विनोद खन्ना का वो वक़्त इतना बुरा था की उसकी जगह कोई और भी होता तो सब छोड़ के आश्रम में चला जाता..

वेल यह तो हम सब जानते हैं कि विनोद खन्ना साहब जो अब इस दुनिया में नहीं है वो अपने करियर के पीक टाइम पर ओशो चले गए थे। उन्होंने फिल्म इंडस्ट्री ही छोड़ दी थी। आखिर विनोद खन्ना साहब ने अपने करियर के पीक पर फिल्म इंडस्ट्री क्यों छोड़ी? इसके लिए कई थ्योरीज सामने आती है। कई लोगों ने कहा कि महेश भट्ट ने उन्हें ओशो से मिलवाया और वहीं से विनोद खन्ना स्पिरिचुअलिटी में चले गए और फिल्म इंडस्ट्री अपने करियर के पीक पर उन्होंने छोड़ दी,

महेश भट्ट को इसके लिए बहुत जिम्मेदार ठहराया गया। कई लोगों ने यह भी कहा कि फिल्म इंडस्ट्री में अमिताभ बच्चन के बढ़ते स्टारडम को देखकर विनोद खन्ना काफी टेंशन में आ गए थे और हर दिन उन्हें इनसिक्योरिटी हो रही थी। बस इसी वजह से वह धीरे-धीरे इंडस्ट्री से दूर हो गए। लेकिन अब विनोद खन्ना की वाइफ कविता खन्ना खुलासा किया है कि किस वजह से विनोद खन्ना ने आखिर अपने करियर के पीक पर फिल्म इंडस्ट्री छोड़ी और वो ओशो के पास चले गए। कविता खन्ना ने एक इंटरव्यू दिया है जिसमें उन्होंने खुलासा किया है कि विनोद खन्ना साहब का स्पिरिचुअलिटी के तरफ झुकाव शुरू से ही था,

एक बार उन्होंने ऑटोबायोग्राफी ऑफ अ योगी यह किताब उठाई और उसके बाद रात भर में उस किताब को फिनिश किया। यानी कि जब तक वह किताब पूरी नहीं हुई उन्होंने उस किताब को छोड़ा नहीं था। इसके बाद जे कृष्णमूर्ति जब भी मुंबई में आते थे तो विनोद खन्ना अपने शूट से ऑफ ले लेते थे और वो जे कृष्णमूर्ति की टीचिंग्स को फॉलो करते थे। उनकी क्लासेस जॉइ करते थे। फिर एक ऐसा टाइम आया जब विनोद खन्ना की जिंदगी में एक के बाद एक ऐसे इंसिडेंट्स होने लगे जिसके बाद इंसान को लगने लग जाता है कि आखिर मेरी लाइफ है क्या?

यह सब मेरे साथ हो क्यों रहा है? और विनोद खन्ना क्या उनकी जगह कोई और भी होता तो शायद वो यही करता। एक्चुअली विनोद खन्ना की जिंदगी में उस टाइम एक के बाद एक उनके बेहद करीबी लोग जो थे उनकी डेथ हो रही थी और यह एक या दो डेथ्स नहीं थी। पूरी पांच डेथ्स थी जिसमें से एक डेथ तो उनकी मदद की भी थी। विनोद खन्ना को इन इंसिडेंट्स ने इतना ज्यादा तोड़ दिया कि वो ओशो के आश्रम में वक्त बिताने लगे,

इनिशियली तो वह पूना के आश्रम में ही वक्त बिताते थे और शूट के लिए वापस मुंबई आ जाया करते थे। कविता ने बताया कि उस वक्त विनोद खन्ना बेहद हैंडसम और अपनी बॉडी और अपने काम के बेस्ट फॉर्म में थे। उस वक्त वो हेराफेरी और कुर्बानी जैसी फिल्में शूट कर रहे थे। वो पुणे से आते थे। अपना काम करते थे और फिर से पुणे लौट जाते थे। एक तरफ तो वह सुपरस्टार थे और दूसरी तरफ आश्रम में वह एक योगी की जिंदगी बिता रहे थे,

यहां पर उनका बंगला, उनके पास आलीशान लाइफस्टाइल थी और वहां पर वो 4/6 के बिस्तर पर टेढ़े सोया करते थे क्योंकि उनके पैर भी पूरी तरह उस बिस्तर पर फिट नहीं आते थे। कुछ इस तरह से वह अपनी जिंदगी बिता रहे थे। बाद में ओशो और लैंडो चले गए और वहां पर उन्होंने नए आश्रम की स्थापना की तो विनोद खन्ना भी यूएस चले गए और इसी वजह से वह फिल्म इंडस्ट्री से दूर हो गए। 4 साल वो वहां रहे और 1985 में वो वापस इंडिया लौटे,

1989 में उन्होंने कविता से शादी की। कविता खुद एक साध्वी थी। वह भी काफी स्पिरिचुअल थी और इसी के तहत उनकी मुलाकात हुई। उनका इंटरेस्ट डेवलप हुआ एक दूसरे में। 7 महीने तक एक दूसरे को डेट किया और उसके बाद इन दोनों ने शादी कर ली। इस शादी से विनोद खन्ना को दो बच्चे हुए। बेटा साक्षी और बेटी श्रद्धा खन्ना। कविता ने इस इंटरव्यू में यह भी बताया कि अक्षय खन्ना और राहुल खन्ना की वैसे तो उन्हें एक मदर की तरह परवरिश करनी चाहिए थी,

लेकिन वो यह नहीं कर पाई क्योंकि ऑलरेडी राहुल और अक्षय के पास दुनिया की बेस्ट मदर थी गीतांजलि जो कि विनोद खन्ना की पहली वाइफ थी और इस शादी से विनोद खन्ना को अक्षय और राहुल खन्ना हुए थे। 70 की उम्र में 2017 में विनोद खन्ना साहब ने इस दुनिया को अलविदा कहा.

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