सिक्योरिटीज को अपनी गलती का एहसास हुआ और उन्होंने तुरंत राजगुरु के अकाउंट से ₹40 करोड़ वापस ले लिए। इसके साथ ही ब्रोकरेज हाउस ने 1.75 करोड़ के प्रॉफिट की भी मांग की। बता दें कि मामला बंबई हाईकोर्ट पहुंचा गया। दिसंबर 2025 में हाईकोर्ट ने Kotak सिक्योरिटीज की इस मांग को गलत ठहराया। कोर्ट ने अपने आदेश में साफ कहा कि ट्रेडर ने यह मुनाफा अपनी ट्रेडिंग स्किल, मार्केट नॉलेज और रिस्क लेने की क्षमता के दम पर कमाया है,

इसलिए इसे अनुचित लाभ नहीं माना जा सकता। कोर्ट ने यह भी कहा कि इस तकनीकी गलती की वजह से कोटक सिक्योरिटीज की कोई वास्तविक नुकसान नहीं हुआ है। ऐसे में ब्रोकरेज हाउस उस मुनाफे पर दावा नहीं कर सकता। हालांकि कोटक सेक्रेटरीज की ओर से इस फैसले के खिलाफ दोबारा अपील दायर की गई जिस पर 4 फरवरी 2026 को सुनवाई होनी है। तब तक हाई कोर्ट ने 1.75 करोड़ राजगुरु को रखने का अंतिम आदेश दिया है,

यह मामला इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि यह फ्यूचर एंड ऑप्शन ट्रेडिंग से जुड़ा है। जिसे बेहद जोखिम भरा माना जाता है। सेबी के आंकड़ों के मुताबिक एफएओ हर 10 में से नौ निवेशक अपनी पूंजी गवाते हैं। इसके बावजूद इस मामले ने दिखा दिया कि कभी-कभी बाजार में एक फैसला जिंदगी बदल सकता है। अब देखना दिलचस्प होगा कि 4 फरवरी 2026 को अदालत इस मामले में क्या अंतिम फैसला सुनाती है।

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