हाँ मैं गया था पार्टी में नाचने, नहीं नाचता तो और क्या करता…

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80ज और 90ज में बॉलीवुड इंडस्ट्री की बहुत खराब हालत थी। बॉलीवुड वालों के पास फिल्में बनाने के लिए पैसे नहीं थे और ज्यादातर फिल्मों के लिए प्रोड्यूसर्स अंडरवर डॉन से ही लोन लिया करते थे। यह लोन 80-80 90 90% के ब्याज पर मिला करते थे और अगर कोई प्रोड्यूसर लोन नहीं चुका पाता था तो उसकी जिंदगी नर्क बन जाती थी,

यह खुलासा किया है आईपीएस ऑफिसर डी शिवनंदन ने। उन्होंने कहा है कि फिल्म इंडस्ट्री की फिल्में जैसे कि सत्य कंपनी शूट आउट एट वडाला शूट आउट एट लोखनवाला यह फिल्में गैंगस्टर्स की इमेज को लिफ्ट करने के लिए बनाई गई थी और इनमें फंडिंग भी गैंगस्टर्स की ही थी,

उन्होंने यह भी कहा कि मुकद्दर का सिकंदर और दीवार यह दोनों फिल्में भी अंडरवर ने ही फाइनेंस की थी। उन्होंने बताया कि कैसे 90ज में दाऊद इब्राहिम की बेटी की जब बर्थडे थी तो मुंबई से कई सारे आर्टिस्ट दुबई गए थे जिसमें एक पॉपुलर एक्टर 83 म्यूजिशियंस और कई लोग एक स्पेशल फ्लाइट से दुबई पहुंचे थे और वापस आए थे। हमने उन्हें देखा था। लेकिन हमने उनके खिलाफ कोई एक्शन नहीं लिया था,

हम यह भी मानते हैं कि हमारे पास उन्हें प्रोटेक्ट करने का कोई रास्ता नहीं था। एक्टर्स, प्रोड्यूसर्स डरते थे। मैंने एक बार गोविंदा को खुद कहते हुए सुना है कि हां मैं गया था वहां पर नाच के आ गया और क्या करता। अंडरवर्ड से उस दौरान सब डरते थे। यही वजह है कि उनकी डिमांड्स के आगे यह झुक जाते थे और जो नहीं झुका उसको खत्म कर दिया।

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