विनोद खन्ना के बड़े बेटे को देखा ? छोटे भाई अक्षय खन्ना जितनी नहीं मिली सफलता..

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कभी-कभी इंसान के पास सब कुछ होते हुए भी उसे एक अनजाना खालीपन घेर लेता है। सुख सुविधाओं से घिरा होने के बावजूद दिल में कहीं ना कहीं किसी अधूरी ख्वाहिश की कमी चुभने लगती है। कुछ तो छूट गया। यही सोचते-सचते ना जाने कितने साल बीत जाते हैं और इंसान कुछ कर गुजरने की चाहत दिल में दबाए ही रह जाता है। फिर जब जिंदगी का आखिरी पड़ाव करीब आता है तो वही इंसान हड़बड़ाकर कुछ करने की कोशिश करता है,

लेकिन तब तक समय की रेत मुट्ठी से फिसल चुकी होती है। आप सोच रहे होंगे कि मैं हिंदी रेडियो पर इतनी गहरी और दार्शनिक बातें क्यों कर रही हूं। असल में आज हम आपको एक ऐसे कलाकार से मिलवाने जा रहे हैं जिनमें एक बेहतरीन अभिनेता बनने की पूरी काबिलियत थी। उनकी राह आसान करने के लिए उनके सुपरस्टार पिता का नाम और इंडस्ट्री के एक बड़ी पहचान भी उनके साथ थी। और अगर खूबसूरती की बात करें तो वे अपने पिता जितने ही आकर्षक और हैंडसम थे। लेकिन विडंबना देखिए। इतने संसाधन, इतनी संभावनाओं के बावजूद उनका यह टैलेंट और पहचान कहीं खो गया,

शायद इसलिए आज बहुत कम लोग उन्हें जानते हैं। ज्यादा देर ना करते हुए हम आपको बता दें कि हम बात कर रहे हैं मशहूर सुपरस्टार विनोद खन्ना के बड़े बेटे राहुल खन्ना की। बकवास ना कर। अमृतसर में इनके ग्रंथ साहब के साथ हमारा कुरान शरीफ रखा है। सिख मजहब तो आया ही था हिंदू और मुसलमान को मिलाने के लिए। और फिर दोस्तों में क्या झगड़े? हम सब तो एक दूसरे का साथ देंगे ना। आपने अभी जिस फिल्म की क्लिप देखी वो फिल्म साल 1998 में रिलीज हुई थी,

फिल्म का नाम था अर्थ 1947। दीपा मेहता जैसे कामयाब फिल्मकार द्वारा बनाई गई यह फिल्म ऑस्कर के दरवाजे तक तो पहुंची लेकिन बाकी समानांतर फिल्मों की तरह इस फिल्म को भी भारतीय दर्शकों ने नकार दिया। लेकिन इस फिल्म से एक नवोदित चेहरे ने बाकी फिल्मकारों का दिल जरूर जीत लिया। वह कलाकार थे राहुल खन्ना। आमिर खान जैसे सुपरस्टार के सामने होते हुए भी राहुल खन्ना ने अपने दम पर इस फिल्म में जान डाल दी। हालांकि दीपा मेहता इस फिल्म की निर्देशक थी और कनाडा में उनका खासा प्रभाव था। इसलिए वहां इस फिल्म ने अच्छा प्रदर्शन किया। फिल्म इतिहासकारों के अनुसार शायद इसी वजह से राहुल खन्ना ने हिंदी फिल्मों से दूर रहना ही बेहतर समझा,

हालांकि हमारी नजर में इस कहानी में एक से अधिक मोड़ है। राहुल खन्ना को एक अभिनेता बनने के लिए संघर्ष तो नहीं करना पड़ा लेकिन उनकी घरेलू जिंदगी में आज भी तनाव बना हुआ है। चाहे सवाल सगी और सौतेली मां के रिश्ते का हो या फिर दोनों भाइयों के आपसी संबंध का। हर मोड़ पर कई सवाल उठते रहे हैं। घरेलू संघर्ष की बात तो हम करेंगे ही लेकिन उससे पहले यह बता दें कि अक्षय खन्ना ने एक इंटरव्यू में अपने बड़े भाई राहुल के बारे में यह कहा था कि उनके बारे में वे खुद कोई टिप्पणी नहीं कर सकते। यहां तक कि उनसे पूछा गया कि आप दोनों एक ही माहौल में पले बड़े हैं,

