ना फूलों से सजी एंबुलेंस, ना फैंस का मेला, ना तन पर ढका गया तिरंगा और ना मिला राजकीय सम्मान। हिंदी सिनेमा के ही मैन की हुई यह कैसी सूनी विदाई? धर्मेंद्र के अंतिम संस्कार पर उठ रहे हैं सवाल। क्या अपनों ने ही धर्मेंद्र से छीन लिया सम्मान के साथ जाने का हक? क्या धर्मेंद्र के आखिरी सफर में उनके साथ परिवार ने ही कर डाली नाइंसाफी? देओल परिवार ने जल्दबाजी में क्यों लिया धर्मेंद्र के दाह संस्कार का फैसला?
आखिर क्यों परिवार ने जाने दिया राजकीय सम्मान के साथ पद्म भूषण धर्मेंद्र के अंतिम संस्कार का मौका। यह वो सवाल है जो अब धर्मेंद्र का हर डाई हार्ट फैन सनी देओल, बॉबी देओल और उनके पूरे परिवार से पूछ रहा है। यह तो सभी जानते हैं कि धर्मेंद्र अब हमारे बीच नहीं रहे हैं। 24 नवंबर की सुबह 89 साल की उम्र में धर्मेंद्र का निधन हो गया था। धर्मेंद्र का जाना उनके चाहने वालों को दर्द दे गया। लेकिन इससे कहीं ज्यादा दुख उन्हें तब हुआ जब फैंस को अपने चहेते अभिनेता के अंतिम दर्शन से वंचित कर दिया गया,
देओल परिवार ने धर्मेंद्र के निधन की खबर को गोपनीय रखा और ज्यादातर लोगों को खबर तो तब मिली जब धर्मेंद्र का पार्थिव शरीर अंतिम संस्कार के लिए उनके घर से निकल गया था। जिस एंबुलेंस में धर्मेंद्र अपने अंतिम सफर पर निकले, वो उनके चाहने वालों के लिए अगला झटका साबित हुआ। ना एंबुलेंस पर कोई तस्वीर, ना फूलों की सजावट, अंतिम सफर पर निकले धर्मेंद्र का कारवा यूं निकला कि लोगों को यकीन तक ना हुआ कि हिंदी सिनेमा का सबसे खूबसूरत,
सबसे जिंदा दिल और करोड़ों दिलों पर राज करने वाला अभिनेता अपने अंतिम सफर पर निकल गया है। इसके बाद हर कोई यही सवाल करने लगा कि धर्मेंद्र का अंतिम संस्कार राजकीय सम्मान से क्यों नहीं किया गया? साल 2012 में धर्मेंद्र को हिंदी सिनेमा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए पद्म भूषण सम्मान से नवाजा गया था। ऐसे में सभी को उम्मीद थी कि श्रीदेवी, दिलीप कुमार और मनोज कुमार की तरह ही धर्मेंद्र का अंतिम संस्कार भी राजकीय सम्मान के साथ होगा,
उनके आखिरी सफर के कारवा में लाखों फैंस का हुजूम उमड़ेगा। लेकिन ऐसा नहीं हुआ। लोगों को हैरानी हुई तो रोते-बिलखते फैंस यही सवाल पूछते नजर आए कि उनके हीरो के साथ यह नाइंसाफी क्यों हुई? वहीं कुछ फैंस तो ऐसे भी रहे जिन्होंने इसका जिम्मेदार धर्मेंद्र के दोनों बेटों सनी और बॉबी देओल को ही ठहरा दिया। एक यूजर ने लिखा अंतिम संस्कार इतनी जल्दी क्यों किया गया? उनके फैंस को अंतिम विदाई देने का मौका ही नहीं दिया गया,
एक और ने लिखा छुपने की क्या जरूरत थी? वो एक स्टार बने अपने फैंस की वजह से। कम से कम उनका चेहरा तो दिखा देते। एक और फैन ने गुस्सा जाहिर करते हुए लिखा सनी और बॉबी अपने पापा के गुनहगार हैं। ऐसा करके उन्होंने पिता से राज के सम्मान से विदा होने का सम्मान छीन लिया। एक और ने लिखा देओल परिवार के कलेश ने एक सितारे को उसके सम्मान से वंचित कर दिया जो वह डिर्व करता था,
हालांकि बता दें कि धर्मेंद्र को राजकीय सम्मान के साथ विदाई ना मिल पाने की वजह परिवार का फैसला है। दरअसल देओल फैमिली ने धर्मेंद्र के निधन की खबर को सुरक्षा कारणों के चलते गोपनीय रखा था और बिना किसी को खबर दिए जल्दबाजी में उनका अंतिम संस्कार करने का फैसला लिया था। वहीं दूसरी तरफ राजकीय सम्मान से अंतिम संस्कार के लिए परिवार को सबसे पहले प्रशासन को सूचना देनी होती है,
और बताना होता है कि वह मृतक के लिए राजकीय सम्मान चाहते हैं। एक रिक्वेस्ट लेटर भेजकर मृतक की उपलब्धियों और पुरस्कारों के साथ उनकी ओर से किए गए सार्वजनिक सेवा के बारे में भी बताना होता है। परिवार की सहमति, डेथ सर्टिफिकेट और पहचान पत्र जैसे डॉक्यूमेंट्स की जरूरत पूरी करने के बाद प्रशासन राजकीय सम्मान के लिए मंजूरी देता है,
इसके बाद ही सरकारी ऑफिसर्स की उपस्थिति में प्रशासन की ओर से गार्ड ऑफ ऑनर दिया जाता है। लेकिन धर्मेंद्र के साथ ऐसा नहीं हो पाया और फैंस के दिलों में हमेशा के लिए यह मलाल रह गया कि वो आखिरी बार अपने हीरो को ठीक से विदाई भी नहीं दे पाए।