शिक्षा विभाग ने ठगा गया या सिस्टम ने तोड़ा? मुंबई के रोहित की मौत के पीछे की कहानीओ..

rohit aaarya

मुंबई के पवई में 17 बच्चों को बंधक बनाने वाले रोहित आर्य की मौत हो गई है। पुलिस ने बताया कि आरोपी रोहित आर्य ने पुलिस पर फायरिंग की थी। इसके बाद पुलिस ने भी जवाबी कारवाई की। इसी जवाबी फायरिंग में रोहित घायल हो गया। जिसके बाद इलाज के दौरान उसने दम तोड़ दिया। गौरतलब है कि आज शाम को सिरफिरे रोहित आर्य ने ऑडिशन के लिए आए 17 बच्चों को बंधक बना लिया था,

हालांकि इन सभी बंधक बच्चों को सकुशल रिहा करवा लिया गया। ये पुलिस मुंबई पुलिस की काबिलियत थी। लेकिन इन सारे घटनाक्रम के बीच जो एक सबसे अहम सवाल लोगों के जेहन में चल रहा है वो यह कि मुंबई में 17 बच्चों को बंधक बनाने वाला यह रोहित आर्य आखिर कौन है? और वो क्या चाहता था? इस वीडियो में हम इन्हीं सवालों का जवाब देंगे। बने रहिए हमारे साथ। नमस्ते। मैं हूं असीम और आप देख रहे हैं NDTV इंडिया,

सबसे पहले हम अपने दर्शकों को यह बताना चाहेंगे कि NDTV को मिली जानकारी के मुताबिक किडनैपर रोहित आर्य का कनेक्शन मुंबई के शिक्षा विभाग से रहा है। जानकारी मिल रही है कि एकनाथ शिंद सरकार में जब दीपक केसरकर महाराष्ट्र के स्कूली शिक्षा मंत्री थे तब रोहित आर्य को शिक्षा विभाग से एक स्कूल में बच्चों के बीच काम करने के लिए टेंडर मिला था। लेकिन उस काम के पैसे उसे अब तक नहीं मिले थे,

अपने काम करने की बकाया राशि ना मिलने के कारण रोहित आर्य ने इससे पहले भी मंत्री दीपक केसरकर के आवास के बाहर कई बार आंदोलन और भूख हड़ताल भी की थी। अभी तक जो जानकारी हमें मिल रही है उसके मुताबिक आरोपी रोहित आर्य अपने प्रोजेक्ट का भुगतान अब तक नहीं होने के कारण काफी परेशान चल रहा था और अपनी बात को सिस्टम तक पहुंचाने के लिए गुस्से में उसने बच्चों को बंधक बनाने का गलत फैसला कर लिया। बताया जा रहा है कि पुणे का रहने वाला रोहित आर्य एक सामाजिक कार्यकर्ता रहा था,

उसका दावा था कि उसने मुख्यमंत्री मेरी शाला सुंदरशाला अभियान के तहत चलाए गए पीएलसी स्वच्छता मॉनिटर परियोजना के लिए काम किया था। हालांकि रोहित का यह आरोप था कि महाराष्ट्र सरकार के शिक्षण विभाग ने उसके काम का भुगतान नहीं किया था। साल 2013 में आर्य ने लेट्स चेंज अभियान के माध्यम से इस परियोजना की कल्पना की थी। जिसका उद्देश्य स्कूली बच्चों को स्वच्छता दूत बनाना था,

बताया जा रहा है कि तब गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस परियोजना की सराहना भी की थी और पूर्व शिक्षा मंत्री दीपक केसरकर के निर्देश पर 2022 में अपने खर्च पर यह परियोजना महाराष्ट्र के स्कूलों में उसने शुरू की थी। लेकिन आर्य का आरोप था कि इस परियोजना के लिए शिक्षण विभाग ने 2 करोड़ की राशि आवंटित की थी। लेकिन जनवरी 2024 से वरिष्ठ अधिकारी केवल आश्वासन दे रहे थे। लेकिन उसके पैसों का भुगतान नहीं किया जा रहा था। इसके अलावा उसे इस अभियान से बाहर कर दिया गया था,

इन्हीं सब बातों से तंग आकर आर्या ने जुलाई और अगस्त में पूर्व मंत्री दीपक केसरकर के सरकारी बंगले के बाहर भूख हड़ताल शुरू की थी। हालांकि इस बारे में आर्य ने यह भी दावा किया था कि महाराष्ट्र के पूर्व मंत्री दीपक केसरकर ने जब उसे बकाया पैसे दिए जाने का आश्वासन दिया तब आर्य ने भूख हड़ताल को तोड़ दिया था। हालांकि दीपक केसरकर के आश्वासन के बावजूद जब उसके बकाया पैसे नहीं मिले तब केसरकर ने उसे व्यक्तिगत सहायता के रूप में ₹7 लाख और ₹8 लाख के दो चेक दिए थे और शेष राशि बाद में देने का वादा भी किया था,

लेकिन वह राशि पूरी नहीं मिली। आर्य ने यह भी आरोप लगाया कि पीएलसी स्वच्छता मॉनिटर अभियान में सबसे स्वच्छ स्कूलों को जानबूझकर गलत अंक दिए गए थे और राजनीतिक नेताओं के स्कूलों को विजेता के रूप में चुन लिया गया था। हालांकि रोहित आर्य की असली कहानी और असल सच क्या है यह बताने के लिए अब वो इस दुनिया में नहीं है। इस मामले में अब जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ेगी हम आपको पल-पल की जानकारी देते रहेंगे.

Post Comment

You May Have Missed