फिर भी आपको उनकी पसंद नापसंद के बारे में पता क्यों नहीं है? दरअसल बातचीत उस विषय पर हो रही थी कि अक्षय ने एक बड़े बैनर की फिल्म के साथ डेब्यू किया। जबकि बड़े भाई राहुल ने टीवी के जरिए अभिनय की शुरुआत की। इस चर्चा पर पूर्ण विराम लगाते हुए अक्षय ने यह कह दिया कि अक्सर लोग वही करते हैं जिसके बारे में उन्होंने कभी सोचा भी नहीं होता। खैर, इस रिश्ते पर गौर करते हुए हम यह कह सकते हैं कि यह दोनों भाई 90 के दशक से ही एक दूसरे से दूरी बनाए हुए हैं,

इस दूरी की कहानी शुरू होती है विनोद खन्ना की दूसरी शादी से। बहुत कम लोग यह जानते होंगे कि सन्यास से लौटने के बाद विनोद खन्ना की जिंदगी में कविता आई जो उनसे लगभग 14 साल छोटी थी। 1990 में जब उनकी शादी हुई तब कविता मात्र 30 साल की थी। लेकिन यह भी सच है कि जैसे-जैसे विनोद खन्ना सन्यास की ओर बढ़ने लगे, वैसे-वैसे गीतांजलि के साथ उनका रिश्ता टूटने लगा। अमेरिका जाकर सन्यासी बनने से पहले ही विनोद खन्ना को गीतांजलि से तलाक का नोटिस मिल चुका था। हालांकि उन्होंने इस केस पर ज्यादा ध्यान नहीं दिया,

कुछ साल बाद जब उन्होंने इंडस्ट्री में वापसी की तो उन्हें गीतांजलि की कमी खलने लगी। ऐसे में उस कमी को कविता ने जरूर पूरा किया। लेकिन गीतांजलि के दोनों बच्चों को अपनाना उसके बस की बात नहीं थी। जहां राहुल खन्ना और कविता के बीच मात्र 20 साल का अंतर था। वहां मां बेटे का रिश्ता बन पाना मुमकिन नहीं था। इस समस्या को राहुल ने जितने नजदीक से देखा, उतना अक्षय ने नहीं देखा। यही वजह थी कि घरेलू तनाव बढ़ा और राहुल का झुकाव अपनी सगी मां की ओर ज्यादा हो गया। हालांकि इसका यह मतलब नहीं कि अक्षय खन्ना ने कविता को मां मान लिया था। वे भी गीतांजलि के उतने ही प्यारे बेटे थे,

जितने राहुल, फर्क सिर्फ इतना था कि राहुल ने अपने पिता की दूसरी शादी को कभी स्वीकार नहीं किया। यही कारण था कि अक्षय खन्ना को लॉन्च करने के लिए विनोद खन्ना ने हर संभव कोशिश की। सुपरस्टार पिता का बेटा होने का फायदा अक्षय को मिला लेकिन बड़े बेटे राहुल की किस्मत इतनी अच्छी नहीं थी। हालांकि परवरिश के मामले में विनोद खन्ना ने कोई कमी नहीं छोड़ी। जो सुविधाएं अक्षय को मिली वो राहुल को भी मिली। लेकिन राहुल के फिल्मी जगत में करियर बनाने के लिए विनोद खन्ना ने कोई मदद नहीं की। यह पूरी कहानी जितनी जटिल दिखती है उतनी है भी,

इस परिवार के सदस्यों के बीच जो भी कड़वाहट थी उसे उन्होंने कभी मीडिया के सामने नहीं आने दिया। राहुल खन्ना का जन्म 20 जून 1972 को मुंबई में हुआ था। उनकी मां गीतांजलि अपने जमाने की मशहूर मॉडल थी। जबकि उनके पिता विनोद खन्ना बॉलीवुड के बड़े सुपरस्टार माने जाते थे। ऐसा कहा जाता है कि विनोद खन्ना ने गीतांजलि से शादी करने से पहले लगभग 300 लड़कियों को मना किया था। लेकिन समय के साथ विनोद खन्ना और गीतांजलि के बीच दूरियां बढ़ने लगी। इसकी वजह थी विनोद खन्ना के अन्य अभिनेत्रियों के साथ संबंध। इस विषय पर ज्यादा बात ना करते हुए आइए अब राहुल खन्ना की कहानी पर ध्यान देते हैं,

कॉलेज के दिनों के बाद राहुल के लिए अपने पिता की तरह सुपरस्टार बनने का सपना देखना आसान था। लेकिन इस सपने को हकीकत में बदलने के लिए उन्हें दीपा मेहता का साथ मिला। जैसा कि हमने उनकी फिल्म अर्थ 1947 के बारे में पहले ही बताया है। उसी तरह यह बताना भी जरूरी है कि 1994 में जब टेलीविजन के क्षेत्र में वीडियो एल्बम का दौर शुरू हुआ था तब राहुल खन्ना ने एमT चैनल के लिए कई शो होस्ट किए थे। आज भी एमT में राहुल खन्ना का नाम बड़े सम्मान के साथ लिया जाता है। हालांकि फिल्मी दुनिया उनके लिए मेहरबान नहीं थी। MTV के होस्टिंग के बाद उन्होंने फिल्म अर्थ 1947 के साथ बड़े पर्दे पर डेब्यू किया। इसके बाद 2000 में उनकी फिल्म बवंडर रिलीज हुई,

लेकिन दुर्भाग्य से यह फिल्म भी बॉक्स ऑफिस पर अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पाई। इस निराशा के बाद राहुल वापस कनाडा चले गए और हॉलीवुड की फिल्मों में काम करने लगे। रंग रंग मेरे रंग रंग में रंग जाएगी तो रंग संग संग मेरे संग संग मेरे संग आएगी संग अब आप जो गाना सुन रहे हैं वो एक कनाडियन फिल्म का है। 2020 में रिलीज हुई फिल्म बॉलीवुड हॉलीवुड में राहुल खन्ना ने मुख्य भूमिका निभाई थी। यह फिल्म उनके करियर की सबसे बड़ी हिट मानी जाती है। इस फिल्म को कनाडा के सबसे प्रतिष्ठित जी अवार्ड से भी नवाजा गया था। बॉलीवुड हॉलीवुड के कारण राहुल खन्ना एक जाने-माने अंग्रेजी फिल्म अभिनेता बन गए। लेकिन यह उनकी असली मंजिल नहीं थी,

उन्हें आज भी लगता है कि वे हिंदी फिल्मों के लिए बने थे। जैसे कि हमने वीडियो की शुरुआत में कहा था। इंसान के पास सब कुछ होते हुए भी उसे किसी चीज की कमी महसूस होती है। राहुल के साथ भी ऐसा ही हुआ। अभिनय के क्षेत्र में लगभग 25 साल बिताने के बाद भी उन्हें अपनी मंजिल मिली नहीं। एक समय में दो नाव पर सवारी करना जितना मुश्किल है, उतना ही मुश्किल राहुल के लिए अपना करियर संभालना था। आखिरकार उन्होंने लेखन और होस्टिंग को ही अपने जीवन का लक्ष्य मान लिया। आज भी वे देश विदेश में होने वाले बड़े-बड़े अवार्ड, फंक्शन और फैशन शो होस्ट करते नजर आते हैं। अब सवाल यह है कि इतने बड़े सुपरस्टार का बेटा होस्टिंग कर रहा है,

यह बात दर्शकों को समझ नहीं आती। लेकिन राहुल खन्ना के जीवन में यह स्थिति क्यों आई? यह अब आपको पता चल गया होगा। राहुल खन्ना के जीवन में अच्छा समय कोरोना महामारी के बाद शुरू हुआ। उन्होंने ब्लॉगिंग करना शुरू किया और अपनी मन की बातें आम जनता तक पहुंचाने लगे। धीरे-धीरे जब वे फिर से लाइमलाइट में आने लगे तो उन्होंने मॉडलिंग का रुख किया। इसके साथ ही कुछ हिंदी फिल्मों में दोबारा अभिनय करके उन्होंने यह साबित कर दिया कि उन्हें भगवान से जितना मिला है, उतने में वे पूरी तरह से संतुष्ट और खुश हैं। अगर आप यह सोच रहे हैं कि हमने उनके परिवार के बारे में कुछ नहीं बताया, तो यह जानना जरूरी है कि अक्षय खन्ना की तरह राहुल भी अभी तक कुंवारे हैं। उम्र के 50 साल पार कर चुके राहुल खन्ना आज भी उतने ही युवा और फिट नजर आते हैं जैसे वे 90 के दशक में हुआ करते थे.

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